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सावधान नेशन न्यूज़

UP के 4 हिस्सों में बंटने की चर्चा फिर तेज, ओम प्रकाश राजभर के दावे में कितनी सच्चाई? जानिए पूरा मामला

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में दावा किया कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश का चार हिस्सों में बंटवारा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जातीय जनगणना के बाद इस दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है।

राजभर ने 20 सितंबर को देवरिया में आयोजित एक रैली में कहा कि उत्तर प्रदेश को भविष्य में पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश/हरित प्रदेश और अवध प्रदेश जैसे हिस्सों में बांटा जा सकता है। उन्होंने अलग पूर्वांचल राज्य बनने की स्थिति में अपने बेटे के मुख्यमंत्री बनने का भी दावा किया।

क्या प्रधानमंत्री से इस बारे में बात हुई है?
राजभर ने दावा किया है कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय पर बातचीत हुई है और जातीय जनगणना के बाद राज्य के पुनर्गठन पर बात आगे बढ़ सकती है। लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से इस कथित बातचीत या उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की किसी सहमति की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल राजभर का राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए।

क्या सच में UP चार राज्यों में बंटने वाला है?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा।
अभी तक केंद्र सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। न ही ऐसा कोई नया पुनर्गठन कानून संसद से पारित हुआ है। इसलिए यह कहना कि “UP जल्द ही चार राज्यों में बंट रहा है”, मौजूदा जानकारी के आधार पर तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

फिर यह बात आई कहां से?
उत्तर प्रदेश के विभाजन की मांग नई नहीं है। नवंबर 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने विधानसभा में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों—पूर्वांचल, बुंदेलखंड, अवध प्रदेश और पश्चिम प्रदेश—में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया, लेकिन आगे इसे लागू नहीं किया गया।

यानी चार हिस्सों में बांटने का विचार पहले भी आधिकारिक राजनीतिक प्रस्ताव के रूप में सामने आ चुका है, लेकिन 2011 के प्रस्ताव और आज के राजभर के बयान में एक महत्वपूर्ण अंतर है—आज फिलहाल कोई नया सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है।


क्या कानूनी तौर पर UP को बांटा जा सकता है?
हाँ। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को किसी मौजूदा राज्य से अलग नया राज्य बनाने या उसकी सीमाएं बदलने की शक्ति देता है। ऐसी प्रक्रिया में राष्ट्रपति की सिफारिश और संबंधित राज्य विधानसभा से राय लेने की संवैधानिक प्रक्रिया शामिल होती है। हालांकि विधानसभा की राय संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होती।

निष्कर्ष
इस समय स्थिति को तीन बातों में समझिए:
✔️ UP को चार हिस्सों में बांटने की मांग पुरानी है।
✔️ ओम प्रकाश राजभर ने हाल में फिर दावा किया है कि ऐसा भविष्य में होगा।
❌ लेकिन अभी UP के चार राज्यों में बंटने की कोई आधिकारिक घोषणा या संसद से मंजूर कानून नहीं है।

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