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मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग: 5 दिन का राज्यव्यापी बंद, बच्चों की मौत से उबला जन-आक्रोश

इंफाल | 21 अप्रैल, 2026

मणिपुर में महीनों की शांति के बाद हालात एक बार फिर बेकाबू हो गए हैं। राष्ट्रपति शासन हटने और नई सरकार के गठन के बाद उम्मीद थी कि राज्य विकास की राह पर लौटेगा, लेकिन पिछले दो महीनों में हुई सिलसिलेवार हिंसा, मासूमों की हत्या और समुदायों के बीच बढ़ते अविश्वास ने शांति की कोशिशों पर पानी फेर दिया है।

मासूमों की हत्या से दहला मणिपुर
7 अप्रैल 2026 को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी अवांग लेइकाई गांव में हुए एक रॉकेट हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में 5 साल के एक बच्चे और उसकी 6 महीने की बहन की जान चली गई। इस घटना ने जलते हुए मणिपुर में ‘घी’ का काम किया है। इसी आक्रोश के चलते महिला संगठनों और नागरिक समाज समूहों ने 19 अप्रैल से 5 दिन के राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है।

त्रिकोणीय संघर्ष का नया मोर्चा
अब तक मणिपुर की हिंसा मुख्य रूप से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच सीमित थी, लेकिन अब इसमें एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है। अब कुकी-जो और नागा समुदाय के बीच भी हिंसक झड़पें शुरू हो गई हैं।
उखरुल में तनाव: उखरुल जिले में तांगखुल नागा और कुकी समूहों के बीच लगातार गोलीबारी और आगजनी की खबरें आ रही हैं।
बंधक संकट:11 मार्च को एक कुकी समूह द्वारा 18 नागा नागरिकों (महिलाओं और बच्चों सहित) को बंधक बनाए जाने से नागा समुदाय में भारी रोष है।
BSF और पूर्व सैनिक का बलिदान:10 अप्रैल को उग्रवादियों की गोलीबारी में एक BSF जवान शहीद हो गए, जबकि 18 अप्रैल को नेशनल हाईवे 202 intercept पर घात लगाकर किए गए हमले में एक रिटायर्ड सैनिक सहित दो नागा नागरिकों की हत्या कर दी गई।

सत्ता का समीकरण बना विवाद की जड़?
4 फरवरी 2026 को युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने समावेशी राजनीति की कोशिश की थी। सरकार में मेइती मुख्यमंत्री के साथ-साथ कुकी समुदाय की नेमचा किपगेन और नागा समुदाय के लोसी डिखो को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
विडंबना यह है कि शांति के लिए किया गया यह राजनीतिक प्रयोग ही विरोध का कारण बन गया। कुकी-बहुल इलाकों में खुद अपनी ही नेता (नेमचा किपगेन) की नियुक्ति के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए।

BJP से बढ़ी दूरियां
मेइती समुदाय के प्रभावशाली संगठन COCOMI ने 19 अप्रैल को एक कड़ा रुख अपनाते हुए जनता से अपील की है कि वे भाजपा या उसके किसी भी नेता के कार्यक्रमों में शामिल न हों। राजनीतिक विश्लेषक इसे मेइती समुदाय के पारंपरिक वोट बैंक का भाजपा से छिटकने का संकेत मान रहे हैं।
प्रमुख घटनाओं का घटनाक्रम

4 फरवरी 2026  राष्ट्रपति शासन समाप्त, युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। |
5 फरवरी 2026 चुराचांदपुर में उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन की नियुक्ति के विरोध में हिंसा। |
11 मार्च 2026 कुकी समूह द्वारा 18 नागा नागरिकों को बंधक बनाया गया।
7 अप्रैल 2026 बिष्णुपुर में रॉकेट हमला; दो मासूम बच्चों की मौत।
अप्रैल 2026 NH-202 पर हमला, पूर्व सैनिक सहित दो की हत्या।
19 अप्रैल 2026 no 5 दिवसीय राज्यव्यापी बंद की शुरुआत।

निष्कर्ष: समाधान की राह अब भी दूर
मुख्यमंत्री और कैबिनेट की तमाम शांति बैठकों के बावजूद जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। जब तक विस्थापितों की घर वापसी, उग्रवादियों का निशस्त्रीकरण और समुदायों के बीच ‘विश्वास की बहाली’ नहीं होती, तब तक मणिपुर की वादियों में बारूद की गंध कम होना मुश्किल नजर आ रहा है। फिलहाल, 5 दिन के बंद ने राज्य की रफ्तार को पूरी तरह रोक दिया है।

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