उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी ITI को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने हाल की बैठकों और सरकारी घोषणाओं में साफ कहा है कि युवाओं को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण नहीं बल्कि भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से राज्य के ITI संस्थानों में बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश को “स्किल कैपिटल” बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की जरूरतों से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत Artificial Intelligence (AI), Electric Vehicle (EV), Robotics, CNC मशीनिंग, 3D Printing और Semiconductor जैसी नई तकनीकों पर आधारित कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बदलती दुनिया में रोजगार के अवसर भी तेजी से तकनीक आधारित होते जा रहे हैं।
हाल में आई विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के 286 सरकारी ITI संस्थानों में लगभग 1.84 लाख सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सरकार का कहना है कि पहले जहां कई ITI पुराने पाठ्यक्रमों पर निर्भर थे, वहीं अब उन्हें उद्योगों की वर्तमान मांग के हिसाब से बदला जा रहा है। इसके लिए बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी भी की जा रही है।
इसी क्रम में Tata Technologies के सहयोग से कई ITI संस्थानों को हाईटेक बनाने की योजना शुरू की गई है। सरकारी जानकारी के मुताबिक लगभग 150 ITI संस्थानों को आधुनिक उपकरणों और स्मार्ट लैब से जोड़ा जा चुका है, जबकि कई अन्य संस्थानों में काम जारी है। इन संस्थानों में छात्रों को अब आधुनिक मशीनों पर प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है ताकि पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें सीधे उद्योगों में रोजगार मिल सके। सरकार ने यह भी माना है कि केवल भवन बनाना पर्याप्त नहीं है। अच्छी शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत होती है। इसी कारण हजारों प्रशिक्षकों के पदों को मंजूरी दी गई है। इससे लंबे समय से खाली पड़े पद भरने की उम्मीद है और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।
CM योगी ने अपने कई भाषणों में कहा है कि युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बनाना सरकार का लक्ष्य है। इसी सोच के तहत ITI प्रशिक्षण में स्वरोजगार और स्टार्टअप से जुड़े विषयों को भी शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि प्रशिक्षण के बाद छात्र छोटे उद्योग, मरम्मत केंद्र, तकनीकी सेवा या डिजिटल कारोबार भी शुरू कर सकें।
हालांकि इस पूरी योजना को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नए कोर्स शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा। कई ग्रामीण ITI संस्थानों में अब भी इंटरनेट, आधुनिक लैब और मशीनों की कमी है। कुछ जगहों पर पुराने उपकरणों से ही काम चलाया जा रहा है। यदि सरकार वास्तव में तकनीकी क्रांति लाना चाहती है तो जमीन स्तर पर सुविधाओं को समान रूप से मजबूत करना होगा।
इसके अलावा विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि AI और Semiconductor जैसे विषयों को पढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षकों की जरूरत होगी। यदि प्रशिक्षकों को सही प्रशिक्षण नहीं मिला तो नए कोर्स केवल कागजों तक सीमित रह सकते हैं। इसलिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करना है। फिर भी यह सच है कि उत्तर प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में अधिक सक्रियता दिखाई दे रही है। राज्य सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि आने वाले समय में रोजगार केवल डिग्री से नहीं बल्कि कौशल से मिलेगा। यही कारण है कि ITI और स्किल डेवलपमेंट को सरकार की आर्थिक योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का भी है। इसके लिए बड़े उद्योगों, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में प्रशिक्षित युवाओं की मांग भी बढ़ेगी। यदि ITI संस्थानों का आधुनिकीकरण सही तरीके से लागू हुआ तो लाखों युवाओं को इसका लाभ मिल सकता है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है कि CM योगी द्वारा ITI सुधार और तकनीकी शिक्षा को आधुनिक बनाने की खबर काफी हद तक सही है। सरकार ने वास्तव में कई योजनाएं शुरू की हैं और नई तकनीकों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती हैं और क्या ग्रामीण तथा छोटे शहरों के छात्रों तक भी समान सुविधाएं पहुंच पाती हैं।
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