नई दिल्ली ! गुवाहाटी
तरुण कश्यप
असम की 126 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को होने वाले मतदान के लिए सियासी पारा चरम पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी जहाँ ‘विकास और हिंदुत्व’ के दम पर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस गौरव गोगोई की अगुवाई में ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-incumbency) और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर मैदान में है।
मुख्य टकराव के बिंदु:
- गठबंधन और दलबदल: चुनाव से ठीक पहले असम कांग्रेस में बड़ी टूट देखने को मिली है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा सहित कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री सरमा ने इसे कांग्रेस की ‘हिंदू नेताओं की अनदेखी’ करार दिया है, जबकि कांग्रेस इसे बीजेपी की ‘वॉशिंग मशीन’ राजनीति बता रही है।
- घुसपैठ और जनसांख्यिकी: बीजेपी ने ‘अवैध घुसपैठ’ को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है। पार्टी का लक्ष्य उन 103 सीटों पर जीत दर्ज करना है जहाँ हिंदू असमिया मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। वहीं, कांग्रेस अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण को रोकने और चाय बागान समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है।
- एक चरण में मतदान पर विवाद: चुनाव आयोग द्वारा असम में सिर्फ एक चरण में मतदान कराने के फैसले का बीजेपी ने स्वागत किया है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इसे सत्ताधारी दल को फायदा पहुँचाने वाला कदम बताते हुए सवाल उठाए हैं।
- विकास बनाम भ्रष्टाचार: बीजेपी अपनी ‘असम आयुष्मान’ और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है। इसके विपरीत, गौरव गोगोई ने सरकार पर ‘सत्ता के अहंकार’ और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इसे असम की जनता बनाम बीजेपी की लड़ाई बताया है।
चुनावी कार्यक्रम एक नज़र में:कार्यक्रमतिथिमतदान (एक चरण)9 अप्रैल 2026मतगणना और परिणाम4 मई 2026नामांकन की अंतिम तिथि23 मार्च 2026
असम में बीजेपी अपने सहयोगियों असम गण परिषद (AGP) और UPPL के साथ चुनावी मैदान में है, जबकि कांग्रेस ने असम जातीय परिषद और वामदलों के साथ गठबंधन किया है। अब देखना यह है कि जनता हिमंत बिस्वा सरमा के ‘100+ पार’ के लक्ष्य को पूरा करती है या गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस की वापसी होती है।
गौरव गोगोई की स्थिति और चुनौतियां
- जोरहाट से दावेदारी: गौरव गोगोई के अपनी पारिवारिक विरासत वाली सीट जोरहाट से विधानसभा चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है।
- विरोधियों के दावे: असम के डिप्टी स्पीकर नुमल मोमिन ने दावा किया है कि गौरव गोगोई जोरहाट से “बुरी तरह हारेंगे”।
- पंचायत चुनावों का झटका: मई 2025 में हुए पंचायत चुनावों में कांग्रेस को जोरहाट लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली सभी जिला परिषद सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था, जिसे बीजेपी ने गोगोई के गढ़ में सेंधमारी के रूप में पेश किया है।
- नेतृत्व का परीक्षण: तरुण गोगोई के निधन के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है जहाँ गौरव गोगोई पार्टी के मुख्य चेहरे और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व कर रहे हैं।
कांग्रेस के लिए ‘अस्तित्व’ का संकट क्यों कहा जा रहा है?
- बड़े नेताओं का दलबदल: चुनाव से ठीक पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा जैसे दिग्गज नेताओं के बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं और अन्य विधायकों के टूटने से संगठन कमजोर हुआ है।
- गठबंधन में दरार: विपक्षी एकता के प्रयासों को तब झटका लगा जब अखिल गोगोई की पार्टी ‘राइजर दल’ गठबंधन से अलग हो गई, जिससे बीजेपी विरोधी वोटों के बंटने का खतरा बढ़ गया है।
- बीजेपी का दबदबा: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी ने 100+ सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। ओपिनियन पोल के अनुसार, NDA गठबंधन को 90 के करीब सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस को 25-29 सीटों पर सिमटना पड़ सकता है।
कांग्रेस की जवाबी रणनीति
- गारंटी और घोषणापत्र: कांग्रेस ने ‘नया असम’ बनाने का वादा किया है और मुख्यमंत्री सरमा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए आक्रामक अभियान शुरू किया है।
- टिकटों का बंटवारा: कांग्रेस अब तक 65 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है और अपने सहयोगियों (वामदल और अन्य क्षेत्रीय दल) के लिए 15 सीटें छोड़ी हैं।
निष्कर्ष: फिलहाल यह कहना कि “कांग्रेस खत्म हो गई है” समय से पहले होगा, क्योंकि गौरव गोगोई ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जोरहाट सीट जीतकर अपनी ताकत दिखाई थी। असली तस्वीर 4 मई 2026 को चुनाव नतीजों के बाद ही साफ होगी।
“क्या गौरव गोगोई बचा पाएंगे अपना गढ़ या असम में चलेगा सिर्फ भगवा? चुनाव से जुड़ी हर खबर और सटीक विश्लेषण सिर्फ यहीं। देखते रहिए सावधान नेशन न्यूज़, क्योंकि हमारी नज़र है आप पर।”