सावधान नेशन न्यूज़

Satark Rahe, Sach Jaane

बंगाल चुनाव के लिए बिछा सुरक्षा का अभूतपूर्व जाल; 5 बलों के DG ने संभाली कमान, तैनात होंगी 200 बख्तरबंद गाड़ियाँ

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की संवेदनशीलता को देखते हुए कोलकाता के सॉल्ट लेक में हुई यह उच्च-स्तरीय बैठक भारतीय चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा तैयारियों में से एक को दर्शाती है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ‘वन इलेक्शन फोर्स’ का संकल्प लिया गया है।


इस पूरी सुरक्षा रणनीति और बैठक के मुख्य बिंदुओं का विवरण

सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक तैनाती
पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा का एक अभूतपूर्व घेरा तैयार किया गया है:
सैनिकों की संख्या: लगभग 2.5 लाख अर्धसैनिक बलों (CAPF) के जवानों की तैनाती।
प्रमुख बल: CRPF, BSF, CISF, SSB और ITBP के महानिदेशक (DGs) स्वयं इस रणनीति का हिस्सा हैं।
एकीकृत दृष्टिकोण: सभी बल स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक यूनिफ़ाइड सिक्योरिटी ग्रिड के रूप में कार्य करेंगे।
मार्क्समैन’ बख्तरबंद गाड़ियां: सुरक्षा का नया कवच
संवेदनशील इलाकों और हिंसा की आशंका वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से 200 मार्क्समैन (Marksman) बख्तरबंद गाड़ियाँ तैनात की गई हैं।


सुरक्षा क्षमता  AK-47, SLR और INSAS जैसी राइफलों की गोलियों से पूरी तरह सुरक्षित। |
मजबूत ढांचा धमाकों और भारी फायरिंग को झेलने के लिए विशेष स्टील से निर्मित। |
रन-फ्लैट टायर  टायर फटने या गोली लगने के बाद भी गाड़ी सुरक्षित स्थान तक पहुँचने में सक्षम। |
उपयोगिता उबड़-खाबड़ रास्तों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई (QRT) के लिए उपयुक्त। |

बैठक के मुख्य रणनीतिक निर्णय
सॉल्ट लेक स्थित CRPF के तीसरे सिग्नल सेंटर में हुई इस बैठक में कई कड़े निर्देश जारी किए गए:
नेतृत्व (Leadership): अधिकारियों को लीडरशिप बाय एग्ज़ाम्पल की नीति अपनाने को कहा गया है, यानी वे स्वयं फ्रंटलाइन पर रहकर जवानों का नेतृत्व करेंगे।
अनुशासन: सभी जवानों के लिए चुनाव ड्यूटी हैंडबुक का पालन अनिवार्य किया गया है ताकि चुनाव आयोग के प्रोटोकॉल में कोई चूक न हो।
निगरानी: संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च और एंटी-सबोटाज (तोड़फोड़ विरोधी) उपायों को प्राथमिकता दी गई है।
प्रथम चरण का लक्ष्य: 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण (152 निर्वाचन क्षेत्र) के मतदान को पूरी तरह भयमुक्त बनाना।

लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन के अनुसार, इस भारी सुरक्षा का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की पवित्रता की रक्षा करना है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल का हर नागरिक बिना किसी दबाव या धमकी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।

सुरक्षा बलों को अब केवल एक बल के रूप में नहीं, बल्कि ‘वन इलेक्शन फोर्स’ के रूप में काम करना है, जहाँ तकनीक और समन्वय ही सफलता की कुंजी है

सावधान नेशन न्यूज़ अब व्हाट्सऐप चैनल पर

        व्हाट्सऐप चैनल से जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *