Skip to main content

सावधान नेशन न्यूज़

अपने ही मंत्रालय की योजना से 99 लाख रुपये सब्सिडी लेने पर घिरे केंद्रीय मंत्री, जानिए पूरा विवाद और नियमों की सच्चाई

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 28 जून 2026

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी से जुड़ा एक मामला इन दिनों राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। विवाद तब शुरू हुआ जब यह सामने आया कि मंत्री ने अपने कृषि प्रोजेक्ट के लिए कृषि मंत्रालय से जुड़ी एक योजना के तहत करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त की।
विपक्ष ने इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बताते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि मंत्री पक्ष का कहना है कि उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए योजना का लाभ लिया है।


क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार राजस्थान में भागीरथ चौधरी के कृषि फार्म पर आधुनिक संरक्षित खेती (Protected Cultivation) के तहत पॉलीहाउस लगाकर खीरे की खेती का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 2 करोड़ रुपये के आसपास बताई गई।
इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) की योजना के तहत लगभग 99 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई।
NHB कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन काम करता है। यही वजह है कि मामला चर्चा में आया, क्योंकि लाभ लेने वाला व्यक्ति उसी मंत्रालय में मंत्री पद पर है।


विपक्ष ने क्यों उठाए सवाल?
विपक्षी दलों का कहना है कि सामान्य किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन, जांच और लंबी प्रक्रिया से गुजरते हैं। ऐसे में एक केंद्रीय मंत्री का अपने ही मंत्रालय से जुड़ी योजना में इतना बड़ा लाभ लेना नैतिक सवाल खड़े करता है।
विपक्ष की प्रमुख आपत्तियां:
क्या मंत्री पद पर रहते हुए ऐसी योजना का लाभ लेना उचित है?
क्या इससे आम किसानों के बीच गलत संदेश नहीं जाता?
क्या इस मामले में पारदर्शिता के लिए स्वतंत्र जांच होनी चाहिए?
कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे सत्ता के प्रभाव और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़कर देखा है।


मंत्री की सफाई क्या है?
भागीरथ चौधरी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया।
उनका पक्ष है कि:
वे लंबे समय से किसान हैं।
योजना सभी पात्र किसानों के लिए खुली है।
उन्होंने सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन किया।
संबंधित अधिकारियों की जांच और मंजूरी के बाद ही सब्सिडी मिली।
मंत्री का कहना है कि यदि कोई किसान आधुनिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजना का पात्र है तो उसे इसका लाभ लेने का अधिकार है।


नियम क्या कहते हैं?
सरकारी योजनाओं में आमतौर पर सब्सिडी पाने के लिए कुछ पात्रता तय होती है, जैसे:
जमीन और परियोजना की पात्रता,
निर्धारित तकनीकी मानक,
विभागीय जांच,
दस्तावेजों की पुष्टि,
स्वीकृति प्रक्रिया।


यदि कोई व्यक्ति इन शर्तों को पूरा करता है तो नियमों के अनुसार वह योजना का लाभ ले सकता है।
हालांकि, हितों के टकराव का सवाल केवल कानूनी नहीं बल्कि नैतिक भी होता है। जब कोई व्यक्ति उस मंत्रालय का हिस्सा हो जो योजना को नियंत्रित करता है, तो पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।


जनता और राजनीतिक हलकों में क्या चर्चा है?
इस मामले पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आ रही है।
कुछ लोगों का कहना है कि अगर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है तो केवल मंत्री होने के कारण उन्हें किसान योजनाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।
वहीं दूसरी ओर कई लोग मानते हैं कि बड़े पद पर बैठे लोगों को ऐसी योजनाओं से लाभ लेते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के पक्षपात की आशंका न बने।


निष्कर्ष
भागीरथ चौधरी सब्सिडी विवाद में अभी मुख्य मुद्दा यह है कि क्या लाभ लेना नियमों के अनुसार था और क्या प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही।
मंत्री पक्ष इसे नियमों के तहत मिला किसान लाभ बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे नैतिकता और हितों के टकराव का मामला मानकर सवाल उठा रहा है।
आखिरकार इस तरह के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है — पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और जनता का भरोसा।

सावधान नेशन न्यूज़…

6 thoughts on “अपने ही मंत्रालय की योजना से 99 लाख रुपये सब्सिडी लेने पर घिरे केंद्रीय मंत्री, जानिए पूरा विवाद और नियमों की सच्चाई”

  1. I’ve been looking for a reliable way to access my account and this site is super smooth. Everything loads fast and the login process is effortless. Highly recommend pk68viplogin for anyone who wants a hassle-free experience.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *