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सावधान नेशन न्यूज़

ठाणे में शिवसेना (UBT) नेता प्रदीप ‘बालू’ पूर्णेकर की हत्या: ऑफिस में घुसकर फायरिंग, अब तक 3 गिरफ्तार; गोवा भाग रहे दो आरोपी पकड़े गए

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नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026

महाराष्ट्र के ठाणे में शिवसेना (UBT) के स्थानीय नेता प्रदीप उर्फ ‘बालू’ पूर्णेकर की हत्या के मामले में पुलिस जांच लगातार आगे बढ़ रही है। 2 अक्टूबर 2026 को सामने आई ताजा जानकारी के मुताबिक, ठाणे क्राइम ब्रांच ने दो और आरोपियों—निखिल यादव और नितेश पवार—को अलीबाग के पास से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों कथित आरोपी वारदात के बाद गोवा की तरफ भागने की कोशिश कर रहे थे। इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या तीन हो गई है।

हालांकि इस मामले में कई गंभीर आरोप और संभावित वजहें सामने आई हैं, लेकिन हत्या का अंतिम मकसद अभी पुलिस जांच में पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए राजनीतिक साजिश या किसी खास व्यक्ति की भूमिका को अभी तथ्य के तौर पर नहीं कहा जा सकता।


29 सितंबर की रात क्या हुआ था?
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना 29 सितंबर 2026 की रात करीब 9:30 बजे ठाणे के मानपाड़ा-मनोरमा नगर इलाके में स्थित प्रदीप पूर्णेकर के कार्यालय में हुई। पूर्णेकर उस समय अपने कार्यालय में मौजूद थे। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उन पर हमला कर दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक हमलावरों ने कई राउंड फायरिंग की। अलग-अलग रिपोर्टों में गोलियों की संख्या चार से पांच बताई गई है, जबकि शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने सात राउंड फायर किए जाने का दावा किया है। इसलिए गोलीबारी की सटीक संख्या को लेकर पुलिस की अंतिम पुष्टि का इंतजार करना उचित होगा।

पूर्णेकर को गोली लगने के साथ ही धारदार हथियार से भी हमला किए जाने की बात सामने आई है। उनके सिर और गर्दन के आसपास गंभीर चोटें आने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

हमलावरों ने कैसे दिया वारदात को अंजाम?
पुलिस में दर्ज शिकायत और जांच से सामने आई जानकारी के अनुसार, घटना के समय पूर्णेकर के कार्यालय में उनके परिचित प्रकाश उर्फ पप्या शिंदे भी मौजूद थे। बताया गया है कि शिंदे पहले पूर्णेकर के करीबी सहयोगी और मित्र रहे थे।
शिकायत के मुताबिक, घटना से कुछ समय पहले पूर्णेकर के कार्यालय में मौजूद दो लोगों को बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद कुछ संदिग्ध लोग वहां पहुंचे और थोड़ी देर बाद कार्यालय के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी।
जब लोग अंदर पहुंचे तो पूर्णेकर घायल हालत में पड़े थे। पप्या शिंदे भी वहां मौजूद था और बाद में घायल पूर्णेकर को अस्पताल ले जाने में शामिल रहा। पुलिस को उसकी भूमिका संदिग्ध लगी और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया।

पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमला पहले से योजनाबद्ध था या नहीं और कार्यालय के अंदर मौजूद लोगों की भूमिका क्या थी।


पहले पप्या शिंदे गिरफ्तार हुआ
हत्या के बाद पुलिस ने सबसे पहले प्रकाश उर्फ पप्या शिंदे को गिरफ्तार किया था। रिपोर्टों के अनुसार वह पूर्णेकर का पुराना सहयोगी था और घटना के समय वहां मौजूद था।
पुलिस को यह बात भी संदिग्ध लगी कि गोलीबारी के बावजूद शिंदे को कोई गंभीर चोट नहीं आई और वह घायल पूर्णेकर को अस्पताल ले जाने में शामिल रहा। जांच में उसके पिछले संबंधों और घटना से पहले की गतिविधियों को भी देखा जा रहा है।

हालांकि किसी आरोपी की गिरफ्तारी का मतलब यह नहीं होता कि अदालत ने उसकी भूमिका या अपराध साबित कर दिया है। आरोपों और पुलिस की जांच को न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम से अलग रखना जरूरी है।


अब निखिल यादव और नितेश पवार भी गिरफ्तार
2 अक्टूबर को इस मामले में बड़ा अपडेट सामने आया। ठाणे पुलिस ने निखिल यादव और नितेश पवार को गिरफ्तार किया। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों अलीबाग के पास छिपे हुए थे और वहां से गोवा भागने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

कुछ स्थानीय रिपोर्टों में निखिल यादव को कथित शूटर और नितेश पवार को भी हमले से जुड़े आरोपी के रूप में बताया गया है। लेकिन उनकी वास्तविक भूमिका, किसने गोली चलाई और हत्या की योजना में किसका क्या योगदान था, यह पुलिस की पूछताछ और आगे की जांच से स्पष्ट होना है।

फिलहाल मामले में तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पुलिस अन्य संदिग्धों की तलाश भी कर रही है।


दो बाइक भी पुलिस ने जब्त की
जांच में पुलिस ने उन वाहनों पर भी ध्यान केंद्रित किया है जिनका इस्तेमाल हमलावरों ने कथित तौर पर किया था। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने दो दोपहिया वाहन जब्त किए हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमलावर वारदात के बाद किस रास्ते से भागे और इसके बाद उन्होंने वाहन कहां छोड़े। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

सीसीटीवी फुटेज इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि इससे हमलावरों की गतिविधियों, उनके आने-जाने के रास्ते और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जोड़ने में मदद मिल सकती है।


हत्या की वजह क्या थी?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।
पुलिस फिलहाल राजनीतिक विवाद, व्यक्तिगत रंजिश और स्थानीय विवाद समेत अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार पूर्णेकर स्थानीय स्तर पर कुछ विवादित मुद्दों को लेकर सक्रिय थे और पुलिस यह भी देख रही है कि उनका किसी स्थानीय विवाद या अन्य गतिविधि से इस हत्या का संबंध था या नहीं।

पूर्णेकर के परिवार और शिवसेना (UBT) के कुछ नेताओं की ओर से राजनीतिक साजिश के आरोप भी लगाए गए हैं। परिवार ने कुछ राजनीतिक लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों पर ये आरोप लगाए गए हैं, उन्होंने इन्हें खारिज किया है। इसलिए इन आरोपों को पुलिस जांच में अभी साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

पुलिस ने SIT बनाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए ठाणे पुलिस ने विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया है। जांच की जिम्मेदारी अपराध शाखा के अधिकारियों को भी दी गई है। टीम आरोपियों की भूमिका, हत्या की साजिश, हथियारों की व्यवस्था, वाहनों और संभावित मददगारों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या से पहले संदिग्ध आरोपियों ने इलाके की रेकी की थी या नहीं और घटना के बाद उन्हें भागने में किसने मदद की।


FIR में पांच आरोपियों का जिक्र
ताजा उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मामले में पप्या शिंदे, संतोष कनोजिया, नितेश पवार, निखिल यादव और एक अज्ञात व्यक्ति समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से अब तीन लोग पुलिस की गिरफ्त में हैं।

बाकी संदिग्धों की तलाश जारी है और पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी घटना में कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे।


इस समय तक की पूरी तस्वीर
29 सितंबर की रात प्रदीप ‘बालू’ पूर्णेकर की ठाणे स्थित कार्यालय में गोलीबारी और धारदार हथियार से हमला कर हत्या की गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
पहले उनके पुराने सहयोगी पप्या शिंदे को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 2 अक्टूबर को निखिल यादव और नितेश पवार को अलीबाग के पास पकड़ा गया, जब वे कथित तौर पर गोवा की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे। इस तरह अब तक तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

पुलिस के सामने अभी सबसे बड़े सवाल हैं—हत्या की असली वजह क्या थी, किसने साजिश रची, गोली किसने चलाई, हथियार कहां से आए और घटना के पीछे कोई और व्यक्ति या समूह शामिल था या नहीं।
इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच, आरोपियों से पूछताछ, CCTV फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से मिलने की उम्मीद है। इसलिए फिलहाल राजनीतिक साजिश या किसी व्यक्ति की संलिप्तता को अंतिम सत्य बताना सही नहीं होगा। मामला जांच के अधीन है और अदालत में आरोप साबित होना बाकी है।

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