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विशाखापत्तनम स्टील प्लांट हादसा: पिघले स्टील के विस्फोट ने ली 8 मजदूरों की जान, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

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नई दिल्ली, 9 जून 2026

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित Rashtriya Ispat Nigam Limited (आरआईएनएल) के विजाग स्टील प्लांट में 8 जून 2026 को हुए भीषण औद्योगिक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। स्टील मेल्ट शॉप (SMS-1) में अचानक हुए विस्फोट और आग की घटना में 8 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 6 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है तथा दुर्घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा सोमवार शाम लगभग 4:15 बजे हुआ। उस समय स्टील मेल्ट शॉप-1 में कास्टिंग का कार्य चल रहा था। पिघले हुए गर्म स्टील को एक इकाई से दूसरी इकाई में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया के दौरान अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आग का बड़ा गोला छत तक पहुंच गया और ओवरहेड क्रेन भी आग की चपेट में आ गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट के बाद चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। कई कर्मचारी उस समय कार्यस्थल के पास मौजूद थे और उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिला। अत्यधिक तापमान वाले पिघले स्टील के फैलने से कई कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। राहत और बचाव दल ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और कर्मचारियों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।

केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने पुष्टि की है कि हादसे में 8 लोगों की मृत्यु हुई है जबकि 6 घायल अस्पताल में भर्ती हैं। घटना के तुरंत बाद प्लांट प्रबंधन ने प्रभावित क्षेत्र में काम बंद कर दिया और सुरक्षा घेरा बना दिया गया।

हादसे के बाद केंद्रीय इस्पात मंत्री H. D. Kumaraswamy ने मृतकों के परिजनों के लिए 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, बच्चों की शिक्षा और अन्य सहायता की घोषणा की। वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने घटना पर दुख जताते हुए घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने तथा पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया है।

दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए आरआईएनएल ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) के वरिष्ठ अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय बाहरी जांच समिति भी गठित की गई है। यह समिति तकनीकी खामियों, सुरक्षा मानकों और संचालन प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी।

इस हादसे के बाद श्रमिक संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारी उद्योगों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। कुछ यूनियनों ने उपकरणों के रखरखाव और सुरक्षा निरीक्षण की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की है।

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट का इतिहास भी औद्योगिक दुर्घटनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं रहा है। वर्ष 2012 में भी यहां एक बड़े विस्फोट में कई कर्मचारियों की जान गई थी। ऐसे में ताजा हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील उद्योग में हजारों डिग्री तापमान पर काम होता है, इसलिए सुरक्षा मानकों में थोड़ी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में नियमित सुरक्षा ऑडिट, आधुनिक उपकरणों का उपयोग और कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण देना बेहद आवश्यक है।
निष्कर्ष
विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में हुआ यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रबंधन के महत्व की गंभीर याद दिलाता है। 8 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है और कई कर्मचारी अभी भी अस्पताल में जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब पूरे देश की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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