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सीएम योगी बोले: 2017 से पहले जर्जर स्कूल, अब आधुनिक सुविधाओं से लैस यूपी की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

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मोहिनी कुमारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आए बड़े बदलावों को लेकर एक बार फिर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।

उन्होंने कहा कि साल 2017 से पहले प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद खराब थी। कई स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे थे, बुनियादी सुविधाओं का अभाव था और शिक्षा का स्तर भी संतोषजनक नहीं था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार के प्रयासों से अब प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिल रहा है।


सीएम योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल स्कूलों की मरम्मत करना ही नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करना भी रहा है। आज उत्तर प्रदेश के हजारों परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड, स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल और बेहतर बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।


उन्होंने बताया कि “ऑपरेशन कायाकल्प” के तहत राज्य के स्कूलों का कायाकल्प किया गया है। इस योजना के माध्यम से स्कूलों में बाउंड्री वॉल, बिजली, फर्नीचर, लाइब्रेरी और खेल के मैदान जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। इससे बच्चों के लिए पढ़ाई का माहौल बेहतर हुआ है और स्कूलों में नामांकन भी बढ़ा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजने से हिचकते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। आज सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाएं और शिक्षा का स्तर निजी स्कूलों को भी टक्कर दे रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि कई जिलों में सरकारी स्कूलों में नामांकन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।


उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में ‘निपुण भारत मिशन’ भी शामिल है, जिसका उद्देश्य बच्चों को बुनियादी पढ़ाई-लिखाई और गणित में दक्ष बनाना है। इस मिशन के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित मूल्यांकन किया जा रहा है।


सीएम योगी ने शिक्षकों की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में शिक्षकों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार ने शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम लागू किया है। साथ ही, उन्हें समय-समय पर ट्रेनिंग देकर नई शिक्षण तकनीकों से भी जोड़ा जा रहा है।


उन्होंने यह भी बताया कि छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा मुफ्त यूनिफॉर्म, किताबें, जूते-मोजे और स्कूल बैग उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा, मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है, जिससे उनकी सेहत और पढ़ाई दोनों में सुधार हो रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है। इसी दिशा में सरकार डिजिटल एजुकेशन को भी बढ़ावा दे रही है। कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती देने के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया गया, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।


उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था देश के लिए एक मॉडल के रूप में उभरेगी। इसके लिए सरकार लगातार नए कदम उठा रही है और शिक्षा के क्षेत्र में निवेश भी बढ़ा रही है।


अंत में सीएम योगी ने कहा कि “एक शिक्षित समाज ही विकसित समाज की नींव रखता है।” उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के बच्चे बेहतर शिक्षा पाकर देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

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