सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर 2026
लखनऊ में फिरौती के लिए अपहरण का खौफनाक अंत
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ₹50 लाख की फिरौती के लिए कथित तौर पर किए गए अपहरण का मामला अब दोहरे हत्याकांड में बदल गया है। पुलिस के मुताबिक, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात पवन कुमार गर्ग और उनके दोस्त सचिन विश्वकर्मा का अपहरण कर उन्हें बंधक बनाया गया। आरोप है कि ₹50 लाख की रकम नहीं मिलने के बाद दोनों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शवों को घाघरा नदी में फेंकने की बात सामने आई है।
इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जांच को भटकाने के लिए पवन गर्ग की कार को दूसरी जगह लावारिस हालत में खड़ा कर दिया था। फिलहाल पुलिस दोनों शवों की तलाश और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पैसे की जानकारी से शुरू हुई साजिश?
पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत पैसों की जानकारी से हुई। पुलिस का दावा है कि मुख्य आरोपी नितिन मिश्रा पवन कुमार गर्ग को पहले से जानता था। पवन ने कथित तौर पर जमीन या प्रॉपर्टी में निवेश के लिए अपने पास लगभग ₹50 से ₹60 लाख होने की बात बताई थी।
पुलिस के अनुसार, यही जानकारी नितिन के लिए लालच का कारण बनी। आरोप है कि उसने अपने चार साथियों के साथ मिलकर पवन को अगवा करने और उनसे ₹50 लाख की फिरौती वसूलने की योजना बनाई। इस योजना में प्रॉपर्टी दिखाने के बहाने पवन को बुलाने की बात सामने आई है।
27 सितंबर की रात बुलाया गया
पुलिस के मुताबिक, 27 सितंबर की रात नितिन ने पवन कुमार गर्ग को लखनऊ के भिठौली क्रॉसिंग के पास बुलाया था। पवन अकेले नहीं पहुंचे, बल्कि उनके दोस्त सचिन विश्वकर्मा भी उनके साथ थे।
इसके बाद दोनों को इटौंजा क्षेत्र के न्यू फौजी ढाबे पर ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, वहां कुछ समय रुकने के बाद आरोपियों और दोनों युवकों के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद दोनों को अन्नामऊ स्थित एक निर्माणाधीन मकान में ले जाया गया।
पुलिस का आरोप है कि इसी निर्माणाधीन मकान में पवन और सचिन को बंधक बनाकर अलग-अलग कमरों में रखा गया और उनसे ₹50 लाख की फिरौती मांगी गई।
फिरौती नहीं मिली तो हत्या का आरोप
पुलिस की जांच के अनुसार, आरोपियों ने पवन से ₹50 लाख देने को कहा, लेकिन वह रकम देने के लिए तैयार नहीं हुए। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को डर था कि यदि दोनों को छोड़ दिया गया तो वे पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दे देंगे।
इसी आशंका के चलते कथित तौर पर दोनों की हत्या करने का फैसला लिया गया।
पुलिस के अनुसार, 28 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे पवन कुमार गर्ग और सचिन विश्वकर्मा की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई। यह पुलिस की जांच में सामने आया घटनाक्रम है; मामले में आरोपियों के खिलाफ आगे की न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों का परीक्षण होना बाकी है।
शव घाघरा नदी में फेंकने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद आरोपियों ने शवों को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। उसी दिन शाम करीब 5:30 बजे दोनों शवों को एक थार गाड़ी में रखा गया।
इसके बाद आरोपी कथित तौर पर महमूदाबाद के पास चलहरी घाट पहुंचे। पुलिस के अनुसार, वहां पुल से दोनों शवों को घाघरा नदी में फेंक दिया गया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक खबर लिखे जाने तक दोनों शव बरामद नहीं हुए थे। पुलिस नदी में गोताखोरों की मदद से उनकी तलाश कर रही थी। इसलिए शवों के संबंध में अंतिम पुष्टि बरामदगी और आगे की जांच के बाद ही मानी जाएगी।
जांच को भटकाने के लिए कार छोड़ने का आरोप
इस हत्याकांड में आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, पवन कुमार गर्ग की ब्रेजा कार को घटनास्थल से हटाकर सीतापुर क्षेत्र में लावारिस हालत में खड़ा किया गया, ताकि जांच की दिशा दूसरी ओर चली जाए। कार मिलने के बाद शुरुआत में पुलिस ने गुमशुदगी के मामले को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग पहलुओं पर जांच शुरू की।
पुलिस ने रास्तों में लगे CCTV कैमरों और टोल प्लाजा से मिले रिकॉर्ड को खंगाला। इसी दौरान आरोपियों की गतिविधियों और वाहनों की आवाजाही से जुड़े अहम सुराग मिलने की बात सामने आई।
29 सितंबर को दर्ज हुई गुमशुदगी
पवन कुमार गर्ग के अचानक लापता होने के बाद परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। रिपोर्टों के अनुसार, 29 सितंबर को उनके भतीजे संजय गर्ग ने मड़ियांव थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई।
इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज की। CCTV फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने पवन और उनके दोस्त की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की।
जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को कथित अपहरण और हत्या की साजिश के बारे में सुराग मिले। 2 अक्टूबर को पवन के भाई मनोज कुमार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई और तेज हुई।
पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों में गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं—
नितिन मिश्रा उर्फ डब्लू महाराज — कथित मुख्य आरोपी
अवनीश कुमार मौर्य
प्रकाश सिंह उर्फ पुद्दी
सूरज सिंह
मोहित सिंह
पुलिस के अनुसार, इन सभी पर अपहरण और हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कथित तौर पर मृतकों की कुछ व्यक्तिगत वस्तुएं और वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहनों से जुड़े साक्ष्य भी बरामद किए हैं।
पुलिस को कैसे मिला सुराग?
इस मामले की जांच में CCTV फुटेज, टोल प्लाजा रिकॉर्ड, मुखबिर की सूचना और आरोपियों से पूछताछ को अहम बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, पवन की कार को दूसरी जगह छोड़ने के बावजूद आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े कुछ सुराग जांचकर्ताओं के हाथ लगे।
इसके बाद पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी और भिठौली तिराहे के पास पांचों आरोपियों को गिरफ्तार करने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में कथित तौर पर अपहरण और हत्या की पूरी साजिश का खुलासा हुआ।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती
इस मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है। सबसे महत्वपूर्ण चुनौती दोनों लापता लोगों के शवों को बरामद करना है। पुलिस घाघरा नदी में उनकी तलाश कर रही है।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस वारदात की योजना कब और कैसे बनाई गई, इसमें किसकी क्या भूमिका थी और आरोपियों के दावों की पुष्टि CCTV, मोबाइल डेटा, वाहनों और अन्य फोरेंसिक साक्ष्यों से किस हद तक होती है।
मामले में गिरफ्तारियां पुलिस जांच की एक महत्वपूर्ण कार्रवाई हैं, लेकिन अदालत में दोष सिद्ध होना अलग प्रक्रिया है। इसलिए आरोपियों को फिलहाल पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। आगे की कानूनी कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्य ही मामले की अंतिम तस्वीर स्पष्ट करेंगे।
KGMU में भी शोक का माहौल
पवन कुमार गर्ग के KGMU से जुड़े होने के कारण इस घटना से मेडिकल संस्थान से जुड़े लोगों में भी चिंता और शोक का माहौल है। रिपोर्टों के अनुसार, वह लंबे समय से KGMU में सेवाएं दे रहे थे। उनके साथ उनके दोस्त सचिन विश्वकर्मा भी इस वारदात का शिकार हुए।
एक तरफ पुलिस पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की कड़ियां जोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ परिवार और जांच एजेंसियों की नजर अब घाघरा नदी में शवों की तलाश पर है।
फिलहाल पुलिस की कहानी के अनुसार, यह पूरा मामला कथित तौर पर ₹50 लाख की फिरौती के लालच से शुरू हुआ और दो लोगों की हत्या तक पहुंच गया। जांच में सामने आए CCTV फुटेज, वाहनों की आवाजाही, बरामद सामान और अन्य साक्ष्य आने वाले दिनों में इस मामले की पूरी सच्चाई स्थापित करने में महत्वपूर्ण होंगे।
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