सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 9 जून 2026
गाजियाबाद में हिंडन नदी के किनारे बसे क्षेत्रों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा नदी और उसके फ्लडप्लेन क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर जताई गई चिंताओं के बाद जिला प्रशासन ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में स्थित करीब 258 कॉलोनियां जांच और कार्रवाई के दायरे में हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों पर असर पड़ सकता है।
जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ के नेतृत्व में विभिन्न विभागों को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान में राजस्व विभाग, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA), सिंचाई विभाग और नगर निगम की टीमें शामिल होंगी। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र को सुरक्षित रखना और पर्यावरणीय नुकसान को रोकना बताया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि हिंडन नदी के फ्लडप्लेन में वर्षों से अनियोजित निर्माण और अवैध कॉलोनियों के विस्तार के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हुआ है। बरसात के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं में भी वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के किनारे बने अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं बल्कि वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी जोखिम पैदा करते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फ्लडप्लेन क्षेत्र में किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। जिन स्थानों पर निर्माण कार्य जारी है, वहां निरीक्षण बढ़ा दिया गया है। यदि कोई निर्माण अवैध पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू नदी प्रदूषण पर नियंत्रण भी है। प्रशासन उन आवासीय सोसायटियों, कॉलोनियों और औद्योगिक इकाइयों की पहचान कर रहा है जो बिना शोधन के सीवेज या गंदा पानी सीधे हिंडन नदी में छोड़ रही हैं। ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने और सीवेज निकासी व्यवस्था पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
लोनी, करहेड़ा, कनावनी, छिजार्सी और हिंडन नदी के आसपास के अन्य निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर चिंता का माहौल है। कई निवासियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों पहले जमीन खरीदी थी और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वह क्षेत्र फ्लडप्लेन की श्रेणी में आता है। दूसरी ओर पर्यावरण कार्यकर्ता प्रशासन की इस पहल का समर्थन कर रहे हैं और इसे नदी संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति खरीदने से पहले संबंधित क्षेत्र की कानूनी स्थिति की जांच करना बेहद जरूरी है। केवल रजिस्ट्री होना किसी भूखंड या कॉलोनी के पूरी तरह वैध होने की गारंटी नहीं माना जाता। खरीदारों को GDA और संबंधित सरकारी विभागों से स्वीकृति की स्थिति अवश्य जांचनी चाहिए।
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी प्लॉट या मकान की खरीद से पहले उसकी वैधता की जांच करें और फ्लडप्लेन या प्रतिबंधित क्षेत्रों में निवेश करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
कुल मिलाकर हिंडन नदी के संरक्षण को लेकर गाजियाबाद प्रशासन अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में संयुक्त टीमों की कार्रवाई और सर्वेक्षण रिपोर्ट यह तय करेगी कि किन क्षेत्रों में वास्तविक रूप से ध्वस्तीकरण या अन्य कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन का संदेश स्पष्ट है कि नदी के प्राकृतिक क्षेत्र में अतिक्रमण और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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