सासाराम/डेहरी-ऑन-सोन: रोहतास जिले समेत पूरे दक्षिण बिहार के आसमान पर इस वक्त संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 24 घंटों के लिए जिले में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और स्थानीय वायुमंडलीय बदलावों के कारण रोहतास में भारी वज्रपात (ठनका), तेज आंधी और मूसलाधार बारिश की प्रबल संभावना है।
प्रशासन ने इसे ‘कुदरत का कहर’ मानते हुए आम नागरिकों और विशेषकर किसानों को बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है।
कैसा रहेगा अगले 24 घंटों का हाल?
मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, रोहतास के विभिन्न प्रखंडों—सासाराम, डेहरी, नोखा, चेनारी और करहगर में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है।
भारी बारिश की चेतावनी: जिले के कुछ हिस्सों में 60mm से 110mm तक बारिश दर्ज की जा सकती है।
वज्रपात का खतरा: दक्षिण बिहार में इस समय ‘लाइटनिंग स्ट्राइक’ (ठनका) का सबसे ज्यादा खतरा है। खुले मैदानों और ऊंचे पेड़ों के नीचे रहना जानलेवा साबित हो सकता है।
तापमान में गिरावट: बारिश और ठंडी हवाओं के चलते अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे उमस भरी गर्मी से तो राहत मिलेगी, लेकिन तबाही का डर बना रहेगा।
किसानों की बढ़ी चिंता: ‘सोना’ उगलने वाली मिट्टी पर संकट
रोहतास को ‘बिहार का धान का कटोरा’ कहा जाता है। इस समय खेतों में खड़ी फसलें तैयार होने की कगार पर हैं या बुआई का महत्वपूर्ण चरण चल रहा है। ऐसे में यह मौसम किसानों के लिए किसी दोधारी तलवार से कम नहीं है।
“अगर तेज हवा के साथ ओलावृष्टि हुई, तो हमारी महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी। हम केवल प्रार्थना कर रहे हैं कि बारिश हो, पर तबाही न आए।”
रामवृक्ष यादव, स्थानीय किसान (करहगर प्रखंड)
कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसान कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ले जाएं और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। उर्वरकों का छिड़काव फिलहाल रोक देना ही समझदारी है।
प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा निर्देश
जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा है। जिलाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारियों (CO) और प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखें।
नागरिकों के लिए जरूरी गाइडलाइंस:
बिजली के खंभों से दूर रहें: तेज आंधी में पेड़ या बिजली के तार गिरने की संभावना अधिक होती है।
कच्चे मकानों में सावधानी: भारी बारिश के कारण पुराने और कच्चे मकानों की दीवारों के गिरने का खतरा रहता है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग: ठनका गिरने के दौरान घर के अंदर रहें और बिजली से चलने वाले उपकरणों को प्लग से हटा दें।
सफर से बचें: बहुत जरूरी न हो तो अगले 24 घंटों तक लंबी दूरी की यात्रा, खासकर दोपहिया वाहनों से, करने से बचें।
क्यों बदला अचानक मौसम का मिजाज?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार के दक्षिणी हिस्से में चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) सक्रिय है। इसके साथ ही नमी वाली हवाएं तेजी से मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रही हैं। रोहतास की भौगोलिक स्थिति, जहां एक ओर कैमूर की पहाड़ियां हैं और दूसरी ओर सोन नदी का मैदानी इलाका, यहां के मौसम को और भी अनिश्चित बना देती है। पहाड़ियों से टकराकर आने वाली हवाएं अक्सर यहां भीषण गर्जना के साथ बारिश लाती हैं।
निष्कर्ष: सावधानी ही बचाव है
प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन सही समय पर मिली सूचना और सावधानी से जान-माल के नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। रोहतास वासियों के लिए यह समय घर के भीतर सुरक्षित रहने और एक-दूसरे की मदद करने का है।
इमरजेंसी हेल्पडेस्क: किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन का ही अनुसरण करें।
ब्यूरो रिपोर्ट, रोहतास समाचार