बिहार ! दिल्ली
तरुण कश्यप
जमीन के बदले नौकरी मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी खबर मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (23 मार्च, 2026) को राबड़ी देवी द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें उन्हें केस से जुड़े कुछ खास दस्तावेजों की कॉपी देने से इनकार कर दिया गया था।
मुख्य विवरण :
- याचिका का उद्देश्य: राबड़ी देवी ने निचली अदालत से उन 1,600 ‘अनरिलाइड’ (unrelied) दस्तावेजों की मांग की थी, जिन्हें जांच एजेंसी ने जब्त तो किया है लेकिन आरोप पत्र (chargesheet) में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया है।
- निचली अदालत का फैसला: इससे पहले 18 मार्च, 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू यादव और राबड़ी देवी की इस मांग को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तब टिप्पणी की थी कि इन याचिकाओं का मकसद ट्रायल में देरी करना है।
- हाईकोर्ट की सुनवाई: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज जैन ने मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद CBI को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल, 2026 की तारीख तय की है।
मामला क्या है?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियों के बदले लालू परिवार और उनके करीबियों के नाम पर बेहद कम कीमतों पर जमीन लिखवाई गई थी। CBI का दावा है कि इन नियुक्तियों के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन नहीं निकाला गया था।
बिहार की राजनीति में ‘जमीन के बदले नौकरी’ का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनके बच्चों के इर्द-गिर्द घूमता यह केस करीब 15 साल पुराना है। लेकिन हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा राबड़ी देवी की याचिका पर CBI को नोटिस जारी किए जाने के बाद, लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है और इसमें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का क्या रोल है?
1. क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। CBI का आरोप है कि उस दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे मुंबई, जबलपुर, कोलकाता आदि) में ‘ग्रुप-डी’ के पदों पर कई लोगों को नियुक्त किया गया।
मुख्य आरोप:
- इन नियुक्तियों के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन या उचित चयन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
- नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों या उनके परिवारों ने इसके बदले में लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ को बेहद कम कीमतों (सर्किल रेट से भी कम) पर जमीनें ट्रांसफर कीं।
2. राबड़ी देवी की क्या भूमिका है?
CBI की चार्जशीट और जांच के अनुसार, राबड़ी देवी इस कथित घोटाले की मुख्य लाभार्थियों में से एक हैं। उन पर निम्नलिखित आरोप हैं:
- जमीन का ट्रांसफर: आरोप है कि कई उम्मीदवारों ने सीधे राबड़ी देवी के नाम पर अपनी जमीन की रजिस्ट्री की। उदाहरण के तौर पर, कुछ मामलों में जमीन पहले किसी तीसरे पक्ष को दी गई और फिर उपहार (Gift) के रूप में राबड़ी देवी को ट्रांसफर कर दी गई।
- सस्ते दाम पर खरीद: जांच एजेंसी का दावा है कि राबड़ी देवी ने कौड़ियों के भाव में पटना और अन्य इलाकों में कीमती जमीनें हासिल कीं, जो उन लोगों से जुड़ी थीं जिन्हें रेलवे में नौकरी मिली।
- कंपनी का मालिकाना हक: राबड़ी देवी उस कंपनी (AK Infosystems) में भी शामिल रही हैं, जिसे घोटाले के जरिए हासिल की गई संपत्तियों को रखने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
- साजिश का हिस्सा: CBI ने उन्हें इस पूरी आपराधिक साजिश में एक सक्रिय भागीदार माना है, जिसमें पद का दुरुपयोग कर निजी लाभ कमाया गया।
3. अब तक क्या हुआ? (Current Status)
- ED और CBI की जांच: इस मामले की जांच दो एजेंसियां कर रही हैं—CBI (भ्रष्टाचार के लिए) और ED (मनी लॉन्ड्रिंग के लिए)।
- जमानत: राबड़ी देवी, लालू यादव और मीसा भारती फिलहाल इस मामले में अदालत से मिली नियमित जमानत पर बाहर हैं।
- ताजा मोड़: राबड़ी देवी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन दस्तावेजों की मांग की है जिन्हें CBI ने जब्त तो किया है पर सबूत नहीं बनाया। कोर्ट ने इस पर CBI से जवाब मांगा है।
4. लालू परिवार का पक्ष (The Defense)
लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने हमेशा इन आरोपों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बताया है। उनका कहना है कि:
- रेलवे में नियुक्तियां नियमों के तहत हुई थीं।
- जमीन की खरीद-बिक्री वैध तरीके से की गई थी।
- विपक्षी दल जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान कर रहे हैं।
निष्कर्ष :
‘लैंड फॉर जॉब’ केस राबड़ी देवी और लालू परिवार के लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में जैसे-जैसे ट्रायल आगे बढ़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इन दस्तावेजों और गवाहों के आधार पर क्या फैसला सुनाती