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UP में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: माइनस बैलेंस होने पर भी 30 दिन तक नहीं कटेगी बिजली

उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहतकारी खबर है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा द्वारा जारी किए गए इन नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य स्मार्ट प्री-पेड मीटर के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को होने वाली तात्कालिक असुविधाओं को रोकना है।

इस नई व्यवस्था के मुख्य बिंदुओं को नीचे विस्तार से समझाया गया है:

1 किलोवाट (kW) भार वाले उपभोक्ताओं के लिए नियम
यह सबसे बड़ी राहत उन उपभोक्ताओं के लिए है जिनका कनेक्शन न्यूनतम लोड का है।

30 दिनों की छूट: यदि आपका बैलेंस माइनस (Negative) में चला जाता है, तब भी 30 दिनों तक कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
पोस्ट-पेड जैसा अनुभव: अब यह प्री-पेड मीटर बिल्कुल पुराने मीटर की तरह काम करेगा। आप महीने भर बिजली का उपयोग करें और 30 दिन पूरे होने पर या उससे पहले रिचार्ज कर सकते हैं।

2 किलोवाट (kW) भार वाले उपभोक्ताओं के लिए नियम
मध्यम भार वाले उपभोक्ताओं के लिए भी नियमों में ढील दी गई है:

₹200 की लिमिट: यदि बैलेंस शून्य हो जाता है, तब भी अगले 3 दिन या ₹200 तक का माइनस बैलेंस होने तक बिजली नहीं कटेगी।
सूचना प्रणाली: इन्हें भी भुगतान के लिए पर्याप्त समय और चेतावनी दी जाएगी।

महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और सुधार
ऊर्जा विभाग ने पारदर्शिता और सुचारू संचालन के लिए कुछ कड़े निर्देश भी दिए हैं:

SMS अलर्ट कनेक्शन काटने से पहले उपभोक्ता को 5 बार अलर्ट SMS भेजे जाएंगे। |

1-रविवार, त्योहार या किसी भी सार्वजनिक अवकाश के दिन बिजली नहीं काटी जाएगी।
2-रिचार्ज करने के बाद बिजली तुरंत चालू हो, इसके लिए 24×7 तकनीकी टीम तैनात रहेगी।
3-नया इंस्टॉलेशन फिलहाल पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदलने का काम स्थगित कर दिया गया है। |

विशेष नोट: यह निर्णय विशेष रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर लिया गया है जो तकनीकी खराबी या तत्काल पैसे की अनुपलब्धता के कारण अंधेरे में रहने को मजबूर हो जाते थे। अब मीटर “स्मार्ट” होने के साथ-साथ “उपभोक्ता मित्र” (User-friendly) भी बनाने की कोशिश की जा रही है।

योगी सरकार का यह फैसला न केवल छोटे उपभोक्ताओं को आर्थिक मानसिक तनाव से बचाएगा, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था को अधिक मानवीय और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

बिजली विभाग के इस बदले रुख से साफ है कि तकनीकी सुधारों के बीच आम आदमी की सुविधा ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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