सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
स्थान: वाराणसी / नई दिल्ली
दिनांक: 28 जून, 2026
मुख्य समाचार:
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र और विशेष रूप से वाराणसी के प्रसंस्कृत खाद्य (Processed Food) क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी सामने आई है। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने वाराणसी से ओमान को 40 मीट्रिक टन (40,000 किलोग्राम) बिस्कुट के पहले निर्यात शिपमेंट को सफलतापूर्वक हरी झंडी दिखाई है। भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने के बाद वाराणसी से ओमान के लिए यह पहली बिस्कुट निर्यात खेप है।
वाराणसी की इस कंपनी ने तैयार किया माल:
इस ऐतिहासिक निर्यात खेप को वाराणसी के करखियांव फूड पार्क में स्थित निर्माता-निर्यातक कंपनी मैसर्स श्री तिरुपति बालाजी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार और निर्यात किया गया है। इस पहल को उत्तर प्रदेश के मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों (Value-Added Food Products) की वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या है इसका रूट? :
बिस्कुट की यह विशाल खेप सड़क मार्ग के जरिए वाराणसी से इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), कानपुर पहुंचेगी, जहां इसकी कस्टम्स क्लीयरेंस (सीमा शुल्क औपचारिकताएं) पूरी की जाएंगी। इसके बाद इसे मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNP) ले जाया जाएगा, जहां से समुद्री मार्ग के माध्यम से इसे अंतिम गंतव्य ओमान के लिए रवाना किया जाएगा।
APEDA और भारत-ओमान CEPA की बड़ी भूमिका:
अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (CEPA) के कारण खाड़ी देशों में भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए नए रास्ते खुले हैं। APEDA ने इस निर्यातक कंपनी को ‘आहार 2026’ (AAHAR 2026) और ‘गल्फूड 2026’ (Gulfood 2026) जैसे बड़े वैश्विक व्यापार मेलों में भाग लेने का अवसर दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक इसकी पहुंच आसान हो सकी।
भविष्य की योजनाएं:
एपीडा (APEDA) ने संकेत दिए हैं कि खाड़ी देशों (Gulf Markets) में भारतीय खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए आने वाले महीनों में वाराणसी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से ओमान के लिए प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की कई और खेप भेजने की योजना बनाई जा रही है। इससे स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फलने-फूलने का बड़ा मौका मिलेगा।