कौशांबी! गाज़ियाबाद
तरुण कश्यप
गाजियाबाद से दबोचे गए जासूस; पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेज रहे थे संवेदनशील ठिकानों के वीडियो और तस्वीरें।
दिनांक: 15 मार्च 2026
भारत की सुरक्षा एजेंसियों और उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक साझा ऑपरेशन में जासूसी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में गाजियाबाद से एक महिला सहित कुल 6 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि ये लोग दिल्ली और एनसीआर के अति-संवेदनशील सैन्य ठिकानों और रेलवे स्टेशनों की गोपनीय जानकारी सीमा पार पाकिस्तान भेज रहे थे।
देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे महत्वपूर्ण शहरों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने गाजियाबाद से एक ऐसे गिरोह को दबोचा है जो भारत के सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की जासूसी कर रहा था। गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों के तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के हैंडलर्स से जुड़े पाए गए हैं।
- संवेदनशील ठिकानों की निगरानी: आरोपियों के पास से 50 से अधिक ऐसे वीडियो और तस्वीरें बरामद हुई हैं, जिनमें BSF, CRPF मुख्यालय, और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों की लाइव फुटेज शामिल है।
- हाई-टेक जासूसी: आरोपी जासूसी के लिए IP सोलर कैमरों और व्हाट्सएप का इस्तेमाल कर रहे थे, ताकि पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को रियल-टाइम जानकारी और लाइव वीडियो भेज सकें।
- नेटवर्क का खुलासा: पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर और संभवतः मुंबई के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की रेकी करना था। गिरफ्तार आरोपियों में एक महिला भी शामिल है जो इस नेटवर्क का हिस्सा थी।
- नौसेना से जुड़ा कनेक्शन: हाल ही में यूपी एटीएस (ATS) ने एक नौसेना कर्मी आदर्श कुमार को भी गिरफ्तार किया है, जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के ‘हनी ट्रैप’ का शिकार होकर युद्धपोतों और रणनीतिक नौसैनिक संपत्तियों की तस्वीरें साझा कर रहा था।
पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या इनका कोई बड़ा आतंकी हमला करने का इरादा था।
सुरक्षा एजेंसियों ने इस नेटवर्क के मुख्य सदस्यों की पहचान कर ली है, जो कथित तौर पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे:
- गिरफ्तार संदिग्ध: पुलिस ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से एक महिला सहित कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है.
- मुख्य आरोपी का पेशा: गिरोह के सदस्यों में से एक CCTV मैकेनिक के रूप में काम करता था। वह अपनी तकनीक का उपयोग सैन्य प्रतिष्ठानों और रेलवे स्टेशनों की लाइव रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी करने के लिए कर रहा था।
- हालिया अन्य गिरफ्तारी: इसी नेटवर्क से जुड़े तार के रूप में यूपी एटीएस ने आदर्श कुमार उर्फ लकी नौसेना कर्मीको भी आगरा से गिरफ्तार किया है। वह हनी ट्रैप का शिकार होकर युद्धपोतों की तस्वीरें साझा कर रहा था।
बैंक ट्रांजेक्शन और फंडिंग का खुलासा
जांच में इस जासूसी नेटवर्क को मिलने वाली फंडिंग और पैसों के लेनदेन के चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं।
- कमीशन आधारित मॉडल: आरोपियों को छोटी जानकारियां साझा करने के लिए ₹5,000 और अधिक संवेदनशील सैन्य जानकारी (जैसे सैनिकों की आवाजाही) के लिए ₹10,000 तक का भुगतान किया जाता था।
- म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) का उपयोग: पकड़े गए जालसाजों ने ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों का उपयोग जासूसी के पैसों को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
- बड़ी रकम की बरामदगी: कुछ मामलों में आरोपियों के पास से लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई है। उदाहरण के तौर पर, यूपी में पकड़े गए एक अन्य संदिग्ध के पास से ₹70 लाख की राशि मिली थी, जो जासूसी के बदले मिली थी।
- डिजिटल ट्रांजेक्शन: पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स (जैसे फैसल अफजल और आमिर मुजफ्फर) व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए निर्देश देते थे और पैसा डिजिटल माध्यमों से इन म्यूल खातों में भेजा जाता था।
जासूसी का तरीका
- IP सोलर कैमरे: आरोपी दिल्ली और एनसीआर के संवेदनशील ठिकानों पर नजर रखने के लिए हाई-टेक IP सोलर कैमरों का इस्तेमाल कर रहे थे ताकि लाइव फीड सीधे सीमा पार भेजी जा सके।
- सिम कार्ड की तस्करी: भारतीय सिम कार्डों को अवैध रूप से पाकिस्तान भेजा जा रहा था, ताकि पाकिस्तानी खुफिया अधिकारी (PIOs) भारतीय नंबरों का उपयोग करके व्हाट्सएप के जरिए जासूसों से संपर्क साध सकें।
“तो दिल्ली से लेकर मुंबई तक फैले इस जासूसी नेटवर्क का खात्मा तो हो गया है, पर सवाल अब भी वही है—हमारे बीच और कितने आस्तीन के सांप छिपे हैं? सावधान रहिए, सुरक्षित रहिए और देखते रहिए सावधान नेशन न्यूज़।