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IB और UP ATS ने गाजियाबाद-हापुड़ सीमा से जुड़े ‘नाहल मॉडल’

गाज़ियाबाद !
तरुण कश्यप

देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर आतंकियों के निशाने पर थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी ने एक बड़े हमले को टाल दिया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर गाजियाबाद के नाहल गांव (धौलाना क्षेत्र) और मेरठ से जुड़े एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जो पाकिस्तान स्थित हैंडलर के सीधे संपर्क में थे। 

मुख्य विवरण:

  • गिरफ्तारी और पहचान: सुरक्षा एजेंसियों ने हापुड़ के धौलाना क्षेत्र (नाहल गांव के पास) से अजीम राणा और मेरठ से उसके भतीजे आजाद अली को गिरफ्तार किया है।
  • हैंडलर का कनेक्शन: जांच में खुलासा हुआ है कि ये दोनों पिछले छह महीनों से पाकिस्तान स्थित हैंडलर शहजाद भट्टी के संपर्क में थे। भट्टी के संबंध आईएसआई (ISI) से बताए जा रहे हैं।
  • साजिश का उद्देश्य: आरोपी अजीम राणा को दिल्ली के प्रमुख हिंदू मंदिरों की रेकी करने और उनका वीडियो भेजने का काम सौंपा गया था। इसके अलावा, उसने नोएडा और आसपास के इलाकों के संवेदनशील वीडियो भी साझा किए थे।
  • हथियारों की तस्करी: हैंडलर ने राणा को पंजाब जाकर एक ‘पार्सल’ (जिसमें हथियार या विस्फोटक होने का संदेह है) लेने और उसे दिल्ली पहुंचाने का निर्देश दिया था, जिसके बदले उसे भारी रकम देने का वादा किया गया था। 

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे:

  1. डिजिटल सबूत: आरोपियों के मोबाइल से डिलीट किया गया डेटा फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बरामद कर लिया है, जिसमें पाकिस्तान को भेजी गई संवेदनशील जानकारियां और वीडियो कॉल रिकॉर्डिंग्स शामिल हैं।
  2. गैंगस्टर कनेक्शन: जांच में लॉरेंस बिश्नोई और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड का भी जिक्र आया है, जिसका उपयोग हैंडलर युवाओं को भड़काने के लिए कर रहा था।
  3. नाहल गांव का लिंक: गाजियाबाद का नाहल गांव और धौलाना क्षेत्र इस मॉड्यूल के मुख्य केंद्र के रूप में उभरे हैं, जहां से संदिग्ध अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। 

सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई:
दिल्ली पुलिस और एटीएस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य स्थानीय संपर्कों की तलाश में छापेमारी कर रही है। एजेंसियों का मानना है कि इस मॉड्यूल के जरिए दिल्ली-एनसीआर में सिलसिलेवार धमाकों की योजना बनाई गई थी। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ यूएपीए (UAPA) और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर पूछताछ जारी है। 


सुरक्षा एजेंसियों (IB, UP ATS और दिल्ली पुलिस) की हालिया जांच में अजीम राणाशावेज़ और मौलाना से जुड़े ‘नाहल मॉडल’ के बारे में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विवरण सामने आए हैं:

  • नेपाल में मुलाकात की योजना: जांच के अनुसार, आरोपी शावेज़ और एक स्थानीय मौलाना को नेपाल भेजा जाना था। वहां उनकी मुलाकात पाकिस्तान से आने वाले एक आतंकी हमजा से होने वाली थी।
  • हमजा का प्रोफाइल: हमजा को एक प्रशिक्षित आतंकी बताया जा रहा है, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने भारत में बड़े हमले करने के लिए तैयार किया था।
  • हथियारों की ट्रेनिंग: नेपाल में होने वाली इस गुप्त मुलाकात का मुख्य उद्देश्य शावेज़ और अन्य को अत्याधुनिक हथियारों (जैसे पिस्तौल और विस्फोटक) को चलाने की ट्रेनिंग देना था।
  • आतंकी साजिश: ट्रेनिंग के बाद, इन लोगों को भारत वापस आकर दिल्ली के प्रमुख मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर हमले करने का काम सौंपा जाना था। इसके लिए इन्हें पाकिस्तान स्थित हैंडलर शहजाद भट्टी से निर्देश मिल रहे थे।
  • लोकेशन और नेटवर्क: इस नेटवर्क का केंद्र गाजियाबाद का नाहल गांव (धौलाना क्षेत्र) और मेरठ के इलाके थे। आरोपी शावेज़ और अजीम राणा पिछले काफी समय से सीमा पार बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे और नेपाल के रास्ते घुसपैठ की फिराक में थे। 

सुरक्षा एजेंसियों ने इस मुलाकात से पहले ही मॉड्यूल का पर्दाफाश कर दिया, जिससे दिल्ली में संभावित बड़े आतंकी हमले को टाल दिया गया।

इस आतंकी मॉड्यूल की जांच में दुबई कनेक्शन और CCTV डेटा को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पकड़े गए संदिग्ध न केवल भारत की सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा कर रहे थे, बल्कि वे जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-टेक उपकरण भी दुबई भेज रहे थे। 

यहाँ इस दुबई कनेक्शन की विस्तृत जानकारी दी गई है:

  • सीसीटीवी डेटा और उपकरणों की तस्करी: जांच में सामने आया है कि कौशांबी से गिरफ्तार संदिग्धों ने सीसीटीवी कैमरों का डेटा और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कोरियर के जरिए दुबई भेजे थे।
  • पाकिस्तानी हैंडलर का निर्देश: यह पूरी साजिश पाकिस्तान में बैठे एक व्यक्ति, जिसका नाम सरदार बताया जा रहा है, के इशारे पर रची गई थी। उसने अपने गुर्गों के जरिए जनवरी और फरवरी में संदिग्धों को दो पार्सल भेजे थे।
  • दिल्ली से दुबई का रूट: इन पार्सल को प्राप्त करने के बाद, सुहेल गैंग ने उन्हें दिल्ली से कोरियर के माध्यम से दुबई भेजा। इन उपकरणों का उपयोग संवेदनशील स्थानों की जासूसी और डेटा विश्लेषण के लिए किया जाना था।
  • संवेदनशील स्थानों की निगरानी: संदिग्धों ने दिल्ली और एनसीआर के कई महत्वपूर्ण स्थानों (जैसे लाल किला और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके) के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज जुटाए थे, जिन्हें सीमा पार बैठे हैंडलर्स को भेजा गया था।
  • आर्थिक लालच: इस जासूसी नेटवर्क को चलाने के लिए दुबई के जरिए संदिग्धों को मोटी रकम मिलने का भी अंदेशा जताया गया है। 

सुरक्षा एजेंसियां अब उन कोरियर कंपनियों और दुबई में मौजूद उन संपर्कों की जांच कर रही हैं, जिन्हें ये पार्सल भेजे गए थे ताकि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी कड़ियों को जोड़ा जा सके। 

“सुरक्षा एजेंसियों की इस मुस्तैदी ने दिल्ली-एनसीआर को दहलाने की एक और नापाक साजिश को जड़ से उखाड़ फेंका है। लेकिन याद रखिए, दुश्मन की नज़रें अभी भी हमारी शांति पर हैं। देश की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना हम सबकी जिम्मेदारी है। देश से जुड़ी हर बड़ी और पुख्ता खबर के लिए देखते रहिए ‘सावधान नेशन’—क्योंकि आपकी सतर्कता ही देश की सुरक्षा है।”

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