कौशांबी ! गाज़ियाबाद
तरुण कश्यप
दिल्ली से सटे गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी संवेदनशील स्थानों, विशेषकर दिल्ली कैंट, रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की रेकी कर उनके वीडियो और फोटो विदेश (पाकिस्तान) में बैठे अपने आकाओं को भेज रहे थे।
मुख्य आरोपी और गिरोह का खुलासा
पुलिस ने इस मामले में सुहैल मलिक उर्फ रोमियो (मेरठ निवासी) सहित कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया है कि सुहैल मलिक ही इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था और उसने अन्य युवाओं को पैसे का लालच देकर इस काम में शामिल किया था। गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:
- सुहेल मलिक उर्फ रोमियो (मेरठ)
- साने इरम उर्फ महक (संभल)
- प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार (सभी भोवापुर निवासी)
पुलवामा और मुंबई तक फैले तार
पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क के सदस्य केवल दिल्ली-NCR तक ही सीमित नहीं थे। आरोपियों ने मुंबई और अन्य महत्वपूर्ण शहरों में भी रेकी की थी। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इन आरोपियों के तार पुलवामा और जम्मू-कश्मीर के अन्य आतंकी मॉड्यूल से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
कैसे चल रहा था खेल?
- सोशल मीडिया का इस्तेमाल: आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर से सीधे व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जुड़े हुए थे।
- फंडिंग: प्रत्येक असाइनमेंट के लिए आरोपियों को 10,000 से 15,000 रुपये तक दिए जा रहे थे।
- तकनीकी सबूत: पुलिस ने इनके पास से 8 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें संवेदनशील ठिकानों के वीडियो और विदेशी नंबरों से बातचीत के चैट लॉग मिले हैं।
पुलिस की कार्रवाई
एडिशनल सीपी (कानून व्यवस्था) राजकरन नैय्यर के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 61(2) और शासकीय गुप्त अधिनियम (Official Secrets Act) की धारा 3/5 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
1. भर्ती और प्रलोभन (Recruitment):
मास्टरमाइंड सुहैल मलिक उर्फ रोमियो गरीब और बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बनाता था। उसने गाजियाबाद के भोवापुर इलाके के युवाओं (प्रवीन, राज, शिवा और रितिक) को अपनी बातों में फंसाया। उन्हें बताया गया कि बस कुछ फोटो और वीडियो खींचने के बदले उन्हें 10 से 15 हजार रुपये प्रति टास्क मिलेंगे।
2. पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क:
सुहैल मलिक सीधे पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर के संपर्क में था। यह संपर्क मुख्य रूप से WhatsApp और Telegram जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होता था। हैंडलर उसे Google Maps की लोकेशन या किसी खास सैन्य ठिकाने का नाम भेजता था जिसकी रेकी करनी होती थी।
3. कोडनेम और ग्रुप चैट्स:
पकड़े गए आरोपियों ने व्हाट्सएप पर गुप्त ग्रुप बना रखे थे। इन ग्रुप्स में ये सीधे नाम लेने के बजाय कोडनेम का इस्तेमाल करते थे। महिला आरोपी साने इरम उर्फ महक इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रही थी, जो सूचनाओं को फिल्टर करने और आगे भेजने का काम करती थी।
4. रेकी का तरीका :
- सैन्य ठिकाने: आरोपी दिल्ली कैंट और अन्य आर्मी कैंपों के बाहर आम नागरिक बनकर घूमते थे। वे मोबाइल को इस तरह पकड़ते थे जैसे वे कॉल कर रहे हों या सेल्फी ले रहे हों, जबकि असल में वे गेट, संतरी पोस्ट और अंदर आने-जाने वाली गाड़ियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे होते थे।
- रेलवे स्टेशन: रेलवे स्टेशनों पर ये प्लेटफॉर्म के लेआउट, सुरक्षा जांच के पॉइंट्स और वीआईपी गेट्स की रेकी करते थे।
- पुलवामा कनेक्शन: जांच में संकेत मिले हैं कि इन्होंने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे पुलवामा और जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों में जाकर वहां के सुरक्षा घेरे की तस्वीरें खींचीं और उन्हें सरहद पार भेजा।
5. डेटा ट्रांसफर और फंडिंग:
जैसे ही वीडियो या फोटो शूट हो जाती थी, उसे तुरंत विदेशी हैंडलर को भेज दिया जाता था और फोन से डिलीट कर दिया जाता था ताकि पकड़े जाने पर सबूत न मिलें। पैसे का भुगतान डिजिटल वॉलेट्स या तीसरे पक्ष के खातों के जरिए किया जाता था ताकि ट्रांजेक्शन को ट्रैक करना मुश्किल हो।
6. सर्विलांस से बचने के तरीके:
आरोपी अक्सर अपनी लोकेशन बदलते रहते थे और एक ही सिम कार्ड का लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करते थे। वे भीड़भाड़ वाले इलाकों (जैसे कौशांबी और आनंद विहार) का इस्तेमाल छिपने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए करते थे ताकि किसी को शक न हो।
प्रमुख बरामदगी:
- 8 स्मार्टफोन्स: जिनमें डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है।
- विदेशी चैट लॉग्स: पाकिस्तानी नंबरों से मिले निर्देश।
- मैप्स और स्केच: कुछ संवेदनशील ठिकानों के हाथ से बनाए गए नक्शे।
“कौशांबी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब इन आरोपियों के मोबाइल डेटा को खंगाल रही हैं ताकि पुलवामा और मुंबई तक फैले इस जासूसी नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ा जा सके। देश की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। खबरों के सटीक विश्लेषण के लिए बने रहिए सावधान नेशन न्यूज़ के साथ।”