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मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु मामलों पर NHRC सख्त, सीधी जिले में 53 महिलाओं की मौत पर मांगी रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 4 जून 2026

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वर्ष के भीतर 53 गर्भवती और प्रसूता महिलाओं की मौत के मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस गंभीर मुद्दे पर National Human Rights Commission (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया है। आयोग ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

NHRC के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच मध्य प्रदेश के सीधी जिले में गर्भावस्था, प्रसव अथवा प्रसव के बाद की जटिलताओं के कारण 53 महिलाओं की मृत्यु हुई। प्रारंभिक जानकारी में इन मौतों के पीछे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, जागरूकता का अभाव तथा समय पर उपचार न मिलना प्रमुख कारण बताए गए हैं। आयोग ने इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय माना है क्योंकि सुरक्षित मातृत्व प्रत्येक महिला का मूल अधिकार है।

रिपोर्टों के अनुसार सीधी जिला लंबे समय से मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है। राज्य स्वास्थ्य विभाग की रैंकिंग में भी यह जिला लगातार निचले स्थानों पर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिले के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, स्त्री रोग विशेषज्ञों तथा तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी है। कई बार गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार के लिए दूर स्थित रीवा भेजना पड़ता है, जिससे रास्ते में ही उनकी हालत बिगड़ जाती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए NHRC ने मध्य प्रदेश सरकार से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पूछा है कि इन मौतों के पीछे वास्तविक कारण क्या थे, स्वास्थ्य विभाग ने क्या कदम उठाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या योजना बनाई गई है। आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि क्या संबंधित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कोई विशेष कार्रवाई की गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ मृत्यु केवल चिकित्सा समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं नियमित जांच नहीं करातीं, एनीमिया जैसी समस्याएं आम हैं और कई मामलों में प्रसव अस्पताल के बजाय घर पर कराया जाता है। यदि समय पर जांच, पोषण और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध न हो तो जटिलताएं जानलेवा साबित हो सकती हैं। सीधी जिले के मामले ने इन चुनौतियों को फिर से उजागर कर दिया है।

रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि मृत महिलाओं की औसत आयु लगभग 26 वर्ष थी और अधिकांश महिलाएं पहली या दूसरी बार मां बनी थीं। कई मामलों में प्रसव के दौरान निर्णय लेने में देरी, अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की कमी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं सामने आईं। कुछ महिलाओं की मौत इलाज के लिए दूसरे शहर ले जाते समय रास्ते में भी हुई।

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर जांच और समीक्षा की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई है। प्रशासन का कहना है कि मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले का विश्लेषण किया जाएगा और जहां भी लापरवाही या व्यवस्थागत कमी मिलेगी, वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस घटना को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया है।
NHRC का हस्तक्षेप इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आयोग पहले भी स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही से जुड़े मामलों पर सख्त रुख अपनाता रहा है। आयोग का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक समान और समय पर पहुंच नागरिकों के जीवन और गरिमा के अधिकार से जुड़ा विषय है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों की जान जा रही है तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता, गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, पोषण कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान भी उतने ही आवश्यक हैं। यदि इन क्षेत्रों में सुधार नहीं हुआ तो ऐसी घटनाएं दोबारा सामने आ सकती हैं।
फिलहाल सभी की नजर NHRC द्वारा मांगी गई रिपोर्ट और राज्य सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह मामला केवल सीधी जिले का नहीं, बल्कि देश के उन सभी क्षेत्रों के लिए चेतावनी है जहां मातृ स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी पर्याप्त स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं। यदि इस घटना से सबक लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाता है तो भविष्य में अनेक महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।

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