सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर आतंकी नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) की टीमों ने बुधवार को श्रीनगर, शोपियां और गांदरबल जिलों में एक साथ छापेमारी करते हुए कुल 10 स्थानों को निशाना बनाया। इस कार्रवाई को हाल के दिनों में बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों और आतंकी संगठनों के नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से अंजाम दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी एक व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें उन लोगों और संगठनों की पहचान की जा रही है, जो आतंकवाद को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों को इन इलाकों में कुछ संदिग्ध संपर्कों और डिजिटल माध्यमों के जरिए आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के संकेत मिले थे, जिसके आधार पर यह ऑपरेशन शुरू किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, लैपटॉप और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जाएगी, जिससे यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किस तरह की गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और आतंकी संगठनों के लिए भर्ती करने की कोशिशें की जा रही थीं।
काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और इसके लिए संबंधित अदालतों से सर्च वारंट प्राप्त किए गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस ऑपरेशन के तहत किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं।
श्रीनगर, शोपियां और गांदरबल जैसे इलाकों को सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इन क्षेत्रों में पहले भी आतंकी गतिविधियों और नेटवर्क की मौजूदगी के संकेत मिलते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इन इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं और समय-समय पर ऐसे ऑपरेशन चलाकर नेटवर्क को कमजोर करने की कोशिश करती रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में आतंकवाद का स्वरूप बदल रहा है। अब सीधे हमलों के बजाय आतंकी संगठन डिजिटल माध्यमों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उन्हें पकड़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। ऐसे में काउंटर-इंटेलिजेंस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को दें। साथ ही यह भी कहा गया है कि आम नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह कार्रवाई उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही की जा रही है।
इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने सभी स्थानों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। छापेमारी के समय इलाके में आने-जाने पर भी नजर रखी गई और स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की गई।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क के खिलाफ लगातार अभियान चला रही हैं। इससे पहले भी कई बार छापेमारी और गिरफ्तारियों के जरिए बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया जा चुका है। इन अभियानों का उद्देश्य न केवल सक्रिय आतंकियों को पकड़ना है, बल्कि उनके समर्थन तंत्र को भी खत्म करना है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से आतंकियों के मनोबल पर असर पड़ता है और उनके नेटवर्क को संचालित करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, इसके साथ ही यह जरूरी है कि स्थानीय युवाओं को सकारात्मक दिशा में मार्गदर्शन दिया जाए, ताकि वे किसी भी तरह के बहकावे में न आएं।
फिलहाल, काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और जब्त किए गए सबूतों की जांच में जुटी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम जानकारी सामने आ सकती है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क का दायरा कितना व्यापक था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
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