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सावधान नेशन न्यूज़

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, 2027 चुनाव से पहले UCC और महिला आरक्षण को लेकर उठाए सवाल

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नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2026

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के वादे पर सवाल उठाते हुए इसे चुनाव से पहले किया गया वादा बताया।
अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा को चुनाव के समय ऐसे मुद्दे उठाने के बजाय जनता से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने महिला आरक्षण, शिक्षा, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों को लेकर भी योगी सरकार को घेरा।

अमित शाह के UCC वाले बयान पर क्या बोले अखिलेश?
अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही थी। इस पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक 2023 में संसद से पारित हो चुका है, तो उसे लागू करने की दिशा में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
उन्होंने भाजपा पर चुनाव के नजदीक आने पर नए वादे करने का आरोप लगाया। उनका सवाल था कि पहले से किए गए वादों का हिसाब जनता को क्यों नहीं दिया जा रहा है?

महिला आरक्षण पर अखिलेश ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की तुलना में अधिक महिलाओं को टिकट देने का प्रयास करेगी।
इस बयान के जरिए उन्होंने महिला भागीदारी को चुनावी राजनीति का अहम मुद्दा बनाया है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी उम्मीदवारों की पूरी सूची सामने नहीं आई है।
शिक्षा, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों पर भाजपा को घेरा
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कई आंकड़े सामने रखे।
उन्होंने दावा किया कि:
भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग 26 हजार प्राथमिक विद्यालय बंद किए गए।
27 हजार से अधिक शराब की दुकानें खोली गईं।
सरकारी नौकरियों में 11 हजार से अधिक आरक्षित पदों के साथ गड़बड़ी हुई।

प्रदेश में 20 से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए।
बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की 151 प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया।
अखिलेश यादव ने इन मुद्दों को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंकड़े अखिलेश यादव के लगाए गए आरोप और दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित सरकारी आंकड़े नहीं समझना चाहिए।

चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने चुनाव आयोग से मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने और गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीक तथा बायोमेट्रिक व्यवस्था का इस्तेमाल करने की मांग की। उन्होंने ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की अपनी पार्टी की मांग भी दोहराई।


2027 के चुनाव को लेकर क्या है अखिलेश यादव की तैयारी?
अखिलेश यादव लगातार अपनी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने की बात कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी का प्रयास है कि इन वर्गों के साथ युवाओं और महिलाओं को भी अपने राजनीतिक अभियान से जोड़ा जाए।
इससे पहले सितंबर में अखिलेश यादव ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी का वोट 27 हजार बढ़ाने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनने और संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी भी दी थी।

भाजपा की ओर से क्या जवाब आया?
भाजपा भी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने समाजवादी पार्टी के पुराने शासनकाल पर सवाल उठाते हुए कानून-व्यवस्था को लेकर ‘गुंडाराज’ और ‘माफियाराज’ जैसे आरोप लगाए थे।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी समाजवादी पार्टी के पुराने कार्यकाल और भर्ती व्यवस्था को लेकर उस पर निशाना साधते रहे हैं। इस तरह दोनों दलों के बीच चुनाव से पहले आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है।


2027 के चुनाव के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। वर्ष 2027 में यहां विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में शिक्षा, रोजगार, महिला आरक्षण, महंगाई, सामाजिक भागीदारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
अखिलेश यादव इन मुद्दों के जरिए भाजपा सरकार को घेर रहे हैं, जबकि भाजपा अपनी सरकार के कामकाज और पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के रिकॉर्ड को लेकर जवाब दे रही है।
फिलहाल सच्चाई यह है कि अखिलेश यादव ने भाजपा के खिलाफ कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं और 2027 के चुनाव के लिए अपनी पार्टी की रणनीति भी सामने रखी है। लेकिन चुनाव में किस पार्टी को जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता करेंगे।

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