सासाराम/रोहतास: बिहार के अन्न भंडार कहे जाने वाले रोहतास जिले में इन दिनों खेतों में सुनहरी चमक बिखरी हुई है। चैत्र की तपती धूप और पछुआ हवाओं के बीच किसान गेहूं की कटनी में दिन-रात एक किए हुए हैं। जिले के मैदानी इलाकों में गेहूं की कटनी अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। लेकिन, इस खुशी और मेहनत के साथ-साथ एक बड़ा डर भी किसानों और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रहा है—वह है ‘अग्निकांड’ का खतरा।
तेज पछुआ हवाएं और बढ़ता जोखिम
अप्रैल का महीना शुरू होते ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। जिले का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है। दोपहर के समय चलने वाली तेज पछुआ हवाएं न केवल शरीर को झुलसा रही हैं, बल्कि खेतों में खड़ी सूखी फसलों के लिए “बारूद” का काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में हवा की नमी बेहद कम हो जाती है, जिससे सूखी फसल या भूसा एक छोटी सी चिंगारी पाकर भी भभक उठता है।
अक्सर देखा गया है कि बीड़ी-सिगरेट की एक जलती हुई तीली या बिजली के झूलते तारों से निकलने वाली एक चिंगारी देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसल को राख कर देती है। रोहतास के डेहरी, नोखा, राजपुर और कोचस जैसे इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई दुखद घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे किसानों की साल भर की मेहनत मिट्टी में मिल गई।
जिला प्रशासन की सख्ती और ‘पराली’ पर रोक
अग्निकांड की बढ़ती घटनाओं और पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए रोहतास जिला प्रशासन ने इस वर्ष बेहद कड़े रुख अपनाए हैं। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार, खेतों में पराली (गेहूं के अवशेष) जलाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी किसान कटनी के बाद बचे हुए डंठलों को खेत में आग लगाएगा, उसके खिलाफ न केवल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी, बल्कि उसे कृषि विभाग द्वारा दी जाने वाली सभी सरकारी योजनाओं और अनुदानों (Subsidy) से वंचित कर दिया जाएगा। सैटेलाइट के जरिए भी खेतों की निगरानी की जा रही है ताकि कहीं भी आग लगने की घटना का तुरंत पता चल सके।
दमकल विभाग और ‘फायर अलर्ट’
संभावित आगजनी को रोकने के लिए जिले के सभी अनुमंडलों में दमकल विभाग (Fire Brigade) को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अग्निशमन अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी गाड़ियों और मोटर पंपों की व्यवस्था की है ताकि तंग रास्तों से भी खेतों तक पहुंचा जा सके।
प्रशासन ने गांवों में ‘अग्नि मित्र’ और स्थानीय वालंटियर्स को भी जागरूक किया है। दमकल विभाग ने किसानों को कुछ बुनियादी सुझाव दिए हैं:
कटनी के समय खेत के पास पानी और बालू का इंतजाम रखें।
बिजली के ट्रांसफार्मर के पास खड़ी फसल की कटनी पहले कर लें।
थ्रेशर चलाते समय मशीन से निकलने वाली चिंगारी पर पैनी नजर रखें।
दोपहर की तेज हवा के दौरान कटनी या थ्रेशिंग का काम सावधानी से करें।
किसान और मशीनीकरण की चुनौती
आजकल कंबाइन हार्वेस्टर के बढ़ते उपयोग ने कटनी को आसान तो बना दिया है, लेकिन इसने पराली की समस्या को बढ़ा दिया है। हार्वेस्टर केवल ऊपर से बालियां काटता है और नीचे का बड़ा हिस्सा खेत में ही छूट जाता है। किसान अगली फसल (मूंग या धान) की तैयारी के लिए जल्दबाजी में उसे जला देते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि किसान ‘स्ट्रॉ रीपर’ (Straw Reaper) का उपयोग करें, जिससे न केवल खेतों की सफाई होती है बल्कि पशुओं के लिए कीमती भूसा भी तैयार हो जाता है। इससे आग लगने का खतरा भी कम होता है और जमीन की उर्वरता भी बनी रहती है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
रोहतास की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर टिकी है। गेहूं की फसल की बर्बादी का मतलब सिर्फ एक किसान का नुकसान नहीं, बल्कि बाजार की पूरी सप्लाई चेन का प्रभावित होना है। एक अनुमान के मुताबिक, जिले में हर साल अग्निकांड की वजह से करोड़ों रुपये की फसल नष्ट हो जाती है। इसके अलावा, खेतों की आग अक्सर पास की बस्तियों तक पहुंच जाती है, जिससे गरीबों के आशियाने भी जलकर राख हो जाते हैं।
निष्कर्ष और अपील
रोहतास के किसानों के लिए यह समय परीक्षा की घड़ी है। एक तरफ प्रकृति की मार (भीषण गर्मी) है तो दूसरी तरफ अपनी उपज को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की चुनौती। जिला प्रशासन की अपील है कि किसान सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या फायर ब्रिगेड को सूचित करें।
याद रखें, आपकी एक छोटी सी लापरवाही न केवल आपकी मेहनत जला सकती है, बल्कि पूरे गांव को संकट में डाल सकती है। ‘सावधान’ रहकर ही हम अपनी फसल और अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकते हैं।
रिपोर्ट: सावधान नेशन न्यूज ब्यूरो, रोहतास (बिहार)












