सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2026
भारत में गर्दन, कमर और घुटनों के दर्द जैसी मांसपेशियों एवं हड्डियों से जुड़ी समस्याओं की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए एक नया शोध प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका BMC Public Health में 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुआ।
केरल में 1,192 लोगों के आँकड़ों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने केरल में अस्पतालों के आसपास से चुने गए वयस्क प्रतिभागियों के आँकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन नवंबर 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच किया गया था।
शोध में पिछले चार सप्ताह के दौरान दर्ज दर्द की रिपोर्ट इस प्रकार रही:
गर्दन में दर्द: 16.8 प्रतिशत
कमर के निचले हिस्से में दर्द: 15.4 प्रतिशत
कूल्हे या घुटने में दर्द: 12.8 प्रतिशत
हाथों के ऊपरी हिस्से में दर्द: 10.5 प्रतिशत
अध्ययन में महिलाओं और 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के प्रतिभागियों में दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाले मांसपेशियों एवं जोड़ों के दर्द की अधिक संभावना भी देखी गई।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए क्यों अहम है यह शोध?
शोधकर्ताओं ने G-MUSC नामक मानकीकृत सर्वेक्षण मॉड्यूल का इस्तेमाल किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग हिस्सों में होने वाले दर्द और उससे दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव की व्यवस्थित निगरानी की व्यवहार्यता जाँचना था।
ऐसे तरीके भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं को योजना बनाने और मांसपेशियों एवं जोड़ों से संबंधित समस्याओं का बेहतर आकलन करने में मदद कर सकते हैं।
क्या पूरे भारत में यही स्थिति है?
नहीं। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि प्रतिभागियों का चयन पूरे केरल या भारत की आबादी का प्रतिनिधित्व करने के लिए यादृच्छिक तरीके से नहीं किया गया था। इसलिए इन प्रतिशतों को देश की कुल आबादी में दर्द की दर नहीं माना जा सकता। इसके लिए बड़े और प्रतिनिधिक अध्ययनों की आवश्यकता है।
निष्कर्ष: आज प्रकाशित यह शोध स्वास्थ्य समस्याओं की निगरानी के एक तरीके का मूल्यांकन करता है। यह किसी नई दवा या उपचार की सफलता का परीक्षण नहीं है।
सावधान नेशन न्यूज़…