सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच सर्राफा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की बदलती रणनीति और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के चलते सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब 3200 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया है, जबकि चांदी की कीमत में ₹11,900 प्रति किलोग्राम तक की भारी गिरावट आई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोना “सुरक्षित निवेश” (Safe Haven) माना जाता है और इसकी मांग बढ़ जाती है। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है। इसके अलावा निवेशक अब अन्य एसेट क्लास जैसे बॉन्ड और डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सर्राफा बाजार कमजोर पड़ा है।
भारत में भी इस गिरावट का सीधा असर देखने को मिला है। प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। जहां कुछ दिन पहले तक सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर था, वहीं अब इसमें तेजी से गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में तो और भी अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो औद्योगिक मांग और वैश्विक सप्लाई-चेन से भी प्रभावित होती है।
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। निवेशक फिलहाल बड़े निवेश से बच रहे हैं और स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं शादी-ब्याह के सीजन के बावजूद ग्राहकों की खरीदारी में भी कमी आई है, क्योंकि लोग कीमतों में और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकेतों के अनुसार, अमेरिका और अन्य देशों में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के कारण निवेशक गोल्ड से दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार को प्रभावित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें और भी अस्थिर रह सकती हैं। अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है तो कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है, लेकिन अगर आर्थिक नीतियां सख्त रहती हैं तो गिरावट का दौर जारी रह सकता है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें और बाजार की स्थिति को समझकर ही निवेश करें। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर भी हो सकती है, लेकिन जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।
फिलहाल सर्राफा बाजार में आई इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों और आम लोगों दोनों को चौंका दिया है। अब सभी की नजर आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पर टिकी हुई है, जहां वैश्विक हालात ही तय करेंगे कि सोने-चांदी की चमक फिर लौटेगी या नहीं।
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