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बंगाल के मालदा में : 7 न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बनाया बंधक, सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

मालदा ! प बंगाल
तरुण कश्यप

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां चुनावी ड्यूटी पर तैनात 7 न्यायिक अधिकारियों को उग्र भीड़ ने करीब 9 घंटे तक बंधक बनाए रखा। इन अधिकारियों में 3 महिला अधिकारी भी शामिल थीं। घटना कालियाचक ब्लॉक-II कार्यालय की है, जहां मतदाता सूची में सुधार (SIR) का काम चल रहा था।

(मुख्य बिंदु)

  • क्यों भड़की भीड़?: प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि SIR प्रक्रिया के तहत उनके नाम जानबूझकर मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। जब अधिकारियों ने मिलने से इनकार किया, तो भीड़ ने कार्यालय को चारों तरफ से घेर लिया।
  • 9 घंटे का तनाव: दोपहर 3:30 बजे से शुरू हुआ यह घेराव रात 1 बजे तक चला। अधिकारियों को बिना भोजन और पानी के कमरे में बंद रहना पड़ा।
  • बचाव अभियान: स्थिति बिगड़ते देख कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट को SOS संदेश भेजा। इसके बाद भारी पुलिस बल और केंद्रीय बलों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को हटाया और अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
  • सुप्रीम कोर्ट की फटकार: देश की शीर्ष अदालत ने इसे “कानून व्यवस्था की पूरी तरह विफलता” करार दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए इस मामले की NIA या CBI जांच की अनुमति दे दी है।

कालियाचक ब्लॉक-II (मालदा) की इस गंभीर घटना पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और सरकार की ओर से आए आधिकारिक बयानों का विवरण नीचे दिया गया है:

केंद्रीय गृह मंत्री और मंत्रालय का रुख

यद्यपि गृह मंत्री अमित शाह ने सीधे तौर पर कोई लंबा भाषण नहीं दिया, लेकिन मंत्रालय और सरकार के प्रतिनिधियों ने इस घटना को ‘संवैधानिक ढांचे पर हमला’ करार दिया है:

  • सुरक्षा बलों की तैनाती: गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तुरंत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती के आदेश दिए ताकि चुनावी ड्यूटी (SIR प्रक्रिया) में लगे न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा प्रदान की जा सके।
  • NIA/CBI जांच का समर्थन: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या CBI को सौंपने के विकल्प का पूरा समर्थन किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कोई सोची-समझी साजिश तो नहीं थी।
  • राज्य सरकार की विफलता: आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने इसे पश्चिम बंगाल में ‘कानून व्यवस्था की पूर्ण विफलता’ का उदाहरण माना है। 

प्रमुख राजनीतिक और आधिकारिक प्रतिक्रियाएं

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री ने 5 अप्रैल 2026 को इस घटना पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘तृणमूल कांग्रेस द्वारा प्रायोजित महा जंगलराज’ कहा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसी भी संवैधानिक संस्था (न्यायपालिका) का सम्मान नहीं करती है।
  • सुकान्त मजूमदार (केंद्रीय राज्य मंत्री): उन्होंने इसे “डरावना” और “सुनियोजित” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के “भड़काऊ बयानों” के कारण भीड़ ने अधिकारियों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की और उन्हें बंधक बनाया।
  • ममता बनर्जी का पलटवार: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बताया और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां और चुनाव आयोग पक्षपात कर रहे हैं। 

ताजा अपडेट

  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और DGP को ‘कारण बताओ’ (Show Cause) नोटिस जारी किया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
  • NIA की स्टेटस रिपोर्ट: NIA ने आज ही एक सीलबंद लिफाफे में अपनी प्रारंभिक स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है। 

घुसपैठियों और तस्करों के मन में मनोवैज्ञानिक डर पैदा करने के लिए इन खतरनाक जीवों को “प्राकृतिक बाधा” के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना तलाशी जा रही है।

“न्यायिक अधिकारियों पर हुआ यह हमला भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय है। ‘सावधान नेशन’ प्रशासन से जवाबदेही और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करता रहेगा। पल-पल की अपडेट्स के लिए जुड़े रहिए सावधान नेशन के साथ।”

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