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सावधान नेशन न्यूज़

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बार फिर अमेरिका के उस दावे का सीधा खंडन करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है।

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मोहिनी कुमारी

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक बार फिर अमेरिका के उस दावे का सीधा खंडन करने से इनकार कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
12 फरवरी 2026 को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका संयुक्त बयान ही इस मुद्दे पर “फ्रेमवर्क” है और उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया चलेगी।
संयुक्त बयान में रूसी तेल का कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन अमेरिकी “फैक्ट शीट” में अभी भी यह लिखा है कि भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।
हालांकि अमेरिका ने अपनी फैक्ट शीट से दालों और कृषि से जुड़े विवादित संदर्भ हटा दिए हैं।


अमेरिकी पक्ष क्या कह रहा है?
S. Paul Kapur ने अमेरिकी हाउस सब-कमेटी की सुनवाई में कहा कि
“भारत रूसी तेल की खरीद घटा रहा है और अमेरिकी ऊर्जा ज्यादा खरीद रहा है, जैसा हम चाहते थे।”
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ने भी पहले इसी तरह के बयान दिए थे।
व्हाइट हाउस फैक्ट शीट के अनुसार, 2 फरवरी को ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, और भारत की कथित प्रतिबद्धता के आधार पर 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाने की बात कही गई।


भारत की प्रतिक्रिया:-
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पहले कहा था कि भारत की ऊर्जा खरीद “कीमत, उपलब्धता और जोखिम” के आधार पर तय होती है।
लेकिन MEA ने यह स्पष्ट “हाँ या नहीं” जवाब देने से इनकार किया कि क्या भारत ने रूसी तेल खरीद कम करने का वादा किया है।
संसद में विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से लगातार सवाल पूछ रहा है।

निष्कर्ष:-
अमेरिका का दावा है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम की है और अमेरिकी ऊर्जा की ओर रुख किया है।
भारत आधिकारिक रूप से इस दावे का सीधा खंडन नहीं कर रहा, लेकिन संयुक्त बयान में रूसी तेल का कोई जिक्र नहीं होने की बात दोहरा रहा है।


फिलहाल, यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के “फ्रेमवर्क” और व्याख्या के बीच अटका हुआ दिख रहा है।

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