सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 27 जून 2026
हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल एक बार फिर चर्चा में आ गई, जब डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की पैरोल अवधि खत्म होने के बाद उनके वापस जेल पहुंचने की खबर सामने आई। राम रहीम लंबे समय से अपने मामलों और बार-बार मिलने वाली पैरोल को लेकर देशभर में चर्चा का विषय रहे हैं।
राम रहीम को किस अपराध में मिली थी सजा?
गुरमीत राम रहीम सिंह पर सबसे बड़ा मामला 2002 में सामने आया था। उन पर डेरा आश्रम में रहने वाली दो साध्वियों के यौन शोषण का आरोप लगा था। यह मामला लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया में रहा। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच के बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
साल 2017 में विशेष CBI अदालत ने राम रहीम को दोनों मामलों में दोषी ठहराया। अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई, जो लगातार चलने वाली थी। यानी कुल 20 साल की सजा हुई। साथ ही जुर्माना भी लगाया गया।
सुनारिया जेल क्यों पहुंचे?
दोष सिद्ध होने के बाद राम रहीम को रोहतक की सुनारिया जेल में रखा गया। पैरोल या फरलो मिलने पर वह कुछ समय के लिए जेल से बाहर आते रहे, लेकिन अवधि पूरी होने के बाद उन्हें वापस जेल लौटना पड़ता है। इससे पहले भी कई बार पैरोल खत्म होने के बाद वह सुनारिया जेल लौट चुके हैं।
हत्या मामले को लेकर भी रहा विवाद
राम रहीम का नाम पत्रकार राम चंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी आया था। इस मामले में पहले उन्हें दोषी ठहराया गया था, हालांकि बाद में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया।
इस वजह से राम रहीम से जुड़े कानूनी मामलों पर लगातार बहस होती रही है। उनके समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष अलग-अलग राय रखते हैं।
पैरोल पर क्यों उठते रहे सवाल?
राम रहीम को समय-समय पर पैरोल मिलने को लेकर कई बार सवाल उठे हैं। आलोचकों का कहना रहा है कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को इतनी बार बाहर आने की अनुमति देना पीड़ितों और समाज के लिए चिंता का विषय है। वहीं प्रशासन की ओर से पैरोल को जेल नियमों के तहत दी जाने वाली सुविधा बताया जाता रहा है।
लोगों की प्रतिक्रिया कैसी रही?
राम रहीम की पैरोल और जेल वापसी पर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं।
कई लोगों ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और अपराध की गंभीरता को देखते हुए सख्ती जरूरी है।
कुछ लोगों ने बार-बार पैरोल मिलने पर सवाल उठाए।
वहीं डेरा समर्थक आज भी राम रहीम को अपना धार्मिक गुरु मानते हैं और उनके प्रति समर्थन दिखाते रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिलती रही है। कुछ लोग इसे न्याय व्यवस्था से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ लोग इसे जेल नियमों की प्रक्रिया मानते हैं।
समाज के लिए बड़ा सवाल
ऐसे मामले केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह सवाल खड़ा करते हैं कि प्रभावशाली लोगों और आम नागरिकों के लिए कानून का पालन किस तरह समान रूप से लागू हो। अपराध साबित होने के बाद सजा का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में भरोसा बनाए रखना भी होता है।
राम रहीम का मामला भारत के उन चर्चित मामलों में शामिल है, जिसने धर्म, कानून, राजनीति और समाज—चारों क्षेत्रों में लंबे समय तक चर्चा पैदा की। आज भी जब उनकी पैरोल, जेल वापसी या अदालत से जुड़ी कोई खबर आती है तो देशभर में लोगों की नजर उस पर रहती है।
सावधान नेशन न्यूज़…
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