सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
आज की यह खबर इंसानियत, संवेदनशीलता और समाज सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश करती है, जिसे सुनकर हर किसी का दिल भावुक हो जाएगा। यह कहानी है एक ऐसी शिक्षिका की, जिन्होंने एक अनाथ बच्ची का दर्द सुना और बिना किसी भेदभाव के खुद उसकी मां बन गईं।
जी हां, हम बात कर रहे हैं दिल्ली की यमुना विहार निवासी 39 वर्षीय शिक्षिका रीना कुमारी की, जो न केवल बच्चों को पढ़ाती हैं बल्कि उनके जीवन में उम्मीद की नई रोशनी भी भर रही हैं।
रीना कुमारी पिछले करीब डेढ़ दशक से अध्यापन के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। हिंदी और राजनीति शास्त्र से परास्नातक तथा बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षा को ही अपना मिशन बना लिया। वर्तमान में वे पीएमश्री उच्च प्राथमिक विद्यालय सिसाना में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।
लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक शिक्षक के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समाजसेवी इंसान के रूप में भी बन चुकी है।
दरअसल, करीब दो साल पहले की बात है। कक्षा तीन में पढ़ने वाली एक बच्ची कई दिनों तक स्कूल नहीं आई। आमतौर पर जब कोई बच्चा स्कूल नहीं आता तो शिक्षक कारण जानने की कोशिश करते हैं। इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए रीना कुमारी खुद उस बच्ची के घर पहुंच गईं।
जब उन्होंने बच्ची से स्कूल नहीं आने की वजह पूछी तो उसकी बात सुनकर वे अंदर तक हिल गईं। बच्ची ने बताया कि उसके पिता की साल 2019 में बीमारी के कारण मौत हो गई थी। पिता के निधन के बाद उसकी मां ने चार महीने की इद्दत पूरी करने के बाद मायके जाकर दूसरी शादी कर ली।
इसके बाद यह मासूम बच्ची अपनी वृद्ध दादी और दादा के साथ रहने लगी।
बच्ची ने शिक्षिका से कहा कि स्कूल में जब दूसरे बच्चों के माता-पिता आते हैं तो उसे बहुत अकेलापन महसूस होता है। उसने भावुक होकर कहा कि “मेरे पास न मां है और न पिता, इसलिए मेरा स्कूल में मन नहीं लगता।”
यह बात सुनकर रीना कुमारी का दिल पसीज गया। उन्होंने बिना एक पल की देरी किए उस बच्ची से कहा —
“आज से मैं तुम्हारी मां हूं।”
बस, यहीं से शुरू हुई एक नई कहानी।
उस दिन के बाद से उस बच्ची की जिंदगी बदल गई। रीना कुमारी न सिर्फ उसकी पढ़ाई का पूरा ध्यान रख रही हैं, बल्कि एक मां की तरह उसका ख्याल भी रखती हैं।
सरकार की ओर से स्कूल में बच्चों को किताबें तो मुफ्त मिल जाती हैं, लेकिन कपड़े, जूते और अन्य जरूरतों का खर्च भी रीना कुमारी खुद उठाती हैं। इतना ही नहीं, वे समय-समय पर उस बच्ची के घर के खर्च में भी आर्थिक मदद करती रहती हैं।
रीना कुमारी का कहना है कि जब तक यह बच्ची पढ़ाई करेगी, तब तक उसकी पूरी जिम्मेदारी वे खुद उठाएंगी।
आपको जानकर हैरानी होगी कि रीना कुमारी हर महीने अपनी तनख्वाह से करीब चार हजार रुपये समाज सेवा के कामों में खर्च करती हैं।
वे केवल इस बच्ची की ही मदद नहीं कर रही हैं, बल्कि ऐसे कई बच्चों की पढ़ाई भी दोबारा शुरू करवा चुकी हैं जो गरीबी की वजह से बीच में स्कूल छोड़ चुके थे।
इसके अलावा रीना कुमारी बच्चों के भीतर साहित्य और संवेदनशीलता के बीज भी बो रही हैं। वे अक्सर बच्चों को कविता के माध्यम से प्रेरित करती हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की सीख देती हैं।
आज के दौर में जहां कई बार समाज में नकारात्मक खबरें ज्यादा सुनने को मिलती हैं, वहीं रीना कुमारी जैसी शिक्षिकाएं यह साबित करती हैं कि इंसानियत अभी भी जिंदा है।
वाकई, अगर हर शिक्षक और हर इंसान अपने आसपास जरूरतमंद लोगों की थोड़ी-सी मदद करने का संकल्प ले ले, तो समाज की तस्वीर बदल सकती है।
उनका यह कदम न केवल शिक्षा के प्रति समर्पण का उदाहरण है, बल्कि समाज में भाईचारे और मानवता का भी मजबूत संदेश देता है।
रीना कुमारी की यह कहानी हमें यही सिखाती है कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं, बल्कि इंसानियत और प्यार से भी बनते हैं।
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