सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026
दिल्ली में अचानक होने वाली मेडिकल इमरजेंसी, खासकर कार्डियक अरेस्ट और सड़क हादसों के समय शुरुआती मदद को मजबूत करने के लिए CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation की ट्रेनिंग को आम लोगों तक पहुंचाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य साफ है—एम्बुलेंस या अस्पताल पहुंचने से पहले आसपास मौजूद व्यक्ति मरीज को तुरंत प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता दे सके।
हालांकि, इस खबर को लेकर एक जरूरी तथ्य स्पष्ट करना भी जरूरी है। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर दिल्ली में इस समय कोई एक ऐसी एकल CPR ट्रेनिंग मुहिम नहीं दिखती जिसकी शुरुआत और समाप्ति की एक निश्चित तारीख घोषित की गई हो। इसके बजाय दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य संगठनों द्वारा अलग-अलग समय पर CPR और फर्स्ट-एड प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
CPR की जरूरत क्यों महसूस हुई?
कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति का दिल अचानक प्रभावी ढंग से रक्त पंप करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। अस्पताल या एम्बुलेंस के पहुंचने में समय लग सकता है, इसलिए घटनास्थल पर मौजूद व्यक्ति द्वारा तुरंत CPR शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।
यही सोच अब केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है। दिल्ली में सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में भी लोगों को CPR और प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी दी जा रही है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उसके सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों का दायरा केवल पुलिस या पेशेवर ड्राइवरों तक सीमित नहीं है। ड्राइवरों, आम जनता, छात्रों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को भी इन कार्यक्रमों में शामिल किया जाता है।
दिल्ली में कब से चल रही है ऐसी ट्रेनिंग?
CPR जागरूकता दिल्ली में कोई बिल्कुल नई शुरुआत नहीं है। अलग-अलग संस्थाओं द्वारा पहले भी आम नागरिकों और छात्रों को इसका प्रशिक्षण दिया जाता रहा है।
उदाहरण के लिए, AIIMS ने दिसंबर 2022 में दिल्ली के स्कूलों में CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया था। उस समय AIIMS की टीम ने स्कूलों में जाकर छात्रों को CPR का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया था और कम से कम 15 स्कूलों में कार्यक्रम करने की योजना बताई गई थी।
इसके बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों में भी CPR प्रदर्शन और प्रशिक्षण को लगातार शामिल किया गया। 2025 में आयोजित एक कार्यक्रम में CPR का लाइव प्रदर्शन किया गया था।
2025 के इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के रोड सेफ्टी पवेलियन में भी CPR प्रशिक्षण और लाइव डेमो रखा गया। पुलिस के अनुसार, इस पवेलियन के माध्यम से 2.49 लाख से अधिक लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया, जिनमें लगभग 5,000 छात्र शामिल थे।
ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी बन रहे हैं ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को आपात स्थिति में तुरंत मदद करने के लिए तैयार करना है।
अप्रैल 2025 में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और एम्बुलेंस सेवा से जुड़ी पहल के तहत 100 से अधिक ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों को CPR और बेसिक फर्स्ट-एड की ट्रेनिंग दिए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को सड़क हादसे या अन्य आपात स्थिति में शुरुआती चिकित्सा सहायता देने के लिए सक्षम बनाना था।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रैफिक पुलिसकर्मी अक्सर हादसे की जगह पर एम्बुलेंस से पहले या उसके आसपास मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें CPR और प्राथमिक उपचार का ज्ञान होने से शुरुआती प्रतिक्रिया बेहतर हो सकती है।
ड्राइवरों को CPR सिखाने की सोच भी पुरानी है
दिल्ली में ड्राइवरों को फर्स्ट-एड सिखाने की कोशिश भी पहले से होती रही है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में ऑटो-रिक्शा चालकों को वयस्कों के लिए फर्स्ट-एड का प्रशिक्षण देने की पहल का उल्लेख मिलता है।
इसके पीछे तर्क यह था कि ऑटो चालक शहर के अलग-अलग इलाकों में लगातार मौजूद रहते हैं, उन्हें आसपास के अस्पतालों की जानकारी होती है और वे सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति तक जल्दी पहुंच सकते हैं। इस तरह उन्हें Good Samaritan यानी जरूरत के समय मदद करने वाले नागरिक के रूप में तैयार किया जा सकता है।
हालांकि, अक्टूबर 2026 में चल रही किसी एक नई मुहिम में ऑटो चालकों, ट्रैकरों और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की संयुक्त ट्रेनिंग शुरू होने की बात का मुझे कोई ऐसा ताजा आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला है, जिससे इसकी शुरुआत और अंतिम तारीख निश्चित रूप से बताई जा सके। इसलिए इस हिस्से को बिना पुष्ट प्रमाण के एक नई, निश्चित तारीख वाली योजना बताना सही नहीं होगा।
बस चालकों को भी मिल रही CPR ट्रेनिंग
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की जनवरी 2026 की आधिकारिक न्यूजलेटर जानकारी इस दिशा में चल रहे काम का मजबूत प्रमाण देती है।
पुलिस के अनुसार, हर बुधवार पंजाबी बाग ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्क में DTC और अन्य बस चालकों के लिए पूरे दिन का रोड सेफ्टी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसमें हर सप्ताह 200 से अधिक ड्राइवर शामिल होते हैं और उन्हें सड़क सुरक्षा के साथ-साथ फर्स्ट-एड और CPR की ट्रेनिंग भी दी जाती है।
इससे साफ है कि CPR को केवल अस्पताल आधारित कौशल न मानकर सड़क पर काम करने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कौशल के रूप में देखा जा रहा है।
क्या आम नागरिक इसमें रुचि दिखा रहे हैं?
हां, सार्वजनिक भागीदारी के अच्छे संकेत जरूर मिलते हैं, लेकिन दिल्ली में केवल CPR ट्रेनिंग के लिए कितने आम नागरिकों ने 2026 में प्रशिक्षण लिया है, इसका कोई एक आधिकारिक समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं मिला।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के विभिन्न सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सामने आई है। IITF 2025 के रोड सेफ्टी पवेलियन में 2.49 लाख से अधिक लोगों को जागरूक किया गया और वहां CPR प्रशिक्षण भी शामिल था।
राष्ट्रीय स्तर पर भी CPR जागरूकता में लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 13 से 17 अक्टूबर 2025 को अखिल भारतीय CPR जागरूकता सप्ताह आयोजित किया था। सरकार के अनुसार, इस दौरान देशभर में 7.47 लाख से अधिक नागरिकों को जोड़ा गया और 6,06,374 से अधिक लोगों को व्यावहारिक CPR प्रशिक्षण दिया गया।
इससे संकेत मिलता है कि CPR सीखने को लेकर आम लोगों में रुचि बढ़ रही है।
❤️ ट्रेनिंग में आखिर सिखाया क्या जाता है?
CPR प्रशिक्षण का उद्देश्य किसी व्यक्ति को डॉक्टर बनाना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में शुरुआती जीवनरक्षक कदम उठाने योग्य बनाना है।
आमतौर पर प्रशिक्षण में लोगों को बताया जाता है कि—
व्यक्ति के अचानक गिरने पर उसकी स्थिति कैसे जांचें।
सामान्य सांस न होने की स्थिति को कैसे पहचानें।
तुरंत आपातकालीन सहायता कैसे बुलाएं।
छाती के बीच में CPR compressions कैसे किए जाते हैं।
एम्बुलेंस आने तक CPR कैसे जारी रखा जाता है।
सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से कैसे न हिलाएं।
फर्स्ट-एड और CPR में क्या अंतर है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के कार्यक्रमों में CPR के साथ फर्स्ट-एड और दुर्घटना पीड़ितों की मदद से जुड़ी जानकारी भी दी जाती रही है।
यह ट्रेनिंग कब तक चलेगी?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि इसे एक निश्चित अंतिम तारीख वाली एकल मुहिम कहना अभी सही नहीं होगा।
उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि दिल्ली में CPR प्रशिक्षण अलग-अलग कार्यक्रमों के रूप में लगातार चल रहा है। उदाहरण के तौर पर बस चालकों के लिए पंजाबी बाग में साप्ताहिक कार्यक्रम जारी है और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के रोड सेफ्टी कार्यक्रमों में CPR को नियमित रूप से शामिल किया जा रहा है।
इसलिए फिलहाल सही निष्कर्ष यह है कि CPR जागरूकता और प्रशिक्षण दिल्ली में एक सतत प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ रहा है, न कि केवल कुछ दिनों के अभियान के रूप में।
क्यों खास है यह पहल?
इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यही है कि मेडिकल इमरजेंसी में मदद करने की जिम्मेदारी सिर्फ डॉक्टर या अस्पताल तक सीमित रखने के बजाय समाज के अलग-अलग वर्गों तक जीवनरक्षक कौशल पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
अगर कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी, बस चालक, ऑटो चालक, छात्र या आम नागरिक किसी व्यक्ति को अचानक कार्डियक अरेस्ट में देखता है और उसे CPR की सही जानकारी है, तो वह एम्बुलेंस आने तक महत्वपूर्ण शुरुआती सहायता दे सकता है।
इसी सोच से ‘पहले मदद करने वाला नागरिक’ तैयार करने की अवधारणा मजबूत होती है।
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