Bandra railway station के पास गरीब नगर इलाके में पश्चिम रेलवे की ओर से चलाया जा रहा बड़ा डिमोलिशन अभियान अब चौथे दिन में पहुंच गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने और भविष्य की रेल लाइन विस्तार परियोजना के लिए की जा रही है। अब तक लगभग 85 से 90 प्रतिशत तक अवैध ढांचे हटाए जा चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के दौरान करीब 480 से 500 झुग्गियां और अन्य अवैध निर्माण तोड़े गए हैं। रेलवे का दावा है कि लगभग 5,000 वर्गमीटर से अधिक जमीन खाली कराई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह जमीन रेलवे ट्रैक विस्तार, स्टेशन अपग्रेड और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए अहम मानी जा रही है।
हालांकि कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी विरोध भी देखने को मिला। दूसरे और तीसरे दिन प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पत्थरबाजी और हंगामे के बाद कई पुलिसकर्मी घायल हुए और पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थिति को नियंत्रित किया। अब तक 16 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा पहले से योजनाबद्ध हो सकती है और इसकी जांच जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त पुनर्वास व्यवस्था दिए बिना बेदखल किया जा रहा है। कई परिवारों ने कहा कि त्योहारों और मानसून से पहले इस कार्रवाई के कारण हजारों लोग बेघर होने की स्थिति में आ गए हैं। वहीं रेलवे और प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद यह कार्रवाई जरूरी थी और सुरक्षा कारणों से अतिक्रमण हटाना अनिवार्य था।
सूत्रों के अनुसार इस जमीन का इस्तेमाल भविष्य में रेलवे की पांचवीं और छठी लाइन विस्तार परियोजना तथा मेट्रो और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब जैसे बड़े विकास कार्यों में किया जा सकता है। प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रखा है ताकि आगे किसी तरह की हिंसा या विरोध को रोका जा सके।
वहीं रेलवे और प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई पूरी तरह से वैध है और भविष्य में यहाँ कोई दोबारा कब्ज़ा न कर सके, इसके लिए खाली कराई गई ज़मीन की उचित घेराबंदी की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढाँचे और रेल नेटवर्क के आधुनिकिकरण के लिए यह कदम बेहद ज़रूरी था।
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