सावधान नेशन न्यूज़

दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला: ज्यूरिख जा रही स्विस एयर की फ्लाइट के इंजन में लगी आग, 6 यात्री घायल

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तरुण कश्यप

नई दिल्ली: दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर रविवार तड़के एक बड़ा विमान हादसा होते-होते रह गया। स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख जा रहे स्विस इंटरनेशनल एयर लाइन्स के विमान (फ्लाइट LX147) के इंजन में टेकऑफ के दौरान अचानक आग लग गई। इस घटना के बाद रनवे पर ही विमान को खाली कराया गया।

घटना का विवरण:

  • समय: यह हादसा रविवार तड़के करीब 1:08 बजे हुआ。
  • विमान: एयरबस A330 (फ्लाइट LX147), जिसमें 228 यात्री, 4 नवजात बच्चे और 13 क्रू मेंबर्स सवार थे।
  • वजह: विमान जब रनवे 28 पर टेकऑफ के लिए दौड़ रहा था, तभी इसके बाएं इंजन में खराबी आई और आग की लपटें दिखाई दीं।

इमरजेंसी इवैक्यूएशन और चोटें:
पायलट ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए टेकऑफ को रोक दिया और विमान को रनवे पर ही रोक लिया। इसके तुरंत बाद ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित की गई और यात्रियों को इमरजेंसी स्लाइड (Emergency Slides) के जरिए बाहर निकाला गया।

  • इस अफरा-तफरी में 6 यात्री घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
  • चालक दल (क्रू) के सभी सदस्य सुरक्षित हैं, हालांकि एक क्रू मेंबर के पैर में मोच आई है।

एयरलाइन का बयान:
स्विस एयर ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित यात्रियों के लिए होटल और वैकल्पिक उड़ानों का इंतजाम किया जा रहा है। मामले की जांच के लिए एक तकनीकी टीम दिल्ली पहुंचेगी

इस हादसे में कोई बड़ी जनहानि या विमान को पूरी तरह तबाह होने से बचाने के पीछे मुख्य रूप से तीन तकनीकी और मानवीय कारण रहे:

1. पायलट का ‘रिजेक्टेड टेकऑफ’ (Rejected Takeoff) फैसला

हवाई जहाज के उड़ने की प्रक्रिया में एक खास गति होती है जिसे V1 (Decision Speed) कहते हैं।

  • समय पर फैसला: पायलट ने इंजन में खराबी का पता चलते ही विमान के V1 की गति पर पहुंचने से पहले ही टेकऑफ को रोक दिया। अगर विमान हवा में चला जाता, तो जलते हुए इंजन के साथ लैंडिंग करना कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण और खतरनाक होता।
  • ब्रेकिंग सिस्टम: विमान के ऑटो-ब्रेक और ‘थ्रस्ट रिवर्सर्स’ ने भारी विमान को रनवे की सीमा के भीतर ही रोक लिया, जिससे विमान रनवे से बाहर नहीं फिसला।

2. ‘इंजन फायर सप्रेशन सिस्टम’ (Engine Fire Suppression System)

आधुनिक एयरबस A330 विमानों के इंजनों में एक ऑटोमैटिक आग बुझाने का सिस्टम होता है।

  • जैसे ही कॉकपिट में ‘फायर अलार्म’ बजा, पायलटों ने इंजन को ईंधन की सप्लाई काट दी और फायर एक्सटिंग्विशर बॉटल्स को सक्रिय कर दिया। इससे आग बाकी विमान (पंखों और मुख्य बॉडी) में फैलने से रुक गई।
  • विमान के इंजन इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि अगर उनमें आग लग भी जाए, तो वह एक ‘कवच’ (Nacelle) के अंदर ही रहे।

3. एयरपोर्ट अथॉरिटी की त्वरित प्रतिक्रिया (Emergency Response)

  • फायर टेंडर: विमान के रुकते ही दिल्ली एयरपोर्ट की ‘एयरपोर्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग’ (ARFF) टीम कुछ ही सेकंडों में मौके पर पहुंच गई। उन्होंने बाहर से फोम और पानी की बौछार कर आग पर काबू पाया।
  • कुशल इवैक्यूएशन: यात्रियों को ‘इमरजेंसी स्लाइड्स’ के जरिए विमान से बाहर निकाला गया। हालांकि स्लाइड्स से उतरते वक्त कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन यह उन्हें धुएं और संभावित विस्फोट से बचाने के लिए जरूरी था।

निष्कर्ष: पायलटों की सूझबूझ और सुरक्षा प्रणालियों के सही समय पर काम करने की वजह से यह हादसा एक बड़ी त्रासदी में बदलने से बच गया।

“हवाई सफर में सुरक्षा सबसे ऊपर है, और इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया फैसला और तकनीकी मुस्तैदी सैकड़ों जानें बचा सकती है। इस खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में जरूर बताएं। देश और दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए जुड़े रहिए सावधान नेशन न्यूज के साथ। निष्पक्ष खबर, आपकी ताकत।”

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