सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
चैत नवरात्रि के शुभ अवसर के साथ ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत हो चुकी है और इसी पावन मौके पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का दौरा किया। उनका यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गहरे जुड़ाव का भी प्रतीक बना।
राष्ट्रपति मुर्मू बीते गुरुवार को सबसे पहले अयोध्या पहुंचीं। अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है, इन दिनों विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यहां राष्ट्रपति ने भव्य राम मंदिर में आयोजित श्रीराम यंत्र स्थापना पूजन में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं के बीच राष्ट्रपति का यह कार्यक्रम बेहद श्रद्धा और उत्साह के माहौल में संपन्न हुआ।
पूजा कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति ने अयोध्या में चल रहे विकास कार्यों की भी जानकारी ली। उन्होंने वहां के अधिकारियों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। अयोध्या में उनके आगमन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और पूरे शहर को हाई अलर्ट पर रखा गया था।
अयोध्या दौरे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू शाम के समय विशेष विमान से मथुरा पहुंचीं। मथुरा, जो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है, वहां उनके आगमन पर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद उनका कार्यक्रम वृंदावन के धार्मिक स्थलों का दौरा करना रहा।
शुक्रवार को राष्ट्रपति ने वृंदावन पहुंचकर प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। यह मुलाकात ‘राधा केली कुंज आश्रम’ में हुई, जहां राष्ट्रपति ने संत से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान दोनों के बीच आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा भी हुई। बताया जा रहा है कि बातचीत में भक्ति, सेवा और जीवन के मूल्यों पर विशेष जोर दिया गया।
मुलाकात के दौरान का दृश्य काफी भावुक और प्रेरणादायक रहा। राष्ट्रपति मुर्मू सादगीपूर्ण परिधान में नजर आईं और उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ संत के चरणों में बैठकर आशीर्वाद लिया। वहीं प्रेमानंद महाराज ने भी उन्हें आशीर्वचन दिए और देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है और लोग इसे काफी पसंद कर रहे हैं।
राष्ट्रपति के इस दौरे के दौरान उन्होंने वृंदावन के कई प्रमुख मंदिरों में भी दर्शन किए। इनमें इस्कॉन मंदिर और प्रेम मंदिर प्रमुख हैं, जहां उन्होंने भगवान राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना की। मंदिरों में उनके स्वागत के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला।
इस पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अयोध्या, मथुरा और वृंदावन में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बढ़ा दी गई थी। कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया, ताकि राष्ट्रपति का कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह दौरा केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और जुड़ाव का संदेश देता है। चैत नवरात्रि और हिंदू नववर्ष जैसे पावन अवसर पर इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का भाव भी उत्पन्न करते हैं।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर काफी उत्साह देखा गया। बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए सड़कों पर मौजूद रहे और उन्होंने राष्ट्रपति की एक झलक पाने की कोशिश की। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम किए थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह धार्मिक दौरा आध्यात्मिकता, संस्कृति और परंपरा का एक सुंदर संगम बनकर सामने आया है। अयोध्या से लेकर मथुरा-वृंदावन तक उनके कार्यक्रमों ने यह संदेश दिया कि आधुनिक भारत में भी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
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