कानपुर! बांदा! महोबा
तरुण कश्यप
उत्तर प्रदेश के खनन जगत में उस वक्त भूचाल आ गया जब आयकर विभाग की टीमों ने एक ऐसे सिंडिकेट को बेनकाब किया, जो सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर 800 करोड़ रुपये की कर चोरी कर रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल का केंद्र एक साधारण ‘नौकर’ को बनाया गया था।
कागजों पर नौकर, खजाने पर मालिक का कब्जा
जांच में खुलासा हुआ कि एक रसूखदार व्यवसायी ने अपने घर में काम करने वाले नौकर के आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर कई पत्थर खदानें और डमी कंपनियां रजिस्टर्ड करा रखी थीं। महोबा में नौकर के नाम पर खदानों का पट्टा लेकर अरबों का कारोबार किया जा रहा था, जबकि असली मुनाफा मालिक की तिजोरी में जा रहा था।
4 दिन, 26 टीमें और 200 अफसर
कानपुर और दिल्ली की आयकर टीमों ने बांदा, महोबा और लखीमपुर खीरी सहित कई जिलों में एक साथ दबिश दी। छापेमारी के दौरान:
- अधिकारियों ने कारोबारियों के तहखानों तक की तलाशी ली।
- करीब 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी और जेवर बरामद किए जाने की खबर है।
- कई स्थानों पर मशीनों से नोट गिनने की नौबत आ गई और बरामद नकदी को सरकारी बैंक खातों में जमा कराया गया है।
अवैध कमाई का ‘मास्टर प्लान’ फेल
आयकर विभाग के अनुसार, इस गिरोह ने रियल एस्टेट, स्वास्थ्य और मैनपावर सप्लाई जैसे क्षेत्रों में भी बेनामी निवेश कर रखा था। छापेमारी में जब्त किए गए डिजिटल डेटा और डायरियों से पता चला है कि 800 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन पूरी तरह से टैक्स चोरी के दायरे में आता है।
विभागीय सख्त रुख
फिलहाल विभाग ने सभी संबंधित बैंक खातों को सीज कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इस मामले में अभी और भी बड़े सफेदपोशों के नाम सामने आ सकते हैं, जिन्होंने नौकरों और कर्मचारियों को ‘डमी डायरेक्टर’ बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है।
कहते हैं नौकर और मालिक का रिश्ता भरोसे का होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के महोबा और लखीमपुर खीरी से जो कहानी निकलकर आई है, उसने इस भरोसे के पीछे छिपे एक काले साम्राज्य का पर्दाफाश किया है। यहाँ एक रसूखदार मालिक ने अपने घरेलू नौकर को ‘मोहरा’ बनाकर सरकारी खजाने में ऐसी सेंध लगाई कि आयकर विभाग के अधिकारी भी माथा पकड़कर बैठ गए।
1. जुगलबंदी का ‘मास्टर प्लान’ (The Setup)
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी (व्यवसायी) ने सालों पहले अपने एक भरोसेमंद नौकर से उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक यह कहकर ले लिए थे कि उसे सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है या उसकी सैलरी सीधे खाते में आएगी। लेकिन असलियत में इन दस्तावेजों का इस्तेमाल ‘शेल कंपनियां’ (Shell Companies) और पत्थर खदानों के रजिस्ट्रेशन के लिए किया गया।
2. नौकर बना ‘डमी’ डायरेक्टर, मालिक बना ‘असली’ बेनेफिशियरी
- कागजों पर रसूख: सरकारी रिकॉर्ड में वह नौकर करोड़ों की टर्नओवर वाली कंपनी का मालिक था। उसके नाम पर करोड़ों के टेंडर लिए गए और पट्टे (Leases) अलॉट हुए।
- हकीकत में लाचारी: जबकि हकीकत में वह नौकर आज भी मालिक के घर पर मामूली पगार में झाड़ू-पोछा या ड्राइवरी का काम कर रहा था। उसे यह तक नहीं पता था कि उसके नाम पर बैंक में कितने शून्य वाले ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।
3. कैसे चलता था 800 करोड़ का खेल?
मालिक ने नौकर के नाम पर बैंक खाते खुलवाए, जिनका चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड खुद अपने पास रखा।
- पत्थर खदानों से होने वाली अवैध कमाई को इन खातों में घुमाया गया।
- काले धन को सफेद (Money Laundering) करने के लिए नौकर के नाम पर फर्जी खर्चे दिखाए गए।
- आयकर विभाग की टीम जब नौकर के घर पहुंची, तो उसकी फटीहाली देखकर दंग रह गई, जबकि उसके नाम के खातों से 800 करोड़ रुपये की कर चोरी के सुराग मिले।
4. जब खुला ‘तिजोरी’ का राज
छापेमारी के दौरान जब नौकर से पूछताछ हुई, तो वह रोने लगा। उसने बताया कि “साहब ने जहां अंगूठा लगाने को कहा, मैंने लगा दिया।” आयकर अधिकारियों को ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जिनसे साबित होता है कि ईमेल आईडी और फोन नंबर मालिक के करीबियों के थे, लेकिन नाम और हस्ताक्षर उस मासूम नौकर के।
5. रसूखदारों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
आयकर विभाग ने अब इस ‘बेनामी’ संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का मानना है कि यह सिर्फ एक नौकर नहीं है, ऐसे दर्जनों कर्मचारियों के नाम पर अरबों का निवेश किया गया है।
800 करोड़ का यह खेल बताता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहां एक नौकर को ‘मोहरा’ बनाकर सरकारी खजाने पर डाका डाला गया। लेकिन याद रहे, कानून के हाथ लंबे होते हैं और आयकर विभाग की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने साबित कर दिया है कि गुनाह चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक दिन उसका पर्दाफाश होकर ही रहता है।
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