दिल्ली! जोधपुर! लेह
तरुण कश्यप
लद्दाख के प्रमुख सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे जोधपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। गृह मंत्रालय (MHA) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उनके खिलाफ लगाए गए नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) को रद्द कर दिया है।
रिहाई की मुख्य बातें:
- NSA हटा: गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि लद्दाख में “शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास” का माहौल बनाने के लिए वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द की गई है।
- 170 दिनों की हिरासत: वांगचुक को 24 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था और 26 सितंबर को उन्हें जोधपुर जेल भेज दिया गया था। उन पर लद्दाख में हिंसा भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा होने के आरोप थे।
- सुप्रीम कोर्ट का दबाव: यह रिहाई ऐसे समय में हुई है जब 17 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट में उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई होनी थी। पिछली सुनवाई में अदालत ने सरकार से उनकी हिरासत की परिस्थितियों पर कड़े सवाल पूछे थे।
- लद्दाख की मांगें: वांगचुक लद्दाख को छठी अनुसूची (6th Schedule) में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे।
सरकार का रुख:
गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम वांगचुक अपनी अधिकतम संभावित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पहले ही पूरा कर चुके थे। सरकार ने कहा कि वे लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को संबोधित करने के लिए सभी हितधारकों के साथ “सार्थक संवाद” के लिए प्रतिबद्ध हैं।
क्या बोले नेता?
सोनम वांगचुक की रिहाई का लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने स्वागत किया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए बिना मुकदमे के हिरासत की अवधि को लेकर कड़े नियम बनाने की अपील की है।
सोनम वांगचुक वही शख्स हैं जिनसे प्रेरित होकर ‘3 ईडियट्स’ फिल्म का ‘फुनसुक वांगडू’ किरदार बना था। उन्हें 2018 में रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे लद्दाख में बर्फ के स्तूप (Ice Stupas) बनाकर पानी की समस्या सुलझाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं।
विवाद की शुरुआत: लद्दाख की मांगें
सोनम वांगचुक पिछले कई वर्षों से लद्दाख के लिए 4 मुख्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं:
- छठी अनुसूची (6th Schedule): लद्दाख की जनजातीय पहचान और जमीन को संवैधानिक सुरक्षा देना।
- पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश से बदलकर एक पूर्ण राज्य बनाना।
- लोकसभा सीटें: लद्दाख के लिए संसद में प्रतिनिधित्व बढ़ाना (कम से कम 2 सीटें)।
- नौकरी और पर्यावरण सुरक्षा: स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और हिमालय के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा।
जेल जाने की असली वजह (घटनाक्रम)
- सितंबर 2025 की हिंसा: सितंबर 2025 में लेह में इन मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया था। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में 4 लोगों की मौत हो गई थी।
- भड़काऊ भाषण का आरोप: सरकार ने आरोप लगाया कि वांगचुक ने अपने भाषणों और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए युवाओं को हिंसा के लिए उकसाया। उन पर “अरब स्प्रिंग” (Arab Spring) जैसी क्रांति लाने और आत्मदाह (self-immolation) के लिए उकसाने के भी आरोप लगे।
- NSA और गिरफ्तारी: इन्ही आरोपों के आधार पर 26 सितंबर 2025 को उन्हें हिरासत में लिया गया और उन पर कड़ा कानून NSA (National Security Act) लगा दिया गया। उन्हें लद्दाख से दूर राजस्थान की जोधपुर जेल भेज दिया गया।
रिहाई कैसे हुई?
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने उनकी हिरासत को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से कई तीखे सवाल पूछे, जिसमें वांगचुक के भाषणों के अनुवाद में गलतियों की बात भी सामने आई। 17 मार्च 2026 को होने वाली अंतिम सुनवाई से ठीक पहले, सरकार ने लद्दाख में शांति और संवाद का माहौल बनाने के लिए उन्हें रिहा करने का फैसला किया।
निष्कर्ष:
रिहाई के बाद गृह मंत्रालय ने कहा है कि वे लद्दाख के मुद्दों को हल करने के लिए “सार्थक संवाद” (Meaningful Dialogue) के लिए प्रतिबद्ध हैं। फिलहाल लद्दाख में शांति बनाए रखने के लिए यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
“लद्दाख की बर्फ से लेकर जोधपुर की जेल तक, सोनम वांगचुक की ये रिहाई सियासत और संघर्ष की एक नई इबारत लिख रही है। अब देखना यह होगा कि क्या इस रिहाई के बाद लद्दाख की मांगों पर जमी बर्फ पिघलेगी? देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए आप देखते रहिए सावधान नेशन न्यूज।