गुवाहाटी ! दिल्ली
तरुण कश्यप
असम की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और नागांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई (Pradyut Bordoloi) ने बुधवार (18 मार्च 2026) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। चुनाव की तारीखों के बेहद करीब आते ही इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की चुनावी तैयारियों को बड़ा आघात पहुँचाया है।
मुख्य समाचार :
- भाजपा में आधिकारिक एंट्री: प्रद्युत बोरदोलोई नई दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में भाजपा परिवार का हिस्सा बने।
- इस्तीफे का कारण: बोरदोलोई ने कांग्रेस नेतृत्व पर “अपमान” और “अनदेखी” का आरोप लगाया। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने इस्तीफे में कहा कि वे पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित और अकेला महसूस कर रहे थे।
- बिखरती कांग्रेस: बोरदोलोई से पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। पिछले 3 महीनों में कांग्रेस के 5 बड़े दिग्गजों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है, जिससे पार्टी की नींव हिलती नजर आ रही है।
ग्राउंड रिपोर्ट और प्रभाव:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बोरदोलोई का जाना विशेष रूप से ऊपरी असम (Upper Assam) में कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ सकता है। मुख्यमंत्री सरमा ने संकेत दिए हैं कि भाजपा आलाकमान से उन्हें विधानसभा चुनाव लड़ाने की सिफारिश की जाएगी।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया:
कांग्रेस की असम स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष प्रियंका गांधी वाड्रा ने बोरदोलोई के इस्तीफे को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है। वहीं, चुनाव प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने कहा कि नेताओं के जाने से जमीनी कार्यकर्ताओं के जोश पर फर्क नहीं पड़ेगा और कांग्रेस नए चेहरों के साथ मजबूती से लड़ेगी।
असम चुनाव का शेड्यूल:
- कुल सीटें: 126
- मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026 (एक चरण में)
- नतीजे: 4 मई 2026
कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने 32 साल से अधिक समय तक कांग्रेस की सेवा करने के बाद आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। गुवाहाटी स्थित भाजपा मुख्यालय ‘वाजपेयी भवन’ में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उपस्थिति में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
मुख्य समाचार (Key Points):
- 33 साल का साथ टूटा: भूपेन बोरा 22 फरवरी 2026 को भाजपा में शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर अपमान और आंतरिक कलह का आरोप लगाते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
- इस्तीफे की वजह: बोरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस में अब “स्व-सम्मान” बचाना मुश्किल है और पार्टी में फैसलों के लिए कोई लोकतांत्रिक सोच नहीं बची है। उन्होंने विशेष रूप से सांसद रकीबुल हुसैन और गौरव गोगोई के साथ आंतरिक मतभेदों को अपने जाने की वजह बताया।
- भाजपा का स्वागत: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उनका स्वागत करते हुए इसे “घर वापसी” जैसा बताया और कहा कि बोरा का संगठनात्मक अनुभव भाजपा को और मजबूती प्रदान करेगा।
राजनीतिक असर:
भूपेन बोरा के साथ कांग्रेस के कई अन्य जिला स्तरीय नेता और करीब 500 कार्यकर्ता भी भाजपा में शामिल हुए हैं। चुनाव से ठीक पहले हुए इस बड़े दलबदल ने ऊपरी असम में कांग्रेस की स्थिति को काफी कमजोर कर दिया है।
असम विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन कुमार बोरा जैसे कद्दावर नेताओं का कांग्रेस छोड़ भाजपा में जाना पार्टी के लिए एक घातक प्रहार माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन इस्तीफों ने कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को निम्नलिखित कारणों से “कमर तोड़ने” जैसी स्थिति में ला दिया है:
1. संगठनात्मक ढांचे का बिखरना
- नेतृत्व का संकट: भूपेन कुमार बोरा न केवल एक वरिष्ठ नेता थे, बल्कि वे असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के अध्यक्ष भी रह चुके थे। चुनाव से ऐन पहले सेनापति का ही पाला बदल लेना पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को पूरी तरह गिरा देता है।
- अनुभवी चेहरों की कमी: प्रद्युत बोरदोलोई नागांव से मौजूदा सांसद और घोषणापत्र समिति के अध्यक्ष थे। तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले इन दोनों नेताओं के जाने से कांग्रेस के पास अब राज्य स्तर पर ऐसे चेहरों की भारी कमी हो गई है जो पूरे असम में पहचान रखते हों।
2. वैचारिक और रणनीतिक हार
- “अंतिम हिंदू चेहरा” नैरेटिव: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद यह बयान देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी कि बोरा कांग्रेस के “आखिरी प्रमुख हिंदू चेहरे” थे। इससे भाजपा को कांग्रेस को एक खास वर्ग की पार्टी के रूप में चित्रित करने का मौका मिल गया है।
- आंतरिक गुटबाजी उजागर: बोरदोलोई ने इस्तीफे के बाद “अपमान” और “अनदेखी” का आरोप लगाया, जिससे यह संदेश गया कि गौरव गोगोई के नेतृत्व में पुरानी पीढ़ी के नेताओं के लिए कोई जगह नहीं बची है।
3. चुनावी समीकरणों पर प्रभाव
- वोट बैंक में सेंध: इन नेताओं का अपना एक मजबूत जनाधार है। बोरदोलोई के भाजपा में आने से ऊपरी असम और नागांव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक सीधे भाजपा की ओर खिसक सकता है।
- दलबदल का सिलसिला: इन दो बड़े नामों के जाने के बाद जिला स्तर के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और छोटे नेताओं ने भी भाजपा का दामन थामा है। यह भगदड़ चुनाव के दौरान कांग्रेस की जमीनी पकड़ (बूथ मैनेजमेंट) को कमजोर कर देगी।
संक्षेप में, चुनाव से कुछ हफ्ते पहले हुए इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है, जबकि भाजपा इसे अपनी जीत का मार्ग प्रशस्त करने वाले “मास्टरस्ट्रोक” के रूप में देख रही है।
“तो क्या असम में कांग्रेस सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगी? प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा के जाने के बाद अब कांग्रेस के पास खोने को क्या बचा है? चुनावी बिसात बिछ चुकी है और चालें चली जा चुकी हैं। राजनीति की हर नब्ज टटोलने के लिए आप देखते रहिए सावधान नेशन न्यूज़। सतर्क रहें, सजग रहें।”