सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली में मयूर विहार फेज-3 स्थित सलवान पब्लिक स्कूल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने अचानक फीस में बढ़ोतरी कर दी और इसकी पूर्व सूचना अभिभावकों को नहीं दी। इतना ही नहीं, फीस जमा न करने पर करीब 15 छात्रों को स्कूल परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया, जिसके बाद गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
बिना सूचना फीस बढ़ाने का आरोप
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल ने नए सत्र की शुरुआत से पहले फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी, लेकिन इसके बारे में न तो कोई आधिकारिक नोटिस दिया गया और न ही किसी तरह की बैठक बुलाई गई। अचानक बढ़ी फीस के कारण कई परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। अभिभावकों का आरोप है कि यह बढ़ोतरी नियमों के खिलाफ है और शिक्षा विभाग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करती है।
छात्रों को गेट पर रोका गया
मामला तब और बढ़ गया जब फीस न जमा करने वाले करीब 15 छात्रों को स्कूल गेट पर ही रोक दिया गया। बच्चों को अंदर जाने से मना कर दिया गया, जिससे वे काफी देर तक बाहर खड़े रहे। इस घटना ने अभिभावकों को आक्रोशित कर दिया। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई को इस तरह बाधित करना अमानवीय है और इससे छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।
अभिभावकों का प्रदर्शन
घटना के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल के बाहर इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और फीस वृद्धि को तुरंत वापस लेने की मांग की। कुछ अभिभावकों ने कहा कि वे इस मामले को लेकर दिल्ली शिक्षा निदेशालय में शिकायत दर्ज कराएंगे।
नियमों का उल्लंघन?
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली शिक्षा निदेशालय के नियमों के तहत कोई भी निजी स्कूल बिना उचित प्रक्रिया और सूचना के फीस नहीं बढ़ा सकता। इसके अलावा, फीस विवाद के चलते छात्रों को स्कूल में प्रवेश से रोकना भी नियमों के खिलाफ माना जाता है।
स्कूल प्रशासन की सफाई
इस पूरे मामले पर सलवान पब्लिक स्कूल प्रशासन की ओर से सफाई दी गई है। स्कूल का कहना है कि फीस में बढ़ोतरी बढ़ती लागत और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए की गई है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों को समय-समय पर सूचना दी गई थी, हालांकि कई अभिभावक इस दावे को गलत बता रहे हैं।
शिक्षा विभाग की भूमिका
अब इस मामले में दिल्ली शिक्षा निदेशालय की भूमिका अहम हो गई है। यदि अभिभावक औपचारिक शिकायत दर्ज करते हैं, तो विभाग जांच कर सकता है और स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। पहले भी ऐसे मामलों में शिक्षा विभाग ने स्कूलों को नोटिस जारी किए हैं और फीस वापस करने के निर्देश दिए हैं।
बढ़ते विवाद और अभिभावकों की चिंता
दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ाने को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। अभिभावकों का कहना है कि हर साल फीस में वृद्धि की जाती है, लेकिन सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नहीं होता। ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल मामला गरमाया हुआ है और अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक फीस बढ़ोतरी वापस नहीं ली जाती, उनका विरोध जारी रहेगा। वहीं, प्रशासन का कहना है कि वे नियमों के तहत ही काम कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है और अभिभावकों को राहत मिलती है या नहीं।
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