सावधान नेशन न्यूज़

वाराणसी जिला कोर्ट में महिला ने खुद संभाली जिला जज की कुर्सी, ‘ऑर्डर-ऑर्डर’ बोलकर शुरू कर दी सुनवाई; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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वाराणसी, 13 जून 2026

वाराणसी में जिला जज की कुर्सी पर बैठी महिला, कोर्ट रूम में मचा हड़कंप
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद न्यायालय में शुक्रवार सुबह एक अजीब और हैरान करने वाली घटना सामने आई। जिला जज के अवकाश पर होने के दौरान एक महिला कोर्ट रूम में पहुंची और सीधे जिला जज की कुर्सी पर जाकर बैठ गई। इसके बाद उसने न सिर्फ हैमर उठाकर टेबल पर पटका बल्कि ‘ऑर्डर-ऑर्डर’ बोलते हुए खुद को जिला जज बताते हुए सुनवाई शुरू करने का दावा कर दिया।
यह घटना वाराणसी जिला कोर्ट परिसर में सुबह करीब 9 बजे हुई। जानकारी के अनुसार, शिवपुर क्षेत्र की रहने वाली करीब 50 वर्षीय वंदना गुप्ता कोर्ट रूम में पहुंचीं। उस समय जिला जज छुट्टी पर थे और कोर्ट रूम में नियमित सुनवाई नहीं चल रही थी। इसी दौरान महिला डायस तक पहुंच गई और जज की कुर्सी पर बैठ गई।


खुद को बताया जिला जज, फाइलें उठाकर करने लगीं सुनवाई
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार महिला ने कुर्सी पर बैठने के बाद हैमर उठाया और जोर से टेबल पर मारते हुए कहा— “ऑर्डर-ऑर्डर”।
इसके बाद उसने मौजूद वकीलों से कहा कि आज वह जिला जज है और सभी गवाह व सबूत पेश करें। महिला ने कोर्ट की फाइलें उठाईं और सुनवाई करने जैसी प्रक्रिया शुरू कर दी।
कोर्ट परिसर में मौजूद लोग पहले तो इस घटना को देखकर हैरान रह गए। कुछ वकीलों ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो महिला नाराज हो गई और विरोध करने लगी। वह कुर्सी से नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं थी।


पुलिस बुलाकर महिला को हटाया गया
मामला बढ़ता देख न्यायालय प्रशासन को सूचना दी गई। इसके बाद महिला पुलिस को बुलाया गया। काफी समझाने के बाद महिला को जिला जज की कुर्सी से हटाया गया और उसे कैंट थाने ले जाया गया।
घटना के बाद कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई। सवाल उठने लगे कि आखिर एक बाहरी व्यक्ति इतनी आसानी से कोर्ट रूम और जज की कुर्सी तक कैसे पहुंच गया।


पहले भी कर चुकी थी ऐसी हरकत
वकीलों के अनुसार, वंदना गुप्ता का कोर्ट में कोई लंबित मुकदमा नहीं है। कुछ लोगों ने बताया कि वह पहले भी कई बार न्यायालय परिसर में आ चुकी हैं और जज की कुर्सी पर बैठने की कोशिश कर चुकी हैं।
अगर यह जानकारी सही पाई जाती है तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दिखाता है, क्योंकि न्यायालय जैसे संवेदनशील स्थानों पर प्रवेश और गतिविधियों को लेकर कड़े नियम होते हैं।


सुरक्षा कर्मियों पर उठे सवाल
घटना के बाद अपर जिला जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई।
उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही सभी प्रवेश द्वारों पर निगरानी बढ़ाने और महिला को दोबारा बिना अनुमति कचहरी परिसर में प्रवेश न देने के निर्देश दिए गए।


लापरवाही की मुख्य वजह क्या रही?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि कोर्ट रूम तक पहुंचने वाली व्यवस्था में पर्याप्त निगरानी नहीं थी। जिला जज की अनुपस्थिति में भी कोर्ट रूम की सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण उतना प्रभावी नहीं रहा, जिसके कारण महिला डायस तक पहुंच गई।
हालांकि प्रशासन की ओर से घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा में किस स्तर पर चूक हुई और कौन जिम्मेदार था।


न्यायालय की गरिमा से जुड़ा मामला
न्यायालय केवल एक भवन नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। जज की कुर्सी और कोर्ट की प्रक्रिया की अपनी गरिमा होती है। किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना अधिकार न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना गंभीर विषय माना जाता है।


विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि न्यायालय की सुरक्षा और निष्पक्ष प्रक्रिया बनाए रखना जरूरी है।
इस घटना ने एक बार फिर न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

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