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सावधान नेशन न्यूज़

14 साल की महिमा राजपूत का अंतरिक्ष मिशन में चयन: ShakthiSAT से चांद तक का सपना, जानिए पूरी कहानी

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नई दिल्ली, 27 जून 2026

भारत में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की 14 साल की छात्रा महिमा राजपूत ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने देशभर में चर्चा पैदा कर दी है। कक्षा 10 की छात्रा महिमा का चयन अंतरराष्ट्रीय छात्र स्पेस मिशन ShakthiSAT के लिए हुआ है। इस मिशन में 108 देशों के छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे और अंतरिक्ष तकनीक, सैटेलाइट निर्माण और मिशन प्लानिंग सीखेंगे।

कौन हैं महिमा राजपूत?
महिमा राजपूत छत्तीसगढ़ की रहने वाली हैं और अभी कक्षा 10 में पढ़ाई कर रही हैं। बचपन से ही उनका झुकाव विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों की तरफ रहा है। स्कूल स्तर पर विज्ञान गतिविधियों और सीखने की रुचि के आधार पर उन्हें इस मिशन के लिए चुना गया।

महिमा को इस अवसर के बारे में उनके स्कूल के माध्यम से जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन किया और चयन प्रक्रिया पूरी की।

ShakthiSAT मिशन क्या है?
ShakthiSAT एक अंतरराष्ट्रीय छात्र स्पेस प्रोग्राम है, जिसमें अलग-अलग देशों के युवा अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी ट्रेनिंग लेते हैं। इसका उद्देश्य खासकर लड़कियों को STEM यानी Science, Technology, Engineering और Mathematics के क्षेत्र में आगे बढ़ाना है।

इस मिशन में छात्र केवल किताबों से विज्ञान नहीं पढ़ेंगे, बल्कि सैटेलाइट डिजाइन, तकनीक और स्पेस मिशन की वास्तविक प्रक्रिया को समझेंगे।

ShakthiSAT मिशन की लॉन्च तारीख अक्टूबर 2026 बताई गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसका एक चरण 11 अक्टूबर 2026 को श्रीहरिकोटा (भारत) से लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) मिशन के रूप में लॉन्च करने की योजना है।

इसके बाद ShakthiSAT का बड़ा लक्ष्य चंद्रमा (Moon) से जुड़ा मिशन है, जिसकी योजना आगे के चरण में है। कुछ रिपोर्टों में इसे 2027 के आसपास के लूनर मिशन से जोड़ा गया है।

महिमा राजपूत जैसे चुने गए छात्र इस मिशन की तैयारी में सैटेलाइट डिजाइन, स्पेस टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं।



महिमा की ट्रेनिंग कितने समय से चल रही थी?
महिमा ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए छात्रों को 21 मॉड्यूल और 365 लेसन के जरिए प्रशिक्षण दिया गया। इसमें विज्ञान की मूल बातें, सैटेलाइट कैसे काम करते हैं और स्पेस मिशन कैसे तैयार होते हैं, इसकी जानकारी दी गई।

इस ट्रेनिंग के दौरान छात्रों को सैटेलाइट बनाने की प्रक्रिया और उससे जुड़ी तकनीकी जानकारी भी दी गई।

मिशन में महिमा क्या करेंगी?
ShakthiSAT में महिमा दूसरे देशों के छात्रों के साथ मिलकर काम करेंगी। उन्हें सैटेलाइट निर्माण और मिशन से जुड़े कामों में भाग लेने का मौका मिलेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार मिशन में चंद्रमा से जुड़े अध्ययन के लिए सैटेलाइट तैयार करने की योजना है।

चुने गए छात्र दिल्ली में इकट्ठा होकर सैटेलाइट निर्माण से जुड़े कार्यों में हिस्सा लेंगे। मिशन की लॉन्च योजना अक्टूबर के आसपास बताई गई है।

महिमा के क्षेत्र के लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?
महिमा की सफलता के बाद उनके क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। लोगों का मानना है कि एक छोटे शहर और सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाली छात्रा का इतनी कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पेस मिशन तक पहुंचना युवाओं के लिए प्रेरणा है।

कई लोग इसे इस बात का उदाहरण मान रहे हैं कि अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे दुनिया के बड़े मंचों पर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं।


क्या ऐसे मौके भारत के युवाओं के लिए खास हैं?
ऐसे अवसर भारत के युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अंतरिक्ष विज्ञान अब केवल बड़े वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं है। आज स्कूल के छात्र भी सैटेलाइट, रोबोटिक्स और नई तकनीक सीखकर भविष्य के वैज्ञानिक बन सकते हैं।
भारत पहले ही अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। Indian Space Research Organisation की सफलताओं ने युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाई है। ऐसे छात्र मिशन नई पीढ़ी को यह दिखाते हैं कि अंतरिक्ष क्षेत्र में करियर के रास्ते खुले हैं।


लड़कियों के लिए क्यों है बड़ी प्रेरणा?
महिमा की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि अंतरिक्ष और तकनीक जैसे क्षेत्रों में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाना दुनिया भर में एक बड़ा लक्ष्य है। ShakthiSAT जैसे कार्यक्रम लड़कियों को कम उम्र में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी अनुभव देने की कोशिश करते हैं।

यह सिर्फ एक छात्रा की सफलता नहीं है, बल्कि उन हजारों लड़कियों के लिए संदेश है जो विज्ञान में आगे बढ़ना चाहती हैं।


निष्कर्ष
14 साल की महिमा राजपूत का ShakthiSAT मिशन के लिए चयन भारत के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि दिखाती है कि आज के युवा केवल सपने देखने वाले नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने की दिशा में काम करने वाले भी हैं।
अगर ऐसे अवसर स्कूल स्तर पर ज्यादा उपलब्ध होते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत को अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और शोध के क्षेत्र में कई नए वैज्ञानिक मिल सकते हैं। महिमा की यह यात्रा आने वाली पीढ़ी के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा बन सकती है।

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