सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 10 जून 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद Sushmita Dev ने पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक चुनौतियों और राजनीतिक दबावों का सामना कर रही है।
सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि वह “दो नावों में सवार नहीं रहना चाहतीं”। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया कि वह अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट और स्वतंत्र निर्णय लेना चाहती हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
कौन हैं सुष्मिता देव?
सुष्मिता देव पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता Santosh Mohan Dev की पुत्री हैं। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहीं। वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। बाद में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया और राज्यसभा भेजा।
टीएमसी के लिए क्यों बड़ा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुष्मिता देव का इस्तीफा केवल एक सांसद का इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह पार्टी के भीतर चल रही असंतोष की भावना को भी दर्शाता है। खास बात यह है कि उनके इस्तीफे से कुछ दिन पहले ही वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sukhendu Sekhar Roy ने भी पार्टी छोड़ दी थी। एक सप्ताह के भीतर दो राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे पार्टी संगठन की आंतरिक चुनौतियों की ओर इशारा कर रहे हैं। इससे विपक्ष को भी टीएमसी पर हमला करने का अवसर मिल सकता है।
भाजपा में शामिल होने की अटकलें
इस्तीफा देने के तुरंत बाद सुष्मिता देव की मुलाकात Himanta Biswa Sarma से हुई। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई कि वह जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकती हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
बंगाल की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि सुष्मिता देव का जाना केवल संसद में टीएमसी की संख्या को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की छवि पर भी असर डाल सकता है। वह पार्टी का प्रमुख चेहरा मानी जाती थीं और राष्ट्रीय मीडिया में टीएमसी का पक्ष मजबूती से रखती थीं। उनके बाहर जाने से पार्टी को नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।
इसके अलावा, राज्यसभा की रिक्त हुई सीटों पर होने वाले उपचुनाव भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। राजनीतिक समीकरणों के आधार पर इन सीटों के परिणाम आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुष्मिता देव का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा। क्या वह भाजपा में शामिल होंगी, किसी अन्य राजनीतिक मंच का चयन करेंगी या कुछ समय तक स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका निभाएंगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।
हालांकि इतना तय है कि उनके इस्तीफे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। टीएमसी के लिए यह आत्ममंथन का समय है, जबकि विपक्ष इस घटनाक्रम को अपने राजनीतिक लाभ में बदलने की कोशिश करेगा। आने वाले सप्ताह बंगाल की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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