नई दिल्ली/आइजोल
तरुण कश्यप
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। एजेंसी ने म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों (EAGs) और पूर्वोत्तर भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को सैन्य प्रशिक्षण देने के आरोप में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है।
मुख्य बिंदु:
- गिरफ्तारी: NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरोन वैन डाइक (Matthew Aaron VanDyke) को कोलकाता एयरपोर्ट से और छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ से हिरासत में लिया।
- प्रशिक्षण का स्वरूप: आरोप है कि ये पूर्व सैनिक म्यांमार के विद्रोही समूहों को ड्रोन वारफेयर (Drone Warfare), हथियारों के संचालन और सामरिक रणनीति का प्रशिक्षण दे रहे थे।
- घुसपैठ का रास्ता: ये विदेशी नागरिक पर्यटक वीजा पर भारत आए थे, लेकिन बिना अनुमति के मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में दाखिल हुए और वहां से अवैध रूप से म्यांमार सीमा पार की।
- ड्रोन की तस्करी: जांच में सामने आया है कि इस समूह ने यूरोप से भारी मात्रा में ड्रोन की खेप मंगवाई और भारतीय क्षेत्र का उपयोग कर उन्हें म्यांमार पहुंचाया।
पूर्वोत्तर भारत के लिए खतरा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, म्यांमार के ये विद्रोही गुट भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों की मदद कर रहे हैं। इन विदेशी प्रशिक्षकों द्वारा दी जा रही आधुनिक युद्ध तकनीक, विशेष रूप से ड्रोन तकनीक, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
कौन है मैथ्यू वैन डाइक?
गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नामक एक निजी सुरक्षा फर्म का संस्थापक है। वह पहले लीबिया और सीरिया जैसे संघर्ष क्षेत्रों में भी सक्रिय रहा है।
वर्तमान स्थिति: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने सभी सातों आरोपियों को 27 मार्च 2026 तक 11 दिनों की NIA हिरासत में भेज दिया है। एजेंसी अब उनके फंडिंग स्रोतों और स्थानीय संपर्कों की गहन जांच कर रही है।
यह गिरफ्तारी भारत की आंतरिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है। एनआईए (NIA) की जांच के अनुसार, इन पूर्व विदेशी सैनिकों द्वारा दिया जा रहा प्रशिक्षण और सहायता अत्यंत घातक थी, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. आधुनिक ‘ड्रोन वारफेयर’ (Drone Warfare)
इन प्रशिक्षकों में यूक्रेन के विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध का जमीनी अनुभव है। वे म्यांमार के उग्रवादियों को फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन्स को हथियारों से लैस करना और उनका उपयोग ‘कामिकेज़’ (आत्मघाती) हमलों के लिए करना सिखा रहे थे। यह तकनीक घने जंगलों वाले पूर्वोत्तर भारत और म्यांमार सीमा पर सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती थी।
2. अत्याधुनिक हथियारों का संचालन
गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैन डाइक और उसकी टीम पूर्व सैनिकों की है। वे उग्रवादियों को केवल बंदूक चलाना नहीं, बल्कि IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने, स्नाइपर ऑपरेशंस और नाटो-ग्रेड (NATO-standard) के हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रहे थे।
3. रसद और संचार (Logistics & Communication)
जांच में सामने आया है कि यह समूह केवल ट्रेनिंग नहीं दे रहा था, बल्कि यूरोप से उन्नत संचार उपकरण और सैन्य ग्रेड के ड्रोन की तस्करी भी कर रहा था। भारतीय क्षेत्र (मिजोरम और मणिपुर सीमा) का उपयोग इन हथियारों को म्यांमार भेजने के लिए किया जा रहा था।
4. भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर प्रभाव
म्यांमार के जिन जातीय सशस्त्र समूहों (EAGs) को ये प्रशिक्षण दे रहे थे, उनके संबंध भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों (जैसे कि मणिपुर और नागालैंड के कुछ गुट) से हैं। यदि ये उग्रवादी आधुनिक तकनीक सीख जाते, तो वे भारतीय सुरक्षा बलों पर सटीक और घातक हमले करने में सक्षम हो जाते।
5. अंतरराष्ट्रीय ‘प्राइवेट आर्मी’ का नेटवर्क
यह पहली बार है जब भारत ने सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (SOLI) जैसे किसी निजी सैन्य समूह के सदस्यों को पकड़ा है। ये समूह युद्ध क्षेत्रों में ‘मर्सिनरी’ (भाड़े के सैनिक) के रूप में काम करते हैं। इनका भारत के पास सक्रिय होना एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का संकेत देता है।
निष्कर्ष:
NIA की इस कार्रवाई ने म्यांमार सीमा पर एक “आतंक की प्रयोगशाला” को पनपने से रोक दिया है। अगर यह प्रशिक्षण जारी रहता, तो पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद एक नए और डिजिटल घातक मोड में प्रवेश कर जाता।
“विदेशी ‘वार प्रोफेशनल्स’ की यह गिरफ्तारी पूर्वोत्तर की सुरक्षा के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगी। म्यांमार की सीमा पर पनप रहे इस डिजिटल आतंकवाद पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी। ताजा अपडेट्स के लिए जुड़े रहें सावधान नेशन न्यूज के साथ। क्योंकि आपकी सतर्कता ही देश की सुरक्षा है।”