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सावधान नेशन न्यूज़

ईरान पर होने वाले भीषण हमले टाले, होर्मुज खोलने और परमाणु संकट रोकने पर बनी सहमति

मुख्य घोषणा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर होने वाले एक बड़े और विनाशकारी सैन्य हमले को टाल दिया है। इससे पहले अमेरिकी और इजरायली सेना ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर बड़े हवाई हमलों की तैयारी कर रही थी, जो इसी सप्ताहांत शुरू होने वाले थे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह से “लॉक एंड लोडेड” (हमले के लिए तैयार) थी, लेकिन अंतिम समय पर इसे रोक दिया गया।

ट्रंप का दावा: एक संभावित समझौते की रूपरेखा तैयारट्रंप के मुताबिक, ईरान और कई अन्य मध्य-पूर्वी देशों ने उनसे हमलों को रोकने का अनुरोध किया था क्योंकि एक नए शांति समझौते का बुनियादी ढांचा तय हो चुका है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम तभी स्थायी होगा जब दोनों देश बेहद तेजी से इस समझौते को अंतिम रूप देंगे। इस प्रस्तावित समझौते में दो प्रमुख शर्तें शामिल हैं:होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत, पूरी तरह और बिना किसी शर्त के वैश्विक जहाजों के लिए खोला जाएगा। ईरान के परमाणु खतरों और उसके परमाणु कार्यक्रमों पर हमेशा के लिए रोक लगाई जाएगी।उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रतिबद्धता में इजरायल भी उनके साथ शामिल है।

ईरान की प्रतिक्रिया: यह ट्रंप का एक नया झूठ है अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के विपरीत, ईरान की सरकार और वहां की मीडिया ने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर ने सैन्य अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप का यह दावा “एक नया झूठ” है और ईरान ने हमलों को रोकने की कोई भी भीख नहीं मांगी है। ईरान ने कहा कि ट्रंप की धमकियां खोखली थीं और अपनी सेना के पीछे हटने को वे एक समझौते का नाम दे रहे हैं। ईरान की फार्स न्यूज ने साफ किया कि जब तक अमेरिका का आक्रामक रवैया जारी रहेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण और नाकाबंदी बरकरार रहेगी।

सऊदी अरब का दबाव और कूटनीतिरिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले को टालने के पीछे सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की बड़ी भूमिका रही है। हमलों की खबर मिलने के बाद शनिवार को प्रिंस सलमान ने ट्रंप को फोन किया था। उन्होंने ट्रंप को चेतावनी दी कि ईरान पर इस तरह के बड़े हमलों से पूरा मध्य-पूर्व एक भीषण युद्ध की चपेट में आ जाएगा, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई ठप हो जाएगी और खाड़ी देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सऊदी अरब ने ट्रंप से सैन्य रास्ता छोड़ कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने का आग्रह किया।

विवाद की जड़: होर्मुज जलडमरूमध्य का संकटफरवरी 2026 से जारी इस युद्ध के बीच जून में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था, लेकिन जुलाई में वह समझौता टूट गया। विवाद मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है।

ईरान का रुख: ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को उससे अनुमति लेनी होगी और ट्रांजिट फीस देनी होगी।

अमेरिका का रुख: अमेरिका और उसके सहयोगी इस क्षेत्र में ईरान के पूर्ण नियंत्रण को मानने से इनकार करते हैं और जहाजों की मुफ्त आवाजाही चाहते हैं।

वर्तमान स्थितिफिलहाल रविवार को दोनों पक्षों की ओर से किसी भी नए हमले की खबर नहीं है, जिससे क्षेत्र में थोड़ी शांति है। हालांकि, तनाव के मद्देनजर अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मध्य-पूर्व में रह रहे अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है और उन्हें सुरक्षा कारणों से तुरंत वहां से निकलने या आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है।

Savdhaan Nation News….

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