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ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन: भारत के उपराष्ट्रपति की पहली श्रीलंका यात्रा ने संबंधों के नए युग की शुरुआत की

सावधान नेशन न्यूज़ कोलंबो

नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 19-20 अप्रैल 2026 को अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक आधिकारिक यात्रा पर श्रीलंका पहुँचे। यह किसी भी भारतीय उपराष्ट्रपति का श्रीलंका का पहला द्विपक्षीय दौरा है, जो दोनों देशों के बीच सदियों पुराने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प को दर्शाता है। कोलंबो के भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत भव्य पारंपरिक कंडियन नृत्य प्रदर्शन के साथ किया गया।

राजनयिक वार्ता और साझा दृष्टिकोण
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोलंबो के राष्ट्रपति सचिवालय में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच साझा इतिहास, अटूट सभ्यता और जन-केंद्रित संबंधों को और गहरा करने पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने प्रधान मंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा, और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को लेकर कई समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और विजन ‘सागर’ (MAHASAGAR) के तहत, यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के साझा लक्ष्यों को रेखांकित करती है।

तूफान ‘दित्वाह’ राहत और विकास सहायता
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण चर्चा श्रीलंका में हाल ही में आए तूफान ‘दित्वाह’ से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास पर केंद्रित थी। भारत ने प्रभावित इलाकों, विशेष रूप से भारतीय मूल के तमिल समुदाय के क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों के लिए 450 मिलियन डॉलर के सहायता पैकेज के तहत लागू किए जा रहे प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की। यह सहायता श्रीलंका की कठिन परिस्थितियों में भारत की ‘बड़े भाई’ जैसी भूमिका और तत्काल मदद की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट: एक बड़ी उपलब्धि
उपराष्ट्रपति की यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण ‘इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट’ के तीसरे चरण का समापन रहा। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से आवासों की अंतिम खेप लाभार्थियों को सौंपी।
तीसरा चरण: इसके तहत केंद्रीय और उवा प्रांतों के बागान श्रमिकों के लिए 4,000 घरों का निर्माण किया गया है।
चौथा चरण: साथ ही, 10,000 अतिरिक्त घरों के चौथे चरण का कार्य भी प्रगति पर है, जिसकी घोषणा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
यह परियोजना श्रीलंका में भारत की सबसे बड़ी अनुदान सहायता योजनाओं में से एक है, जो अब तक लगभग 50,000 परिवारों को छत प्रदान कर चुकी है।

तमिल समुदाय के लिए बड़े ऐलान
भारतीय मूल के तमिल समुदाय के साथ बातचीत करते हुए उपराष्ट्रपति ने कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

OCI कार्ड विस्तार: अब श्रीलंका में भारतीय मूल के तमिलों की छठी पीढ़ी तक के लोग ‘ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड के लिए पात्र होंगे।
छात्रवृत्ति: ‘सीलोन एस्टेट वर्कर्स एजुकेशन ट्रस्ट’ (CEWET) के तहत छात्रवृत्तियों की संख्या और राशि में भारी वृद्धि की गई है, ताकि बागान क्षेत्रों के युवाओं को बेहतर शिक्षा मिल सके।

मानवीय दृष्टिकोण और मछुआरों का मुद्दा
दशकों पुराने मछुआरों के विवाद पर भी गहन चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) में मछली पकड़ने वाले समुदायों की आजीविका को देखते हुए इस मुद्दे को पूरी तरह से मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए। अनजाने में सीमा पार करने वाले मछुआरों की गिरफ्तारी को कम करने और उनके पुनर्वास के लिए आपसी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
अपनी यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति ने कोलंबो के ऐतिहासिक और न्यू काथिरेसन मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्रीलंका की बहुसांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए साझा आध्यात्मिक बंधनों को याद किया।


उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की यह यात्रा केवल औपचारिक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच विश्वास और सहयोग की एक नई इबारत है। आवास, आपदा राहत और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में भारत की निरंतर मदद यह सिद्ध करती है कि श्रीलंका के विकास में भारत एक स्थायी और भरोसेमंद भागीदार है।

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