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‘बाबिया’: शाकाहारी मगरमच्छ, जो 70 सालों तक रहा मंदिर का रक्षक? 

केरल! दिल्ली
तरुण कश्यप

आस्था और चमत्कार की दुनिया में आज हम बात कर रहे हैं उस ‘दिव्य’ रक्षक की, जिसकी कहानी सुनकर विज्ञान भी हैरान रह गया। हम बात कर रहे हैं ‘बाबिया’ की—वह मगरमच्छ जिसे केरल के श्री अनंत पद्मनाभ स्वामी मंदिर का रक्षक माना जाता था। 

  • कौन थी बाबिया?: बाबिया एक विशालकाय मगरमच्छ थी जो केरल के कासरगोड जिले के मंदिर की झील में रहती थी। स्थानीय लोगों का मानना था कि वह भगवान की दूत है और मंदिर के गर्भगृह की रक्षा करती है।
  • शाकाहारी जीवन: हैरान करने वाली बात यह है कि बाबिया पूरी तरह शाकाहारी थी। वह झील की मछलियों को नुकसान नहीं पहुँचाती थी और केवल मंदिर में चढ़ने वाला ‘प्रसाद’ (चावल और गुड़) खाती थी।
  • इंसानों से दोस्ती: 75 वर्षों के इतिहास में बाबिया ने कभी किसी श्रद्धालु या पुजारी पर हमला नहीं किया। पुजारी उसे नाम से बुलाते थे और वह पानी से बाहर आकर प्रसाद ग्रहण करती थी।
  • एक युग का अंत: बाबिया का निधन अक्टूबर 2022 में हुआ, जिसके बाद हजारों भक्तों और नेताओं ने उसे अंतिम विदाई दी। 

नया मोड़:
बाबिया की मौत के एक साल बाद, उसी झील में रहस्यमयी ढंग से एक और छोटा मगरमच्छ दिखाई दिया है, जिसे भक्त बाबिया का ही पुनर्जन्म मान रहे हैं। 

केरल के कासरगोड स्थित श्री अनंत पद्मनाभ स्वामी मंदिर की झील में प्रसिद्ध शाकाहारी मगरमच्छ बाबिया के निधन के लगभग एक साल बाद एक नया मगरमच्छ देखा गया है, जिसे भक्त और मंदिर प्रशासन चमत्कारी पुनर्जन्म मान रहे हैं। यह छोटा मगरमच्छ, जिसे अब ‘बाबिया’ ही कहा जा रहा है, उसी पवित्र स्थान पर पाया गया है, जो इस पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

  • कोई प्राकृतिक स्रोत नहीं: मंदिर प्रशासन के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है कि यह विशाल जीव इस छोटी सी झील तक कैसे पहुँचा, क्योंकि आसपास कोई नदी नहीं है। मंदिर के पास कोई अन्य जल निकाय नहीं होने के कारण इसका यहाँ प्रकट होना एक रहस्य बना हुआ है।
  • गुफा का रहस्य: मंदिर की झील में दाहिनी ओर एक रहस्यमयी गुफा (दरार) है। लोककथाओं के अनुसार, यह गुफा सीधे तिरुवनंतपुरम के प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर तक जाती है। मान्यता है कि मगरमच्छ इसी गुफा के रास्ते आता-जाता है और इसे ‘मूलास्थानम’ (भगवान का मूल निवास) की रक्षा के लिए भेजा जाता है। बाबिया इसी गुफा में विश्राम करती थी।
  • ब्रिटिश सैनिक वाली घटना: एक पुरानी कहानी के अनुसार, 1945 में एक ब्रिटिश सैनिक ने मंदिर के तत्कालीन रक्षक मगरमच्छ को गोली मार दी थी। आश्चर्यजनक रूप से, कुछ ही दिनों बाद उसी झील में एक नया मगरमच्छ (जिसे बाद में बाबिया नाम दिया गया) अचानक प्रकट हो गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब भी एक रक्षक मगरमच्छ की मृत्यु होती है, उसकी जगह दूसरा अपने आप आ जाता है। 

पुनर्जन्म का दावा: नया मगरमच्छ

  • अक्टूबर 2023 में वापसी: बाबिया की मृत्यु 9 अक्टूबर 2022 को हुई थी। ठीक एक साल बाद, अक्टूबर 2023 में उसी झील में एक छोटा मगरमच्छ फिर से देखा गया। मंदिर समिति और भक्त इसे बाबिया का पुनर्जन्म और दिव्य संकेत मान रहे हैं।
  • व्यवहार: इस नए मगरमच्छ का स्वभाव भी बाबिया की तरह शांत बताया जा रहा है, जो झील की मछलियों को नुकसान नहीं पहुँचाता और मंदिर के वातावरण में घुलमिल गया है। 

निष्कर्ष: जहाँ श्रद्धालु इसे भगवान विष्णु का चमत्कार मानते हैं, वहीं जीव वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हो सकता है मानसून के दौरान अत्यधिक बारिश या भूमिगत जल मार्गों के जरिए ये जीव यहाँ पहुँच जाते हों। हालांकि, बिना किसी स्थायी नदी मार्ग के इनका बार-बार एक ही स्थान पर प्रकट होना आज भी चर्चा का विषय है। 

“बाबिया का जाना एक युग का अंत था, लेकिन नए मगरमच्छ का उसी झील में प्रकट होना कई सवाल खड़े करता है। बिना किसी नदी मार्ग के आखिर ये रक्षक कहाँ से आते हैं? मंदिर की वो रहस्यमयी गुफा आखिर कहाँ खुलती है? रहस्य बरकरार है, और आस्था अटूट। देखते रहिए सावधान नेशन न्यूज, सच आप तक।”

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