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सावधान नेशन न्यूज़

CBSE री-एवेल्यूएशन प्रक्रिया पर विवाद, पोर्टल खराबी से परेशान हुए छात्र

देशभर में लाखों छात्रों के लिए CBSE बोर्ड परीक्षा के परिणाम हमेशा बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लेकिन इस बार 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के बाद री-एवेल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका देखने की प्रक्रिया ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि CBSE की ऑनलाइन प्रणाली लगातार खराब हो रही है, जिसकी वजह से वे समय पर अपनी उत्तर पुस्तिकाएं डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं। कहीं पोर्टल खुल नहीं रहा, तो कहीं भुगतान के बाद भी आवेदन स्वीकार नहीं हो रहे।

दरअसल, CBSE ने इस वर्ष उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी, मार्क्स वेरिफिकेशन और री-एवेल्यूएशन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की थी। बोर्ड के अनुसार छात्र आधिकारिक वेबसाइट के जरिए अपनी कॉपी मंगवा सकते हैं और यदि किसी प्रश्न में अंक कम दिए गए हों तो दोबारा जांच की मांग कर सकते हैं।

हालांकि, प्रक्रिया शुरू होते ही हजारों छात्रों ने सोशल मीडिया पर शिकायतें करनी शुरू कर दीं। कई छात्रों का कहना था कि वेबसाइट बार-बार क्रैश हो रही है। कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि फीस जमा करने के दौरान तकनीकी खराबी के कारण हजारों रुपये कट गए। एक रिपोर्ट में तो यह सामने आया कि कुछ छात्रों को उत्तर पुस्तिका देखने के लिए 69 हजार रुपये तक की फीस दिखाई गई, जिससे अभिभावकों में भारी नाराजगी फैल गई। CBSE ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि यह एक तकनीकी गड़बड़ी थी और जिन छात्रों से गलत भुगतान लिया गया है उन्हें रिफंड दिया जाएगा। बोर्ड ने यह भी कहा कि किसी भी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

इस पूरे मामले के बाद शिक्षा मंत्रालय भी सक्रिय हो गया। खबरों के अनुसार मंत्रालय ने IIT मद्रास और IIT कानपुर के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया ताकि पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को जल्द ठीक किया जा सके।

छात्रों की सबसे बड़ी चिंता यह रही कि उन्हें अपनी मेहनत के अनुसार अंक नहीं मिले। कई विद्यार्थियों ने दावा किया कि उनकी कॉपी में सही उत्तर होने के बावजूद कम अंक दिए गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन फोरम पर छात्रों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की। कुछ छात्रों ने कहा कि इस बार ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) के कारण कॉपियों की जांच में गड़बड़ी हुई है। एक छात्र ने ऑनलाइन पोस्ट में बताया कि उसकी उत्तर पुस्तिका में कुल अंक अलग दिखाई दे रहे थे, जबकि मार्कशीट में अलग अंक दर्ज थे। इससे छात्रों के बीच भ्रम और बढ़ गया।

CBSE ने इन आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि बोर्ड निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बोर्ड के अनुसार इस वर्ष करोड़ों उत्तर पुस्तिकाओं की जांच डिजिटल प्रणाली के जरिए की गई और यदि किसी छात्र को वास्तविक शिकायत है तो विशेषज्ञ उसकी जांच करेंगे। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक फर्जी नोटिस भी वायरल होने लगा जिसमें दावा किया गया कि री-एवेल्यूएशन प्रक्रिया बंद कर दी गई है। CBSE ने तुरंत छात्रों को चेतावनी देते हुए कहा कि केवल आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली भविष्य के लिए जरूरी है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए मजबूत तकनीकी ढांचा होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि पोर्टल समय पर काम न करे या भुगतान प्रणाली फेल हो जाए तो छात्रों का मानसिक दबाव और बढ़ जाता है।

कई शिक्षकों ने भी माना कि परिणाम के बाद की प्रक्रिया को और सरल बनाने की जरूरत है। उनका कहना है कि छात्रों को पारदर्शी तरीके से यह दिखाया जाना चाहिए कि किस प्रश्न में कितने अंक दिए गए और कहां कटौती हुई। इससे विवाद कम होंगे और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए CBSE ने आवेदन की अंतिम तिथि भी बढ़ाई ताकि जिन छात्रों को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा है, वे दोबारा आवेदन कर सकें।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बोर्ड इन शिकायतों को कितनी जल्दी हल करता है। क्योंकि हर साल लाखों छात्र CBSE परिणामों पर अपने भविष्य की योजना तय करते हैं। ऐसे में री-एवेल्यूएशन प्रक्रिया का पारदर्शी और भरोसेमंद होना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

Savdhaan Nation News…

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