सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 3 जून 2026
ट्विशा शर्मा केस: CBI ने 80 किलो की डमी से किया सीन रीक्रिएशन, पूर्व जज गिरिबाला सिंह से हुई पूछताछ
भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में घटना स्थल पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम का सीन रीक्रिएशन (Crime Scene Recreation) किया। इस दौरान जांच एजेंसी ने लगभग 80 किलोग्राम वजनी डमी का इस्तेमाल कर यह परखने की कोशिश की कि आरोपियों द्वारा बताई गई घटनाओं की कहानी वास्तविक परिस्थितियों से मेल खाती है या नहीं।
जांच के तहत CBI टीम पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के भोपाल स्थित आवास पहुंची, जहां 12 मई को ट्विशा शर्मा मृत अवस्था में मिली थीं। अधिकारियों ने घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों को दोबारा तैयार कर यह समझने का प्रयास किया कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था।
CBI ने एक विशेष डमी तैयार करवाई, जिसका वजन लगभग 80 किलोग्राम रखा गया। डमी में रेत और लोहे के वजन लगाए गए ताकि मानव शरीर के भार और संतुलन की वास्तविक स्थिति को दोहराया जा सके। एजेंसी ने आरोपियों के उस दावे की जांच की कि उन्होंने ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा था। इस प्रक्रिया में लगभग दो घंटे तक घटनाक्रम को दोहराया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने शव को नीचे उतारा था, जबकि गिरिबाला सिंह ने कथित तौर पर फंदे की गांठ खोली थी। CBI ने दोनों के बयानों की सत्यता को परखने के लिए उन्हीं परिस्थितियों में घटनाक्रम को दोहराया। साथ ही यह भी जांचा गया कि जिस बेल्ट या फंदे का इस्तेमाल होने की बात कही गई, वह कितना वजन सहन कर सकती थी।
जांच एजेंसी ने केवल डमी टेस्ट ही नहीं किया, बल्कि घटनास्थल की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और फोरेंसिक विश्लेषण भी कराया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ट्विशा की ऊंचाई को लेकर अलग-अलग दावों को देखते हुए अलग आकार की डमी का भी उपयोग किया गया ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों की तुलना की जा सके।
इस बीच, गिरिबाला सिंह से भी लंबी पूछताछ की गई। CBI यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले और बाद में घर के भीतर क्या-क्या हुआ था। जांच टीम विभिन्न बयानों, फोरेंसिक साक्ष्यों और घटनास्थल से जुटाए गए तथ्यों का मिलान कर रही है।
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद उनके परिवार ने दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के आरोप लगाए थे। मामले की गंभीरता और सार्वजनिक दबाव को देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई। हाल के सीन रीक्रिएशन को इस केस की जांच में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे एजेंसी को यह समझने में मदद मिल सकती है कि आरोपियों के बयान वास्तविक घटनाओं से कितने मेल खाते हैं।
फिलहाल CBI ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं की है। जांच जारी है और एजेंसी सभी वैज्ञानिक एवं फोरेंसिक पहलुओं की जांच कर रही है। ऐसे में सीन रीक्रिएशन से मिले निष्कर्ष आगे की कार्रवाई और संभावित आरोप-पत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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