सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 27 जून 2026
मेरा बेटा काम पर गया था, लेकिन वह कभी वापस नहीं लौटा. अब हम क्या करें? सब कुछ बर्बाद हो गया है.”
“उसने मेरे बेटे की जान इस तरह क्यों ले ली? मेरे बेटे ने उसका क्या बिगाड़ा था? हमारे बेटे को न्याय दिलाइए.”
यह दर्दभरी पुकार 22 वर्षीय मयंक रमेश लोहार के माता-पिता की है, जिनके बेटे की ट्रेन में हुए चाकू हमले में मौत हो गई.
आरोप है कि 23 जून को मुंबई की जीवनरेखा (लाइफ़लाइन) मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में रोशन सुवर्णा नाम के शख़्स के चाकू हमले में मयंक रमेश लोहार की जान चली गई. एक पल में पूरे लोहार परिवार का सहारा छिन गया.
मयंक की मौत के बाद विरार स्थित उनके घर में शोक का माहौल है. परिवार का कोई भी सदस्य अभी तक इस सदमे से उबर नहीं पाया है.
परिजनों का कहना है कि मयंक की मां आज भी दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठी रहती हैं, इस उम्मीद में कि उनका बेटा काम से घर लौट आएगा. मयंक के पिता समेत पूरा परिवार उनके लिए न्याय की मांग कर रहा है.
ग्रेजुएशन, नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियां
मयंक लोहार 22 साल के थे. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी. वह अंधेरी के एक मॉल में सेल्समैन के रूप में काम करते थे.
लोहार परिवार पहले अंधेरी में रहता था और बाद में नालासोपारा आकर बस गया. परिवार पिछले 30 वर्षों से इन दोनों इलाकों से जुड़ा रहा है.
मयंक की पढ़ाई नालासोपारा में हुई थी. वह परिवार में दूसरे नंबर के बच्चे थे. परिवार में उनके माता-पिता, दो भाई और एक बहन हैं
शिक्षा पूरी करने के बाद वह अपने करियर और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे थे. वह अपनी कमाई से परिवार का सहारा बन रहे थे. लेकिन उनकी अचानक मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
मयंक के पिता 52 साल के हैं और ड्राइवर का काम करते हैं. उनका छोटा भाई और बहन पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ा भाई नौकरी करता है. परिवार के सदस्यों के अनुसार, संयुक्त परिवार में मयंक ही सबसे बड़ा सहारा थे.
‘अभियुक्त को फांसी दी जाए’, परिवार की मांग
मयंक के पिता रमेश लोहार ने बीबीसी मराठी से बातचीत में कहा,
“अभियुक्त को फांसी की सजा दी जानी चाहिए. वह एक गंभीर अपराधी है.”
“हमारे बेटे की हत्या कर दी गई और हमारा परिवार बर्बाद हो गया. इसलिए हम न्याय की मांग करते हैं.”
रमेश लोहार ने आगे कहा,
“मेरे बेटे ने सिर्फ अपने सहयात्रियों से लोकल ट्रेन का दरवाजा बंद करने के लिए कहा था और इसी वजह से उसकी जान ले ली गई.”
“मेरे बेटे ने उसका क्या बिगाड़ा था? प्रशासन को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए और उचित कार्रवाई करनी चाहिए.”
सुरक्षा की कमी के कारण मेरा भाई नहीं बच सका
मयंक की बहन मेघा लोहार ने बीबीसी मराठी से कहा,
“पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण मेरा भाई बच नहीं सका. वहां इतने लोग थे, फिर भी कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. उस पर बड़े चाकू से हमला किया गया. हमने अपने परिवार का एक हिस्सा खो दिया.”
“अभियुक्त को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. क्योंकि अगर उसे आज सजा नहीं मिली, तो कल और लोग मारे जाएंगे
लोकल ट्रेन में मामूली विवाद कैसे बना जानलेवा?
23 जून की रात काम खत्म करने के बाद मयंक चर्चगेट से नालासोपारा जाने वाली फास्ट लोकल ट्रेन के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में घर लौट रहे थे.
उस दिन मुंबई में भारी बारिश हो रही थी. डिब्बे का दरवाजा खुला हुआ था, जिससे बारिश का पानी और तेज हवा अंदर आ रहे थे. इसलिए मयंक ने रोशन सुवर्णा नाम के एक सहयात्री से दरवाजा बंद करने का अनुरोध किया.
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