सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026
भारत में AI का अगला दौर शुरू
भारत में कंपनियों के बीच Artificial Intelligence यानी AI का इस्तेमाल अब केवल प्रयोग, डेमो और छोटे पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं रह गया है। 2026 में भारतीय कंपनियां AI को अपने रोजमर्रा के कारोबारी कामकाज में शामिल करने और उससे वास्तविक आर्थिक फायदा हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
Deloitte की 2026 State of AI in the Enterprise रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियां कई क्षेत्रों में वैश्विक औसत से आगे निकल रही हैं। भारत में 40 प्रतिशत संगठनों ने AI के महत्वपूर्ण या व्यापक इस्तेमाल की बात कही, जबकि वैश्विक औसत करीब 28 प्रतिशत रहा। Product Development, Strategy & Operations, Marketing & Sales और Supply Chain जैसे क्षेत्रों में AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल बढ़ रहा है।
Dun & Bradstreet के अगस्त 2026 के AI Momentum Survey में भी AI को लेकर भारतीय कारोबारों की बढ़ती दिलचस्पी सामने आई। सर्वे में शामिल सभी कंपनियों ने किसी न किसी रूप में AI से जुड़े प्रोजेक्ट चल रहे होने की बात कही। इनमें 30 प्रतिशत कंपनियां AI को production में scale कर रही थीं और 19 प्रतिशत कंपनियां इसे कई महत्वपूर्ण कारोबारी प्रक्रियाओं में operationalise कर चुकी थीं।
AI का इस्तेमाल किन कामों में बढ़ रहा है?
कंपनियां AI का इस्तेमाल केवल चैटबॉट या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रख रही हैं। अब इसका इस्तेमाल उत्पाद विकास, ग्राहक सेवा, बिक्री और मार्केटिंग, सप्लाई चेन, वित्तीय सेवाओं, धोखाधड़ी की पहचान और कारोबार से जुड़े फैसलों में किया जा रहा है।
BFSI यानी बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र AI के इस्तेमाल में खास तौर पर आगे है। AI का उपयोग क्रेडिट स्कोरिंग, फ्रॉड डिटेक्शन और ग्राहक सेवाओं जैसे कामों में बढ़ रहा है। Manufacturing कंपनियां मशीनों की निगरानी, उत्पादन क्षमता और inventory management में AI का इस्तेमाल कर रही हैं।
EY India की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 47 प्रतिशत भारतीय संगठनों ने एक से ज्यादा GenAI use cases को production में लाइव करने की जानकारी दी थी। हालांकि enterprise-wide deployment अभी शुरुआती स्तर पर है। इसका मतलब है कि AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पूरी कंपनी के हर विभाग में इसका व्यापक इस्तेमाल अभी बाकी है।
सबसे बड़ी चुनौती बनी डेटा सुरक्षा
AI को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने के साथ कंपनियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का है।
AI सिस्टम को बेहतर परिणाम देने के लिए बड़ी मात्रा में कंपनी का आंतरिक डेटा चाहिए। इसमें ग्राहक की जानकारी, वित्तीय रिकॉर्ड, कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी और कारोबारी रणनीति जैसी संवेदनशील सूचनाएं शामिल हो सकती हैं।
यही वजह है कि कंपनियां AI deployment के साथ security, privacy, compliance और data governance पर भी खर्च बढ़ा रही हैं। Deloitte के अनुसार AI को scale करने के लिए भारतीय कंपनियों की प्रमुख investment priorities में security और compliance controls सबसे ऊपर हैं।
ServiceNow की 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत में enterprise AI investment एक साल में 119 प्रतिशत बढ़ा, लेकिन केवल 22 प्रतिशत भारतीय enterprises के पास AI से जुड़े testing, auditing और risk-assessment processes मौजूद थे। यानी AI में निवेश की रफ्तार governance की तैयारी से काफी आगे निकल गई है।
AI की लागत भी बड़ी चिंता
AI को production में चलाना केवल software खरीदने का मामला नहीं है। इसके लिए cloud infrastructure, computing power, data storage, cybersecurity और skilled professionals पर भी खर्च होता है।
इसलिए कंपनियां अब केवल यह नहीं देख रहीं कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह भी देख रही हैं कि AI से मिलने वाला फायदा उसकी लागत से कितना ज्यादा है।
KPMG के 2026 Global AI Pulse के मुताबिक, AI के अगले चरण में कंपनियों का ध्यान deployment से आगे बढ़कर accountability, AI economics और वास्तविक value पर जा रहा है।
भारतीय IT कंपनियों पर भी AI का दबाव
AI का असर केवल IT के ग्राहकों पर नहीं बल्कि खुद भारतीय IT कंपनियों के कारोबार पर भी पड़ रहा है।
Tata Consultancy Services, Infosys, HCLTech और Wipro जैसी बड़ी कंपनियां AI को अपनी services और delivery models में तेजी से शामिल कर रही हैं।
लेकिन AI एक दूसरी चुनौती भी पैदा कर रहा है। AI से काम तेजी से और कम मानव-घंटों में पूरा हो सकता है। इससे ग्राहकों के लिए लागत कम हो सकती है, लेकिन IT कंपनियों के पारंपरिक billable-hours model पर दबाव पड़ता है।
Reuters की 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय IT sector में AI-driven pricing pressure और ग्राहकों की खर्च को लेकर सावधानी सितंबर तिमाही के प्रदर्शन पर दबाव डाल रही है। बड़ी IT कंपनियों के लिए AI productivity बढ़ाने के साथ-साथ pricing power बनाए रखना चुनौती बन रहा है।
Economic Times ने भी रिपोर्ट किया कि AI से productivity बढ़ने के कारण IT कंपनियों पर उस लाभ का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक कीमतों में पहुंचाने का दबाव बढ़ रहा है, जिससे margins पर असर पड़ सकता है।
क्या AI भारतीय IT सेक्टर की नौकरियां खत्म कर देगा?
AI का असर नौकरियों पर भी दिखाई दे रहा है, लेकिन इसे सीधे तौर पर “सभी नौकरियां खत्म होने” के रूप में देखना सही नहीं होगा।
Routine और repetitive कामों में automation का असर ज्यादा पड़ सकता है, जबकि AI, cloud, cybersecurity, data science और advanced technology से जुड़े skills की मांग बढ़ रही है।
इसका अर्थ है कि IT sector में काम का स्वरूप बदल रहा है। आने वाले समय में केवल पारंपरिक coding या repetitive processes की जानकारी पर्याप्त नहीं हो सकती। AI tools के साथ काम करने और business problems को technology से हल करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
आगे की तस्वीर क्या है?
भारत में Enterprise AI का दौर अब केवल “AI आजमाने” से आगे बढ़कर AI से वास्तविक कारोबारी परिणाम हासिल करने का हो रहा है।
लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां अपने डेटा को कितना सुरक्षित और व्यवस्थित रखती हैं, AI की लागत को कितना नियंत्रित करती हैं और AI से मिलने वाले वास्तविक फायदे को कैसे मापती हैं।
यानी आने वाले समय में सिर्फ यह मायने नहीं रखेगा कि किस कंपनी ने AI अपनाया है, बल्कि यह मायने रखेगा कि किस कंपनी ने AI को सुरक्षित, किफायती और लाभदायक तरीके से अपने कारोबार का हिस्सा बनाया है।
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