सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026
कर्नाटक में Honda कंपनी के कारोबार और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) परियोजना को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कंपनी के कर्नाटक से बाहर जाने की खबरों के बीच राज्य के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि Honda कर्नाटक छोड़कर नहीं जा रही है। कंपनी राज्य में अपना कारोबार जारी रखे हुए है और यहां इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का उत्पादन शुरू करने की दिशा में भी काम कर रही है।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि विवाद केवल Honda के राज्य से बाहर जाने का नहीं, बल्कि कर्नाटक में प्रस्तावित उसकी नई इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण परियोजना को लेकर भी है। इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी और कर्नाटक सरकार के बीच बयानबाजी देखने को मिल रही है।
आखिर Honda को लेकर विवाद क्यों शुरू हुआ?
दरअसल, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 31 अक्टूबर को Honda Motorcycle & Scooter India की कर्नाटक में प्रस्तावित इलेक्ट्रिक वाहन परियोजना को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कंपनी ने कोलार जिले के नरसापुरा में अपनी प्रस्तावित इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण परियोजना से कदम पीछे खींच लिए हैं।
कुमारस्वामी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार से सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं, जिनकी वजह से कंपनी ने राज्य में अपने इलेक्ट्रिक वाहन निवेश की योजना को आगे नहीं बढ़ाया। उन्होंने राज्य में निवेश के माहौल और उद्योगों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल उठाए।
उनके इस बयान के बाद Honda के कर्नाटक से बाहर जाने की चर्चाएं तेज हो गईं।
एमबी पाटिल ने क्या जवाब दिया?
केंद्रीय मंत्री के आरोपों पर कर्नाटक के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने 1 नवंबर को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने Honda के राज्य छोड़ने के दावे को गलत बताते हुए कहा कि कंपनी का कर्नाटक से पुराना संबंध है और वह यहां अपना कारोबार जारी रखे हुए है।
एमबी पाटिल के अनुसार, Honda को साल 2011 से कोलार जिले के नरसापुरा में चरणबद्ध तरीके से लगभग 135 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। कंपनी ने 2013 में यहां दोपहिया वाहनों का उत्पादन शुरू किया था।
मंत्री ने बताया कि नरसापुरा स्थित Honda की फैक्ट्री में प्रतिदिन लगभग 10 हजार दोपहिया वाहनों का उत्पादन होता है। इस संयंत्र में 7,800 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी का डोड्डाबल्लापुर तालुक के अदिनारायण होसाहल्ली में लगभग 35 एकड़ में फैला स्पेयर पार्ट्स का गोदाम और वितरण केंद्र भी है, जो दक्षिण भारत में कंपनी की जरूरतों को पूरा करता है।
एमबी पाटिल ने कहा कि Honda कर्नाटक में मौजूद है और आगे भी यहां अपना कारोबार जारी रखेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कंपनी ने राज्य सरकार के प्रति किसी तरह की नाराजगी जाहिर नहीं की है।
₹600 करोड़ की इलेक्ट्रिक वाहन परियोजना पर क्या है असली मामला?
इस विवाद की सबसे अहम कड़ी Honda की लगभग 600 करोड़ रुपये की प्रस्तावित इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माण परियोजना है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, Honda Motorcycle & Scooter India ने नरसापुरा में एक अलग इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बनाई थी। फरवरी 2025 में बेंगलुरु में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के दौरान इस निवेश से जुड़ा समझौता हुआ था।
इस प्रस्तावित इकाई को 2028 तक शुरू करने की योजना थी। शुरुआती स्तर पर इसकी सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 6 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रखने की बात सामने आई थी।
लेकिन 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि Honda ने इस अलग इलेक्ट्रिक वाहन फैक्ट्री में निवेश की योजना रद्द कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अब अपनी मौजूदा निर्माण सुविधाओं के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पूरी करने की रणनीति पर विचार कर रही है।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि Honda ने खबर प्रकाशित होने तक इस मामले पर भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया था। इसलिए प्रस्तावित फैक्ट्री रद्द होने की खबर को कंपनी की आधिकारिक घोषणा नहीं समझना चाहिए।
क्या Honda कर्नाटक में इलेक्ट्रिक वाहन बनाएगी?
एमबी पाटिल का कहना है कि Honda इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के उत्पादन को लेकर गंभीर है और नरसापुरा स्थित अपने मौजूदा परिसर में इसका उत्पादन शुरू करने की दिशा में काम कर रही है।
उनके अनुसार, कंपनी अलग फैक्ट्री के बजाय मौजूदा परिसर में ही इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रही है।
इसका मतलब है कि अलग इलेक्ट्रिक वाहन फैक्ट्री की योजना में बदलाव और Honda का कर्नाटक से पूरी तरह बाहर जाना दो अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में कंपनी के राज्य से पूरी तरह कारोबार समेटने की पुष्टि नहीं हुई है।
कर्नाटक में निवेश को लेकर क्यों बढ़ी राजनीतिक बहस?
Honda का मामला सामने आने के बाद कर्नाटक में उद्योग और निवेश को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
एचडी कुमारस्वामी ने राज्य में निवेश आकर्षित करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं एमबी पाटिल का कहना है कि इस तरह के दावों से राज्य की औद्योगिक छवि और निवेश के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कुमारस्वामी से कहा कि उन्हें राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने और नए निवेश लाने पर ध्यान देना चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब देश के अलग-अलग राज्य इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, बैटरी और ऑटोमोबाइल उद्योग में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
Honda के कर्नाटक से पूरी तरह बाहर जाने की खबर की अभी पुष्टि नहीं हुई है। असली विवाद उसकी प्रस्तावित नई इलेक्ट्रिक वाहन फैक्ट्री और निवेश योजना में बदलाव को लेकर है। कंपनी की ओर से इस पूरे मामले पर स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
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