Skip to main content

सावधान नेशन न्यूज़

उत्तर कोरिया ने फिर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, 700 किमी से ज्यादा की उड़ान; जापान के EEZ के बाहर गिरी

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर 2026

उत्तर कोरिया ने क्या किया?
उत्तर कोरिया ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 की सुबह, अपने पूर्वी तटीय क्षेत्र वॉनसान (Wonsan) से एक बैलिस्टिक मिसाइल समुद्र की ओर दागी। दक्षिण कोरिया की सेना के मुताबिक मिसाइल ने 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और समुद्र में जाकर गिरी। जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल जापान के Exclusive Economic Zone यानी EEZ के बाहर गिरी।

यह घटना ऐसे समय हुई है जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। हाल ही में दोनों देशों के बीच सीमा पर बारूदी सुरंगों के मुद्दे को लेकर भी गंभीर विवाद हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में शनिवार का मिसाइल परीक्षण क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंता पैदा करता है।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने लॉन्च को शुरुआती चरण से ही ट्रैक किया और दोनों देशों के बीच जानकारी साझा की गई। दक्षिण कोरिया ने इसके बाद निगरानी और सैन्य सतर्कता बढ़ा दी है तथा अमेरिका और जापान के साथ मिलकर मिसाइल से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण किया जा रहा है।

मिसाइल कितनी दूर तक गई?
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ यानी JCS ने बताया कि मिसाइल ने 700 किलोमीटर से ज्यादा उड़ान भरी। जापान के रक्षा मंत्रालय ने अधिक विशिष्ट प्रारंभिक आंकड़ा देते हुए इसकी उड़ान लगभग 680 किलोमीटर और अधिकतम ऊंचाई करीब 90 किलोमीटर बताई। दोनों देशों के आंकड़ों में मामूली अंतर है, इसलिए मिसाइल की अंतिम तकनीकी पहचान अभी विश्लेषण के अधीन है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि मिसाइल जापान के EEZ के बाहर गिरी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में किसी जहाज या विमान को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है। जापानी अधिकारियों ने घटना के बाद संबंधित जानकारी जुटाने और सुरक्षा की पुष्टि करने के लिए कदम उठाए।

दक्षिण कोरिया की सेना ने अभी यह अंतिम रूप से नहीं बताया है कि मिसाइल का सटीक मॉडल या प्रकार क्या था। कुछ दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में यह संभावना सामने आई है कि मिसाइल की तकनीकी प्रकृति का विश्लेषण जारी है और इसे कुछ मध्यम या इंटरमीडिएट रेंज वाली प्रणालियों से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन इसे अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है।

इस समय मिसाइल क्यों दागी गई?
इस सवाल का निश्चित जवाब अभी सामने नहीं आया है। हालांकि, इस परीक्षण की टाइमिंग महत्वपूर्ण है।
पिछले कुछ दिनों से उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच DMZ यानी Demilitarized Zone को लेकर विवाद चल रहा है। 21 सितंबर को सीमा क्षेत्र में बारूदी सुरंगों के विस्फोट में तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे, जिनमें दो गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।
दक्षिण कोरिया और संयुक्त राष्ट्र कमान ने जांच के आधार पर उत्तर कोरिया पर इन बारूदी सुरंगों के लिए जिम्मेदारी डाली और इसे 1953 के युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया। दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया से माफी मांगने और सीमा पर किलेबंदी जैसी गतिविधियां रोकने की मांग की।

लेकिन उत्तर कोरिया ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो-जोंग ने दक्षिण कोरिया के आरोपों को गलत बताया और माफी की मांग को भी स्वीकार नहीं किया।

इसी तनाव के बीच शनिवार को मिसाइल लॉन्च हुआ। इसलिए इस घटना को केवल एक अलग सैन्य परीक्षण के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे दोनों कोरियाई देशों के बीच पहले से चल रहे तनाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
हालांकि, यह कहना कि मिसाइल परीक्षण निश्चित रूप से सीमा विवाद के जवाब में ही किया गया, अभी जल्दबाजी होगी। उत्तर कोरिया की तरफ से इस विशेष लॉन्च के उद्देश्य की कोई स्पष्ट आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई है।


संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से इसका क्या संबंध है?
उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्ताव प्रतिबंध लगाते हैं। दक्षिण कोरिया ने इस नए लॉन्च को भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया है। जापान ने भी मिसाइल परीक्षण की निंदा की और इसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ बताया।

बैलिस्टिक मिसाइलें इसलिए विशेष चिंता का विषय हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल अलग-अलग दूरी के लक्ष्यों तक हथियार पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। उत्तर कोरिया लंबे समय से अपने मिसाइल कार्यक्रम का विकास कर रहा है और समय-समय पर अलग-अलग प्रकार की मिसाइलों के परीक्षण करता रहा है।
लेकिन इस विशेष मिसाइल की सटीक क्षमता, मॉडल और उद्देश्य पर अभी दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान का तकनीकी विश्लेषण जारी है। इसलिए बिना आधिकारिक पुष्टि के इसे किसी खास मिसाइल प्रणाली का नाम देना सही नहीं होगा।


दक्षिण कोरिया ने क्या किया?
मिसाइल लॉन्च के बाद दक्षिण कोरिया ने अपनी निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने लॉन्च से संबंधित जानकारी साझा की।
दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा है कि वह उत्तर कोरिया की अतिरिक्त सैन्य गतिविधियों पर नजर रख रही है और संभावित नए मिसाइल लॉन्च के लिए तैयार है। अमेरिका और जापान के साथ भी इस संबंध में सूचनाओं का आदान-प्रदान जारी है।

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने भी इस घटना के बाद स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की। इससे पता चलता है कि सियोल इस लॉन्च को सामान्य गतिविधि के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि इसे व्यापक सुरक्षा स्थिति के हिस्से के रूप में देख रहा है।

जापान की चिंता क्यों बढ़ी?
मिसाइल उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से समुद्र की ओर दागी गई और जापान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में जाकर गिरी। हालांकि वह जापान के EEZ से बाहर गिरी, फिर भी जापान के लिए उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय हैं।
जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल करीब 680 किलोमीटर तक गई और लगभग 90 किलोमीटर की अधिकतम ऊंचाई तक पहुंची। जापान ने कहा कि उसे फिलहाल किसी जहाज या विमान को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं मिली है।

जापान ने उत्तर कोरिया के खिलाफ राजनयिक विरोध भी दर्ज कराया है।


यह पहले के मिसाइल परीक्षणों से कैसे जुड़ा है?
यह लॉन्च अचानक पूरी तरह अलग घटना नहीं है। उत्तर कोरिया ने 20 सितंबर 2026 को भी वॉनसान क्षेत्र से दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें समुद्र की ओर दागी थीं। शनिवार का नया परीक्षण उस घटना के लगभग 13 दिन बाद हुआ है।

इससे पहले अगस्त में भी वॉनसान क्षेत्र से लगभग 700 किलोमीटर की उड़ान वाली मिसाइल का परीक्षण हुआ था। उस समय दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभ्यासों के संदर्भ में उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया था।

इसलिए हालिया घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि उत्तर कोरिया लगातार अपनी मिसाइल गतिविधियां जारी रखे हुए है। हालांकि हर परीक्षण के पीछे एक ही कारण मानना उचित नहीं होगा।


क्या इससे युद्ध का खतरा बढ़ गया है?
मिसाइल परीक्षण से क्षेत्रीय सैन्य तनाव जरूर बढ़ता है, लेकिन केवल इस घटना के आधार पर यह कहना कि युद्ध होने वाला है, सही नहीं होगा।
वर्तमान स्थिति में तीन महत्वपूर्ण बातें हैं:
उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान निगरानी तथा सूचना-साझाकरण बढ़ा रहे हैं।
उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच सीमा और सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले से तनाव चल रहा है।
इसके बावजूद शनिवार के लॉन्च में मिसाइल जापान के EEZ के बाहर गिरी और तत्काल किसी जहाज या विमान को नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने भी प्रारंभिक आकलन में कहा कि लॉन्च से अमेरिकी कर्मियों या क्षेत्र तथा उसके सहयोगियों के लिए तत्काल खतरा नहीं था।

इसलिए फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इसे बढ़ते सैन्य तनाव की एक गंभीर घटना कहना उचित है, लेकिन इसे सीधे युद्ध की शुरुआत के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।


आगे क्या हो सकता है?
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान मिसाइल की तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करके इसकी सटीक पहचान, गति, उड़ान पथ और क्षमता के बारे में क्या निष्कर्ष देते हैं।
साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उत्तर कोरिया आने वाले दिनों में कोई और मिसाइल या हथियार परीक्षण करता है या नहीं।
दक्षिण कोरिया पहले ही अतिरिक्त लॉन्च की संभावना को देखते हुए निगरानी बढ़ा चुका है। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच DMZ को लेकर विवाद भी अभी समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में किसी भी नई सैन्य गतिविधि पर क्षेत्रीय देशों की नजर रहेगी।

निष्कर्ष
3 अक्टूबर 2026 का उत्तर कोरियाई मिसाइल परीक्षण पूर्वी एशिया की सुरक्षा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण घटना है। वॉनसान से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल ने 700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की और जापान के EEZ के बाहर समुद्र में गिरी। फिलहाल किसी जहाज या विमान को नुकसान की सूचना नहीं है।
इस घटना का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि यह ऐसे समय हुई है जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच DMZ में बारूदी सुरंगों के विवाद, सीमा पर सैन्य गतिविधियों और तीखे बयानों के कारण तनाव बढ़ा हुआ है।


हालांकि मिसाइल के सटीक प्रकार और परीक्षण के उद्देश्य पर जांच जारी है। इसलिए अभी उपलब्ध तथ्यों से आगे बढ़कर किसी निश्चित सैन्य या राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

सावधान नेशन न्यूज़…