सावधान नेशन न्यूज़

Satark Rahe, Sach Jaane

खुर्जा सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में आयकर विभाग का सर्वे, ₹200 करोड़ की गड़बड़ी का अंदेशा , जांच जारी

बुलंदशहर ! खुर्जा
तरुण कश्यप

खुर्जा, बुलंदशहर:
बुलंदशहर के खुर्जा स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सोमवार को आयकर विभाग की टीम ने अचानक पहुँचकर सर्वे की कार्रवाई को अंजाम दिया। नोएडा और गाजियाबाद के बाद अब खुर्जा में हुई इस कार्रवाई से विभाग और स्थानीय भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है। 

मुख्य बिंदु:

  • जांच का दायरा: आयकर विभाग की 6 सदस्यीय टीम ने संयुक्त निदेशक विजय सिंह के नेतृत्व में करीब ढाई से पांच घंटे तक रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की।
  • ₹200 करोड़ की अनियमितता: प्रारंभिक जांच में करीब ₹200 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं।
  • दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा: जांच के दौरान संपत्तियों की रजिस्ट्री में फर्जी पैन कार्ड के इस्तेमाल और आधार कार्ड के नंबरों में हेरफेर की आशंका जताई गई है।
  • SFT रिपोर्टिंग में चूक: अधिकारियों के अनुसार, कार्यालय द्वारा ₹30 लाख से अधिक की संपत्तियों के ‘विशिष्ट वित्तीय लेन-देन’ (SFT) की अनिवार्य रिपोर्टिंग आयकर विभाग को नहीं की गई थी।
  • दस्तावेज जब्त: टीम ने डिजिटल डेटा, मूल दस्तावेज और रजिस्ट्री से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें अपने कब्जे में ले ली हैं। 

विभाग की कार्रवाई:
आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के बाद फर्जीवाड़े की यह रकम और भी बढ़ सकती है। इस मामले में विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच जारी है। आगामी दो महीनों के भीतर विभाग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। 

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के खुर्जा में सोमवार को आयकर विभाग की एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। विभाग की टीम ने सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पर धावा बोला और घंटों तक दस्तावेजों की जांच की। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर विभाग को यह कदम क्यों उठाना पड़ा? हमारी इस विशेष रिपोर्ट में देखिए ₹200 करोड़ के इस कथित फर्जीवाड़े की पूरी डिटेल। 



बुलंदशहर का खुर्जा इलाका कल उस समय छावनी में तब्दील हो गया जब आयकर विभाग की 6 सदस्यीय टीम ने अचानक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तक दी। संयुक्त निदेशक विजय सिंह के नेतृत्व में यह सर्वे करीब पांच घंटे तक चला, जिसमें विभाग ने डिजिटल डेटा और रजिस्ट्री फाइलों को खंगाला। 

सर्वे शुरू होने के 5 मुख्य कारण :

  1. SFT रिपोर्टिंग में भारी चूक: आयकर नियमों के मुताबिक, ₹30 लाख से अधिक की संपत्ति की रजिस्ट्री होने पर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय को इसकी सूचना ‘विशिष्ट वित्तीय लेन-देन’ (SFT) के रूप में आयकर विभाग को देनी अनिवार्य है। जांच में पाया गया कि खुर्जा कार्यालय ने पिछले लंबे समय से ऐसी सैकड़ों रजिस्ट्रियों की जानकारी विभाग से साझा नहीं की थी।
  2. फर्जी पैन कार्ड का खेल: प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि करोड़ों की संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में या तो पैन कार्ड दिए ही नहीं गए, या फिर फर्जी पैन नंबरों का इस्तेमाल किया गया। विभाग को शक है कि नाम और नंबरों में हेरफेर करके टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया है।
  3. कानपुर से जुड़े तार: यह पूरी कार्रवाई कोई इत्तेफाक नहीं थी। दरअसल, कानपुर आयकर विभाग द्वारा पकड़ी गई एक बड़ी गड़बड़ी के बाद उत्तर प्रदेश के कई रजिस्ट्री कार्यालय रडार पर आ गए थे। उसी कड़ी को जोड़ते हुए खुर्जा में यह सर्वे शुरू किया गया।
  4. ₹200 करोड़ की विसंगति: विभाग के पास मौजूद डेटा और कार्यालय के फिजिकल दस्तावेजों में भारी अंतर मिला है। यह विसंगति प्रारंभिक तौर पर ₹200 करोड़ की आंकी गई है, जो जांच आगे बढ़ने पर और भी बढ़ सकती है।
  5. नकद लेन-देन के नियम टूटे: नियमानुसार ₹20,000 से अधिक का नकद लेन-देन जमीन के बैनामों में नहीं किया जा सकता, लेकिन सर्वे के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जहां इस नियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं। 

“आयकर विभाग के इस कड़े रुख से साफ है कि अब टैक्स चोरी और अवैध संपत्तियों का खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला। सावधान नेशन न्यूज़ इस मामले की हर तहकीकात आप तक पहुंचाता रहेगा। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।”

सावधान नेशन न्यूज़ अब व्हाट्सऐप चैनल पर

        व्हाट्सऐप चैनल से जुड़ें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *